The Impact of the Ongoing War in the Middle East on India

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की भारत पर चोट…

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की भारत पर चोट…

गोल्डमैन सैक्स ने जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को घटाकर 5.9 फीसदी कर दिया है, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह 7 फीसदी था, युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50 प्रतिशत बढऩे के आसार

रुपया पस्त, जीडीपी सुस्त…महंगाई बढ़ेगी

नई दिल्ली। जंग शुरू होने के बाद से ही भारत में गंभीर संकट आता हुआ दिखाई दे रहा है। ग्लोबल निवेश फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भारत को लेकर ये अनुमान लगाया है। उसने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में कमी का अनुमान लगाया है। साथ ही रुपये में भी गिरावट और महंगाई तेजी से बढऩे की चेतावनी दी है। गोल्डमैन सैक्स ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि अर्थव्यवस्था को भारतीय रुपये के गिरने के कारण जूझना पड़ रहा है, इसलिए रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए आरबीआई को ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत (50 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
गोल्डमैन सैक्स ने ग्रोथ अनुमान में कटौती की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई अप्रैल के मध्य तक बंद रह सकती है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और महंगाई तीनों पर बुरा असर पड़ता है। गोल्डमैन ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि उसने कैलेंडर वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि ईरान वॉर से पहले उसने 7 फीसदी का अनुमान लगाया था। वॉल स्ट्रीट के इस बैंक ने 13 मार्च को साउथ एशिया की अर्थव्यवस्था के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया था। गोल्डमैन के एक्सपट्र्स द्वारा विकास अनुमान में की गई यह नई कटौती तेल की कीमतों और आपूर्ति में रुकावट में बदलाव के बाद हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ऊर्जा आयातक देश भारत के लिए विदेशी मुद्रा, महंगाई और फंड रिस्क एक प्रमुख कारण हैं।
अप्रैल तक जारी रहेगी रुकावट
गोल्डमैन का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल प्रवाह का लगभग पूरी तरह से ठप होना अप्रैल के मध्य तक जारी रहेगा, जिसके बाद अगले 30 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें मार्च में औसतन 105 डॉलर और अप्रैल में 115 डॉलर रहेंगी, जिसके बाद साल की चौथी तिमाही में गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल हो जाएंगी।
भारत में महंगाई
बैंक के एक्सपट्र्स का अनुमान है कि भारत में महंगाई 2026 में बढक़र 4.6 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि पहले उन्होंने 3.9 प्रतिशत की महंगाई का अनुमान लगाया गया था। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि तेजी के बाद भी महंगाई आरबीआई 2-6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरते रुपये को सहारा देने और महंगाई के सेकंड राउंड इफेक्ट को रोकने के लिए आरबीआई रेपो रेट में 0.50त्न की बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार के जानकारों का तो यहां तक मानना है कि आने वाले एक साल में 0.25-0.25 प्रतिशत की 3 से 4 बढ़ोतरी (कुल 0.75 प्रतिशत से 1 प्रतिशत) देखने को मिल सकती है।
रुपये में गिरावट
ग्लोबल बैंक ने कहा कि आरबीआई रुपये के गिरावट को रोकने के लिए ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा। गोल्डमैन ने कहा कि रुपये में पिछले साल 4.7 प्रतिशत की गिरावट के बाद, 2026 में अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत का चालू खाता घाटा 2026 में जीडीपी के 2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.3 प्रतिशत था।

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Date : 25 March 2026 Posted By : EDITOR
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की भारत पर चोट…
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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की भारत पर चोट...

गोल्डमैन सैक्स ने जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को घटाकर 5.9 फीसदी कर दिया है, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह 7 फीसदी था, युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50 प्रतिशत बढऩे के आसार

रुपया पस्त, जीडीपी सुस्त...महंगाई बढ़ेगी

नई दिल्ली। जंग शुरू होने के बाद से ही भारत में गंभीर संकट आता हुआ दिखाई दे रहा है। ग्लोबल निवेश फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भारत को लेकर ये अनुमान लगाया है। उसने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में कमी का अनुमान लगाया है। साथ ही रुपये में भी गिरावट और महंगाई तेजी से बढऩे की चेतावनी दी है। गोल्डमैन सैक्स ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि अर्थव्यवस्था को भारतीय रुपये के गिरने के कारण जूझना पड़ रहा है, इसलिए रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए आरबीआई को ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत (50 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
गोल्डमैन सैक्स ने ग्रोथ अनुमान में कटौती की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई अप्रैल के मध्य तक बंद रह सकती है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और महंगाई तीनों पर बुरा असर पड़ता है। गोल्डमैन ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि उसने कैलेंडर वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि ईरान वॉर से पहले उसने 7 फीसदी का अनुमान लगाया था। वॉल स्ट्रीट के इस बैंक ने 13 मार्च को साउथ एशिया की अर्थव्यवस्था के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया था। गोल्डमैन के एक्सपट्र्स द्वारा विकास अनुमान में की गई यह नई कटौती तेल की कीमतों और आपूर्ति में रुकावट में बदलाव के बाद हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ऊर्जा आयातक देश भारत के लिए विदेशी मुद्रा, महंगाई और फंड रिस्क एक प्रमुख कारण हैं।
अप्रैल तक जारी रहेगी रुकावट
गोल्डमैन का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल प्रवाह का लगभग पूरी तरह से ठप होना अप्रैल के मध्य तक जारी रहेगा, जिसके बाद अगले 30 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें मार्च में औसतन 105 डॉलर और अप्रैल में 115 डॉलर रहेंगी, जिसके बाद साल की चौथी तिमाही में गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल हो जाएंगी।
भारत में महंगाई
बैंक के एक्सपट्र्स का अनुमान है कि भारत में महंगाई 2026 में बढक़र 4.6 प्रतिशत हो जाएगी, जबकि पहले उन्होंने 3.9 प्रतिशत की महंगाई का अनुमान लगाया गया था। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि तेजी के बाद भी महंगाई आरबीआई 2-6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरते रुपये को सहारा देने और महंगाई के सेकंड राउंड इफेक्ट को रोकने के लिए आरबीआई रेपो रेट में 0.50त्न की बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार के जानकारों का तो यहां तक मानना है कि आने वाले एक साल में 0.25-0.25 प्रतिशत की 3 से 4 बढ़ोतरी (कुल 0.75 प्रतिशत से 1 प्रतिशत) देखने को मिल सकती है।
रुपये में गिरावट
ग्लोबल बैंक ने कहा कि आरबीआई रुपये के गिरावट को रोकने के लिए ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा। गोल्डमैन ने कहा कि रुपये में पिछले साल 4.7 प्रतिशत की गिरावट के बाद, 2026 में अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत का चालू खाता घाटा 2026 में जीडीपी के 2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.3 प्रतिशत था।

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