Welfare of Tribal Society Minister Dr. Kunwar Vijay Shah

पूर्ण मानवीय संवेदना के साथ जनजाति समाज के कल्याण के लिए करें कार्य : मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह

पूर्ण मानवीय संवेदना के साथ जनजाति समाज के कल्याण के लिए करें कार्य : मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह

मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत तकनीकी आधारित सतत् जनजाति विकास अवधारणा कार्यशाला का किया उद्घाटन

भोपाल : नरेन्‍द्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने जनजाति समाज के अभावों और पीड़ा को समझा है और इसे दूर करने के लिए ठोस नीतियां बनायी हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष जैसी पहल से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए ठोस कार्य हो रहे हैं। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. शाह ने आज भोपाल के आदि भवन में जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत तकनीकी आधारित सतत् जनजाति विकास अवधारणा पर आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही। कार्यशाला में विभाग के प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह सहित प्रदेश भर से आए विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।
जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. शाह ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि 1990 से लगातार जनजातीय अंचल से विधायक हैं। इतने लंबे समय से उन्‍होंने जनजाति समाज के साथ लगातार कार्य किया है। विभागीय अधिकारी भी सतत् रूप से गांवों में और वनवासी अंचल के बीच जाएं और उनके जीवन को नजदीक से देखें। साथ ही प्रत्यक्ष अनुभव से जो परिस्थितियां सामने आती है उसके अनुरूप कार्य करें । मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजाति वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को उनके द्वार तक पहुँचाने के लिए “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत शिविरों के माध्यम से 18 विभागों की 25 सेवाओं का लाभ जनजाति वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री डॉ. शाह ने अपने उद्बोधन में विस्तार से बताया कि किस तरह से वनवासी अंचल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि सन 1990 के दशक में वनवासी अंचल में अनेक अभाव थे और अत्याचार जैसी घटनाएँ भी होती रहती थी, परंतु अब परिस्थिति बदल गयी है। आज जनजाति समाज, विकास की मुख्यधारा में शामिल हैं। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हजार पानी की बॉटल वितरित कर रहे हैं। साथ ही पहली से कक्षा बारहवीं तक 45 हज़ार बच्चों को शुद्ध पेयजल के लिए पानी की बॉटल प्रदान कर रहे हैं। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र की 150 ग्राम पंचायतों में प्रत्येक में वॉटर कूलर और आरओ लगा रहे हैं। इससे हर गाँव, हर स्कूल में शुद्ध पेयजल सुलभ होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष अनुभव से मैंने यह देखा है कि जनजाति अंचल की बच्चियां आवागमन की बेहतर सुविधाओं के अभाव में शहर के कॉलेज जाने में हिचकिचाती हैं और सुविधाओं के अभाव में उच्च शिक्षा छोड़ भी देती हैं। ऐसी परिस्थितियों में उन्होंने प्रायोगिक तौर पर अपने क्षेत्र में 4 बसें संचालित की, जिससे कॉलेज जाने वाली बालिकाओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार होना चाहिए। कार्यशाला में आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला में आजीविका तथा रोज़गार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग पर मैनिट के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. संयम शुक्ला ने अपना उद्बोधन दिया। सतत जनजातीय विकास में जीआईएस तथा उपग्रह सुदूर संवेदन विषय पर आईआईएसईआर के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने संबोधित किया।
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में जनजातीय आजीविका तथा उद्यमिता विकास विषय पर आईएएस RM-TRIFED श्रीमती प्रीति मैथिल ने संबोधित किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय कृषि को बदल रहा है विषय पर आईआईआईटी के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रज्‍योति देब ने संबोधित किया। साथ ही स्वास्थ्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग विषय पर आईआईआईटी के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. निखिल कुमार सिंह ने उपयोगी जानकारी दी।

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Date : 19 May 2026 Posted By : EDITOR
पूर्ण मानवीय संवेदना के साथ जनजाति समाज के कल्याण के लिए करें कार्य : मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह
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पूर्ण मानवीय संवेदना के साथ जनजाति समाज के कल्याण के लिए करें कार्य : मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह

मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत तकनीकी आधारित सतत् जनजाति विकास अवधारणा कार्यशाला का किया उद्घाटन

भोपाल : नरेन्‍द्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने जनजाति समाज के अभावों और पीड़ा को समझा है और इसे दूर करने के लिए ठोस नीतियां बनायी हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष जैसी पहल से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए ठोस कार्य हो रहे हैं। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. शाह ने आज भोपाल के आदि भवन में जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत तकनीकी आधारित सतत् जनजाति विकास अवधारणा पर आयोजित कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही। कार्यशाला में विभाग के प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा, आयुक्त डॉ. सतेंद्र सिंह सहित प्रदेश भर से आए विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।
जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. शाह ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि 1990 से लगातार जनजातीय अंचल से विधायक हैं। इतने लंबे समय से उन्‍होंने जनजाति समाज के साथ लगातार कार्य किया है। विभागीय अधिकारी भी सतत् रूप से गांवों में और वनवासी अंचल के बीच जाएं और उनके जीवन को नजदीक से देखें। साथ ही प्रत्यक्ष अनुभव से जो परिस्थितियां सामने आती है उसके अनुरूप कार्य करें । मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजाति वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को उनके द्वार तक पहुँचाने के लिए “जन भागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत शिविरों के माध्यम से 18 विभागों की 25 सेवाओं का लाभ जनजाति वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री डॉ. शाह ने अपने उद्बोधन में विस्तार से बताया कि किस तरह से वनवासी अंचल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि सन 1990 के दशक में वनवासी अंचल में अनेक अभाव थे और अत्याचार जैसी घटनाएँ भी होती रहती थी, परंतु अब परिस्थिति बदल गयी है। आज जनजाति समाज, विकास की मुख्यधारा में शामिल हैं। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हजार पानी की बॉटल वितरित कर रहे हैं। साथ ही पहली से कक्षा बारहवीं तक 45 हज़ार बच्चों को शुद्ध पेयजल के लिए पानी की बॉटल प्रदान कर रहे हैं। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र की 150 ग्राम पंचायतों में प्रत्येक में वॉटर कूलर और आरओ लगा रहे हैं। इससे हर गाँव, हर स्कूल में शुद्ध पेयजल सुलभ होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष अनुभव से मैंने यह देखा है कि जनजाति अंचल की बच्चियां आवागमन की बेहतर सुविधाओं के अभाव में शहर के कॉलेज जाने में हिचकिचाती हैं और सुविधाओं के अभाव में उच्च शिक्षा छोड़ भी देती हैं। ऐसी परिस्थितियों में उन्होंने प्रायोगिक तौर पर अपने क्षेत्र में 4 बसें संचालित की, जिससे कॉलेज जाने वाली बालिकाओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार होना चाहिए। कार्यशाला में आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला में आजीविका तथा रोज़गार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग पर मैनिट के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. संयम शुक्ला ने अपना उद्बोधन दिया। सतत जनजातीय विकास में जीआईएस तथा उपग्रह सुदूर संवेदन विषय पर आईआईएसईआर के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने संबोधित किया।
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में जनजातीय आजीविका तथा उद्यमिता विकास विषय पर आईएएस RM-TRIFED श्रीमती प्रीति मैथिल ने संबोधित किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय कृषि को बदल रहा है विषय पर आईआईआईटी के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. शुभ्रज्‍योति देब ने संबोधित किया। साथ ही स्वास्थ्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग विषय पर आईआईआईटी के असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. निखिल कुमार सिंह ने उपयोगी जानकारी दी।

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