नीट मामले के असली दोषी बच निकले, 15 करोड़ यूजर्स को मिली सजा
नीट मामले के असली दोषी बच निकले, 15 करोड़ यूजर्स को मिली सजा
-टेलीग्राम बैन पर भड़के सीईओ पावेल ड्यूरोव
-नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम पर लगाया है अस्थायी प्रतिबंध
नई दिल्ली । नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा संबंधी फर्जी सूचनाओं और कथित नकल गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर विवाद गहरा गया है। टेलीग्राम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पावेल ड्यूरोव ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि कुछ लोगों की गलत हरकतों की सजा करोड़ों वैध उपयोगकर्ताओं को भुगतनी पड़ रही है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सिफारिश पर 21 जून को होने वाली नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा को देखते हुए टेलीग्राम की सेवाओं को 22 जून तक अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद गूगल ने अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम ऐप हटा दिया है, जबकि एप्पल द्वारा भी इसी प्रकार का कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
“करोड़ों निर्दोष यूजर्स प्रभावित”
सीईओ पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कि प्रश्नपत्र लीक या गोपनीय सामग्री साझा करने वाले कुछ लोगों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भारत में टेलीग्राम के 15 करोड़ से अधिक सामान्य और वैध उपयोगकर्ता हैं, जो इस फैसले से प्रभावित हुए हैं, जबकि वास्तविक दोषी वे लोग हैं जिन्होंने परीक्षा से जुड़ी सामग्री का दुरुपयोग किया।
प्रतिबंध से नहीं रुकी लीक की गतिविधियां
ड्यूरोव के अनुसार, टेलीग्राम पर रोक लगाने से कथित प्रश्नपत्र लीक या गलत सूचना फैलाने वाली गतिविधियां समाप्त नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि ऐसे लोग केवल दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय पूरे मंच को बंद करना प्रभावी समाधान नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टेलीग्राम ने परीक्षा सामग्री लीक और फर्जीवाड़े से जुड़े सैकड़ों चैनलों को हटाने की कार्रवाई की है। साथ ही प्लेटफॉर्म पर संदेशों में संशोधन की पहचान को और स्पष्ट बनाने के लिए “एडिटेड” टैग को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है, ताकि बाद में संदेशों में बदलाव कर भ्रामक दावे करने जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।
नीट पुनर्परीक्षा के मद्देनजर सख्ती
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने के बाद पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने 21 जून की परीक्षा से पहले किसी भी प्रकार की अफवाह, फर्जी संदेश या संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है।
एनटीए ने बताई कार्रवाई की वजह
एनटीए का कहना है कि टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर का कुछ मामलों में दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद कुछ संदेशों में बदलाव कर उन्हें पहले से मौजूद प्रश्नपत्र लीक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई। इसी कारण सरकार ने टेलीग्राम को भारत में अपने मैसेज एडिट फीचर पर भी 30 जून तक अस्थायी रोक लगाने का निर्देश दिया है। एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी नए प्रश्नपत्र लीक की घटना के कारण नहीं, बल्कि परीक्षा से जुड़े फर्जी संदेशों और अफवाहों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से की गई है। उनके अनुसार, भ्रामक संदेशों के कारण अभ्यर्थियों में भ्रम, चिंता और मानसिक तनाव बढ़ रहा था।
डिजिटल अधिकार समूहों ने उठाए सवाल
टेलीग्राम पर प्रतिबंध के फैसले को लेकर डिजिटल नीति विशेषज्ञों और अधिकार समूहों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों को रोकने के लिए पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाना अनुपातिक कदम नहीं माना जा सकता। इससे उन करोड़ों उपयोगकर्ताओं की संचार और सूचना तक पहुंच प्रभावित होती है, जिनका विवादित गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है।
आईटी एक्ट के तहत जारी हुआ आदेश
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों को भ्रामक सूचनाओं से बचाने के लिए उठाया गया है।
