Trump is sending a strong message to China y action in Venezuela.

वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई कर चीन को कड़ा संदेश दे रहे ट्रंप……….बीजिंग को 60 अरब डॉलर का डर

वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई कर चीन को कड़ा संदेश दे रहे ट्रंप..बीजिंग को 60 अरब डॉलर का डर

बीजिंग । अमेरिकी सेना की ओर से वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी कार्रवाई सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम चीन को रणनीतिक संदेश देने के लिए किया गया है। ट्रंप का संदेश साफ है कि पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका अपने प्रभाव को चुनौती देने वाली किसी भी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा। वेनेजुएला लंबे समय से चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के लिए लैटिन अमेरिका में अहम रणनीतिक ठिकाना रहा है। मादुरो सरकार को चीन का खुला समर्थन मिला, जो कि अरबों डॉलर के कर्ज के बदले तेल खरीद की है।
जानकारों का मानना हैं कि यह कार्रवाई सिर्फ मादुरो को हटाने तक सीमित नहीं है। यह चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और उसकी बेल्ट एंड रोड रणनीति पर सीधा हमला है। वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा वामपंथी और चीन समर्थक देश था। निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ने पूरे क्षेत्र में चीन के राजनीतिक नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश की है। दरअसल अमेरिका के हमले से कुछ घंटे पहले ही चीन के दूत मादुरो से मिले थे।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक सुरक्षित संक्रमण नहीं होता है। ट्रंप का यह बयान इसका संकेत है कि यह केवल सैन्य ऑपरेशन या तख्तापलट नहीं बल्कि लंबे समय के लिए यहां नियंत्रण करने की योजना है। कई रणनीतिक विश्लेषकों ने इस कार्रवाई को खुले तौर पर ‘नग्न साम्राज्यवाद’ बताया है। हालांकि अमेरिका के पूर्व राजदूत चार्ल्स शापिरो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से वेनेजुएला को खुद चलाने की बात करना और जमीन पर लागू करना बेहद जटिल होगा। उनका कहना है कि अभी भी देश में करीब 20 फीसदी आबादी ऐसी है जो मादुरो का समर्थन करती है।
बात दें कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश है और चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है। बीजिंग ने दशकों में करीब 60 अरब डॉलर का कर्ज दिया, जिसकी भरपाई तेल से होनी थी। अब जब अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने का अधिकार मिलने की बात हो रही है, तब चीन की ऊर्जा सुरक्षा सीधे अमेरिकी नियंत्रण के दायरे में आ सकती है। हालांकि ट्रंप ने कहा कि चीन को तेल आपूर्ति जारी रहेगी, लेकिन विशेषज्ञ इस बात स्थायी समाधान नहीं मानते।
वहीं चीन ने कार्रवाई की कड़ी निंदा कर मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग की है। चीन का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और लैटिन अमेरिका की स्थिरता को खतरे में डालता है। चीन ने अमेरिका से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

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Date : 05 January 2026 Posted By : EDITOR
वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई कर चीन को कड़ा संदेश दे रहे ट्रंप……….बीजिंग को 60 अरब डॉलर का डर
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वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई कर चीन को कड़ा संदेश दे रहे ट्रंप..बीजिंग को 60 अरब डॉलर का डर

बीजिंग । अमेरिकी सेना की ओर से वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी कार्रवाई सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम चीन को रणनीतिक संदेश देने के लिए किया गया है। ट्रंप का संदेश साफ है कि पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका अपने प्रभाव को चुनौती देने वाली किसी भी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा। वेनेजुएला लंबे समय से चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के लिए लैटिन अमेरिका में अहम रणनीतिक ठिकाना रहा है। मादुरो सरकार को चीन का खुला समर्थन मिला, जो कि अरबों डॉलर के कर्ज के बदले तेल खरीद की है।
जानकारों का मानना हैं कि यह कार्रवाई सिर्फ मादुरो को हटाने तक सीमित नहीं है। यह चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और उसकी बेल्ट एंड रोड रणनीति पर सीधा हमला है। वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा वामपंथी और चीन समर्थक देश था। निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ने पूरे क्षेत्र में चीन के राजनीतिक नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश की है। दरअसल अमेरिका के हमले से कुछ घंटे पहले ही चीन के दूत मादुरो से मिले थे।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक सुरक्षित संक्रमण नहीं होता है। ट्रंप का यह बयान इसका संकेत है कि यह केवल सैन्य ऑपरेशन या तख्तापलट नहीं बल्कि लंबे समय के लिए यहां नियंत्रण करने की योजना है। कई रणनीतिक विश्लेषकों ने इस कार्रवाई को खुले तौर पर ‘नग्न साम्राज्यवाद’ बताया है। हालांकि अमेरिका के पूर्व राजदूत चार्ल्स शापिरो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से वेनेजुएला को खुद चलाने की बात करना और जमीन पर लागू करना बेहद जटिल होगा। उनका कहना है कि अभी भी देश में करीब 20 फीसदी आबादी ऐसी है जो मादुरो का समर्थन करती है।
बात दें कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश है और चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है। बीजिंग ने दशकों में करीब 60 अरब डॉलर का कर्ज दिया, जिसकी भरपाई तेल से होनी थी। अब जब अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने का अधिकार मिलने की बात हो रही है, तब चीन की ऊर्जा सुरक्षा सीधे अमेरिकी नियंत्रण के दायरे में आ सकती है। हालांकि ट्रंप ने कहा कि चीन को तेल आपूर्ति जारी रहेगी, लेकिन विशेषज्ञ इस बात स्थायी समाधान नहीं मानते।
वहीं चीन ने कार्रवाई की कड़ी निंदा कर मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग की है। चीन का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और लैटिन अमेरिका की स्थिरता को खतरे में डालता है। चीन ने अमेरिका से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

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