State Press Club, M.P. : स्टेट प्रेस क्लब म. प्र. : परिवर्तन -2047, नई सीमा पर आगे बढ़ना: पत्रकारिता में एआई (AI) की व्यापक समीक्षा
स्टेट प्रेस क्लब म. प्र. : परिवर्तन -2047, नई सीमा पर आगे बढ़ना: पत्रकारिता में एआई (AI) की व्यापक समीक्षा
State Press Club, M.P. : तकनीकी बदलावों के साथ पत्रकारिता में नैतिक विचार
आधुनिक मीडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। कंटेंट निर्माण और क्यूरेशन के विभिन्न पहलुओं को बेहतर बनाने के लिए AI का उपयोग किया जा रहा है।
इंदौर । एक बहुत ही गरिमामय एवं भव्य समारोह में स्टेट प्रेस क्लब.म. प्र. का 17 वा तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन तीन सत्र हुए और हर सत्र में देशभर से आए मीडियाकर्मियों और विद्वान वक्ताओं ने एआई के गुण – दोष और परिवर्तन -2047 थीम पर बैबाकी के साथ अपनी बात कही। उद्घाटन सत्र शुरू होने के पहले ही जाल सभागृह का परिसर देशभर से आए मीडियाकर्मियों,इंफ्लूयंसर, शिक्षाविदों और शोधार्थी छात्र – छात्राओ से भर गया था।
भारतीय पत्रकारिता महोत्सव का शुभारंभ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, वरिष्ठ उपेन्द्र राय, भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल, स्टेट प्रेस क्लब म. प्र. के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, सचिव सुदेश तिवारी, नवनीत शुक्ला, रचना जौहरी ने दीप प्राजवलन से किया।
एआई की वजह से एक करोड नौकरियां जायेगी तो 95 करोड़ आएगी भी
पहले सत्र की शुरूआत एआई की आंधी और भविष्य विषय से हुई। इस विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार और भारत एक्स्प्रेस के सीएमडी उपेन्द्र राय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मैं एक प्रतिशत भी खतरे के रुप में नहीं देखता हूं। एआई की वजह से हिन्दुस्तान से अगर एक करोड नौकरियां जायेगी तो 95 करोड और आयेगी ही।
एआई से तालमेल बनाना बेहद जरूरी
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने कहा कि पत्रकारिता का एआई से तालमेल बनाना बेहद जरूरी है। एआई और पत्रकारिता का तालमेल इस पेशे को और बेहतर बनाएगा।
हर दिन होता है पत्रकारों का इम्तिहान
पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचोरी ने पत्रकार और राजनेताओ की समानता पर कहा कि पत्रकारों का इम्तिहान भी हर दिन होता है। नेताओं का पांच साल में एक बार चुनाव के दौरान इम्तिहान होता है।
इंटरनेट ने मुस्लिम देशों के लिये चुनौती खड़ी कर दी

भाजपा के राष्टीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज भारत, भारतीय संस्कृति भी शक्ति भूली हुई है, अब उसे भी धीरे- धीरे वह शक्ति और संस्कृति याद आ रही है। भारत की उस सुप्त चेतना को जागृत करने में पत्रकारिता याद दिलाए। इंटरनेट ने मुस्लिम देशों के लिये चुनौती खड़ी कर दी। टेक्नालॉजी आगे बढ़ी तो भारत की उपलब्धि उभर कर सामने आने लगी। एआई आने के बाद वह कब बनी, कब सूखी उसने बता दिया। उन्होंने आगे कहा कि एआई का इनपुट डाटा मनुष्य है और मनुष्य का इनपुट डॉटा भगवान है।
एआई की रेस लिए अपने अंदर परिवर्तन लाना होगा
न्यूज 18 की एंकर सुदेश नैन ने कहा कि पत्रकारिता में एआई से आया परिवर्तन कामयाबी के रास्ते ही खोलेगा। जो लोग पहले से फील्ड में हैं उनके लिए थोड़ा तकलीफदेह हो सकता हैं। लेकिन हर उम्र- वर्ग के लोगों को इसे सीखना ही होगा। यह एआई की रेस हैं, इस रेस में बने रहने के लिए आपको अपने अंदर परिवर्तन लाना होगा।
एआई मनुष्यों से ताकतवर नहीं
वरिष्ठ पत्रकार दिनेश के वोहरा ने कहा कि आपके जीवन के अभिनेता आप ही हो। एआई और हममें अंतर इतना ही हैं कि जो उसमें फीड नहीं किया जाता, एआई वो सोच भी नहीं सकता। एआई मनुष्यों से ताकतवर कभी भी नहीं हो सकता है, एआई अगर गब्बर हैं तो हम खुद को जय और वीरू क्यूं नहीं बना लेते है।
मीडिया ऐप का विमोचन
अतिथियों ने स्टेट प्रेस क्लब म्. प्र. का एआई पर आधारित ऐप मीडिया ऐप का विमोचन किया। यह देश का पहला ऐसा ऐप है, जिसे स्टेट प्रेस क्लब म. प्र. ने बनाया। इसकी खासियत यह है कि इस से आप लाइव रिपोर्टिंग के बीच जो कहेगे उसे यह उसी पल टेक्स्ट में बदल देगा। ना टाइपिंग करना और ना डेडलाइन की चिंता। यह एप फेक न्यूज का सच भी सामने ला देगा।
अतिथि स्वागत अजय भट्, सोनाली यादव, आकाश चौकसे ने किया।अशोक बड़जात्या, सुदेश गुप्ता, कुमार लाहोटी ने प्रतिक चिन्ह प्रदान किये। कार्यक्रम का संचालन आलोक वाजपेयी ने किया। आभार माना संजीव श्रीवास्तव ने।
अंतिम सत्र का विषय एआई और चुनाव
एनडीटीवी के पोलटी कल एडिटर हिमांशु शेखर ने कहा कि एआई को रेगुलेट करने के लिए सबसे पहला कानून चीन ने बनाया। भारत भी इस दिशा में कार्य कर रहा है। पुराने कानूनों को बदला भी जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर सरकार को लाने का काम मोदी सरकार ने किया।
चुनावों में एआई टूल्स का उपयोग बढ़ा
पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश मीणा ने कहा कि चुनावों में एआई टूल्स का उपयोग बढता ही जा रहा हैं। साथ ही इसके नुकसान, नेगेटिव एक्स्पेक्ट भी सामने आ रहे हैं, बडे पॉलिटिशियन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ -चढकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
एआई की अपनी बुद्धि नहीं हैं
मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार विवेक अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वो हैं जिसके पास अपनी समझ, अपनी बुद्धि नहीं हैं, यह नाम ही गलत हैं। नाम सही तब होगा, जब एआई खुद अपनी बुद्धि से सोचेगा, और हमें आगे बढ़ाने में मदद करेगा। कुछ दिनों पहले मैंने चैट जीपिटी से देश के सबसे बडे अपराधियों के बारे में पूछा था। एआई ने नाम बतायें सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह। मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ कि इतनी गलत जानकारी एआई कैसे दे सकता हैं। यें हैं खतरा। कभी भी यें न समझें कि इंटरनेट पर जो दिखाया जा रहा हैं वह पूर्ण सत्य हैं। नहीं तो हम जीवन का सबसे बडा नुकसान करेंगें। एआई के आने से कुछ स्थानों पर रोजगार के अवसर कम होंगे, पर बढेंगे भी।

