Three brave individuals from Indore, who have become self-reliant

भिक्षावृत्ति त्यागकर ‘आत्मनिर्भर’ बने इंदौर के 3 जांबाज कर्तव्य पथ पर दिल्ली की परेड में होंगे ‘विशेष अतिथि’

भिक्षावृत्ति त्यागकर ‘आत्मनिर्भर’ बने इंदौर के 3 जांबाज कर्तव्य पथ पर दिल्ली की परेड में होंगे ‘विशेष अतिथि’

कलेक्टर की पहल पर हवाई जहाज से पहुँचे नई दिल्ली

देश भर से चुने गए 100 मेहमानों में इंदौर के प्रतिनिधि शामिल

इंदौर : इन्दौर अब भिक्षावृत्ति मुक्त शहर के रूप में देश के मानचित्र पर एक नई प्रेरणादायक गाथा लिख रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ के स्वप्न को साकार करते हुए, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा देश भर से ऐसे 100 नागरिकों को चयनित किया गया है, जिनमें संस्था के प्रतिनिधियों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल है जिन्होंने भिक्षावृत्ति की राह छोड़कर सम्मान का जीवन चुना है। इस गौरवशाली सूची में इंदौर शहर से 5 लोग गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में कर्तव्य पथ पर शामिल होंगे।
सड़क से हवाई सफर: सम्मान की एक नई उड़ान
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने इन जांबाजों के संघर्ष को सम्मान देते हुए लिए गए निर्णय अनुसार इन्हें दिल्ली का सफर हवाई मार्ग (Flight) से कराया गया। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उन लोगों के गौरव की उड़ान है जिन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने का साहस दिखाया। जिला प्रशासन, नगर निगम, संस्था प्रवेश, महिला बाल विकास विभाग और श्रम विभाग के साझा प्रयासों से इन्दौर को भारत का पहला भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने का गौरव प्राप्त हुआ है।
इन्दौर के गौरवशाली प्रतिनिधि:
1. सुश्री आरती प्रजापति (11 वर्ष): कभी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर थी, आज शासकीय स्कूल में कक्षा 4 की मेधावी छात्रा है।
2. श्रीमती ज्योति प्रजापति (30 वर्ष): भिक्षावृत्ति छोड़ अब एक गेस्ट हाउस में हाउसकीपिंग के जरिए ससम्मान आजीविका कमा रही हैं।
3. श्री रवि यादव (37 वर्ष): अब स्वयं के हुनर से गोबर के गणेश मूर्ति का निर्माण कर स्वरोजगार से जुड़े हैं।
इनके साथ संस्था प्रवेश के प्रतिनिधि सुश्री रूपाली जैन एवं श्री रूपेन्द्र दोशी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं, जो इस दल का नेतृत्व करेंगे। भारत सरकार की ‘स्माइल’ (SMILE) योजना के तहत इंदौर में अब तक लगभग 5,500 व्यक्तियों को भिक्षावृत्ति के दलदल से मुक्त कराकर पुनर्वासित किया जा चुका है। यह आंकड़ा देश में एक रिकॉर्ड है। इंदौर ने पुनर्वास और कौशल विकास के क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है। अभियान के तहत बच्चों को शिक्षा और वयस्कों को नशा एवं भिक्षावृत्ति छुड़वाकर स्वरोजगार से जोड़कर उनके जीवन में स्थाई बदलाव लाया गया है। बीमार बुजुर्ग एवं मानसिक विक्षिप्त लोगों को रेस्क्यू कर उनका इलाज कराया गया।
इंदौर ज़िला प्रशासन एवं संस्था प्रवेश की यह पहल पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति का भी कायाकल्प किया जा सकता है। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने इंदौर के विशेष अतिथियों को शुभकामनाएं दीं।

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