शांत रहकर अपने हृदय से जुड़ें - कमलेश डी. पटेल (दाजी), हार्टफुलनेस संस्थान के मार्गदर्शक - Update Now News

शांत रहकर अपने हृदय से जुड़ें – कमलेश डी. पटेल (दाजी), हार्टफुलनेस संस्थान के मार्गदर्शक

UNN@ पिछला साल हम सभी के सामने अभूतपूर्व चुनौतियाँ लेकर आया है। कोविड-19 वैश्विक माहामारी ने बहुत कुछ बदल दिया है – हमारे सामान्य जीवन में कड़े प्रतिबंध लग गए हैं, परिवार और दोस्तों से भौतिक सम्पर्क ख़त्म हो गया है, और काम करने के हालात बहुत कठिन हो गए हैं। अनेकों लोगों के लिए यह सेहत, प्रियजनों की मौत, आजीविका, आर्थिक और भावात्मक सुरक्षा की दृष्टि से बेहद नुकसान भरा रहा है और ऐसी गतिविधियाँ जिनसे एक संतुलित और सुखद अस्तित्व प्राप्त होता है। कुछ को तो इसने आइसोलेशन, एकाकीपन और ख़ौफ़ की तरफ़ धकेला है। इतने सारे परिवर्तनों के होने पर तनाव और चिन्ता होना स्वाभाविक है। इन परिवर्तनों से पड़ने वाले दबाव ने तनाव, गुस्से, डिप्रेशन (अवसाद) और चिन्ता को सक्रिय (ट्रिगर) करके हमारा सन्तुलन बिगाड़ दिया है, जिसके कारण दिमागी परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं और पहले से मौजूद परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार इस महामारी से पहले भी विश्व भर में 30 करोड़ लोग डिप्रेशन (अवसाद) से पीड़ित थे।ऐसी परिस्थितियों में हम क्या कर सकते हैं? कोई जादुई दवा या उपाय नहीं है – लेकिन इससे उबरने और बेहतर रेसीलियन्स (तन्यता) विकसित करने के लिए हम सरल और प्रभावी तरीके खोज सकते हैं। बहुत से लोग रिलैक्सेशन तथा मैडिटेशन के तरीक़े सीख रहे हैं और मैडिटेशन से स्वास्थ्य को होने वाले फायदों के अनेक वैज्ञानिक सबूत भी मौजूद हैं। वास्तव में, अगर आप गुगल पर “मैडिटेशन के फ़ायदे” को खोजेंगे, तो 16.3 करोड़ नतीजे मिलेंगे।
भौतिक स्तर पर, मैडिटेशन से बेहतर नींद आती है, जलन कम होती है, प्रतिरक्षा तंत्र मज़बूत होता है, और दर्द घटता है व उसके प्रति रेसीलियन्स (तन्यता) बढ़ती है। मानसिक स्तर पर, यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, चिन्ता और मनोदशा के विकारों को कम करता है, परानुभूति को बढ़ाता है, याददाश्त को बेहतर बनाता है, फोकस व क्लैरिटी को बेहतर बनाता है, आंतरिक शांति उत्पन्न करता है, जीवन को एक संतुलित आयाम प्रदान करता है, और प्रसन्नता को बढ़ाता है।
जहां तक आध्यात्मिक स्तर के फ़ायदों का सवाल है – वो बहुत सारे हैं। बेहतर होता है कि कुछ चीज़ों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर छोड़ दिया जाए।
हार्टफुलनैस प्रस्तुत करता है एक सरल, प्रभावी और ईज़ी-टू-लर्न मैडिटेशन और अन्य तकनीकें जो इस मुश्किल दौर से निकलने में लोगों की मदद कर रही हैं। देखिए हार्टफुलनैस पद्धति के अभ्यासियों का क्या कहना है:-
“कोविड के दौरान हार्टफुलनैस ने मेरे जीवन के सबसे कठिन दौर से उभरने में मेरी मदद की और मुझे मज़बूत बनाया। जीवन के प्रति मेरा नज़रिया अब बदल गया है- अब यह ‘यहाँ और अभी’ हो गया है।
“अपने डर और चिन्ताओं से उबरने में मैडिटेशन ने मेरी मदद की। इससे मुझे शान्ति का एहसास होता है।”
चार सरल अभ्यास
यहाँ पर चार हार्टफुलनैस अभ्यास दिये जा रहे हैं, जिन्हें यदि रोज़ रूचि और जोश के साथ किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य को सहयोग प्रदान करते हैं।
1 – रिलैक्स
हार्टफुलनैस रिलैक्सेशन एक सरल तकनीक है करने में कुछ ही मिनट लगते हैं और इन्हें कहीं भी किया जा सकता है। यह घबराहट, तनाव या डर के समय पर विशेष तौर से मदद करते हैं।
जब कभी आप घबराहट या तनाव महसूस करें तो आप नाड़ी श्वसन का उपयोग कर सकते हैं। अपनी दायीं नासिका को अपने अंगूठे से बन्द करें और अपनी बांई नासिका से 10 गहरी सांसें अंदर भरें और बाहर की तरफ़ छोड़ें: यह आपके परानुकंपी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic nervous system) को सक्रिय कर देता है, जो आपको शान्त कर देता है।
2 – मैडिटेशन
मैडिटेशन मन को नियमित करता है जिससे वह एक चीज़ पर धीरे से और प्राकृतिक ढ़ंग से केन्द्रित होना सीखता है। इस हृदय-आधारित मैडिटेशन पद्धति में, हम अपने हृदय की गहराई में उतर कर अपनी भावनाओं, रचनात्मकता, दिव्यता, सहृदयता और प्रेम को खोजते हैं, और तरो-ताज़ा होकर, तंदुरूस्ती की भावना के साथ उभरते हैं।
3- रिज्युविनेट – अपने हृदय और मन को साफ़ करना
आपके शरीर की तरह ही आपके मन और हृदय को भी साफ़ करने की ज़रूरत होती है। इस अनूठे अभ्यास के द्वारा आप अपने हृदय और मन से छापों (impressions) को साफ़ करके मिटाना सीखते हैं, चिंताओं और निराशा से दूर हो जाते हैं और आन्तरिक शान्ति, शुद्धता और हल्केपन को हासिल करते हैं।
4 – अपने उच्चतर स्व से सम्पर्क साधना
पूर्णता और संतुष्टि को महसूस करने के लिए, हम प्रार्थना के समय-सम्मानित अभ्यास के द्वारा अपने उच्चतर स्व के साथ सम्पर्क कर सकते हैं। प्रार्थना हमें हृदय के असीमित संसार में ले जाती है, ताकि हम प्रेम, आशा, सौन्दर्य और प्रसन्नता को अनुभव कर सकें।
प्राकृतिक चक्रों के साथ सामंजस्य में रहना
मानसिक स्वास्थ्य जहां तक संभव हो, एक प्राकृतिक जीवन शैली पर भी निर्भर करता है, जो हमारे शरीर क्रियाविज्ञान से जुड़े हुए दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और दीर्घ-कालिक चक्रों के साथ सामंजस्य में हो। अगर हम इन सभी प्राकृतिक लय चक्रों के विरूद्ध जाते हैं तो हमारे स्वास्थ्य पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यहां दिये जा रहे यह चार सुझाव अपना बेहतर ढंग से ख़्याल रखने और प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहने में बहुत मदद करते हैं:
1. रात में एक अच्छी नींद लें
रात 10 बजे तक सोने की कोशिश करें ताकि अपने निद्रा-काल से ज़्यादा से ज़्यादा लाभ ले सकें। अपना काम समय से खत्म करके आराम करें, टी.वी. देखने, वीडियो गेम्स खेलने आदि से परहेज़ करें जोकि दिमाग़ को आवश्यकता से अधिक उत्तेजित कर देते हैं और नींद को डिस्टर्ब कर देते हैं।
2. अर्ली बर्ड बनें (जल्दी उठने की आदत डालें)
सुबह जल्दी उठें और मैडिटेशन करें। इससे पूरे दिन भर के लिए एक शान्त, संतुलित आधारशिला का सृजन होता है। और जब आप उस आंतरिक दशा को पूरे दिन भर क़ायम रखना सीख जाते हैं तो आप हर उस परिस्थिति का सामना कर सकते हैं, जिससे आपका सामना होता है।
3. प्रेम से बोलें
आप शिष्टता से, सहृदयता पूर्वक और संयम के साथ बोलने की कोशिश करें; इससे आपका जीवन बदल जाएगा। इससे आपको रिमोट कम्यूनिकेशन्स के दौराना दबाव और संपर्क की कमी की भावनाओं से उभरने में भी सहायता मिलेगी।
4. प्रेम से भोजन ग्रहण करें
हममें से बहुत सारे लोग भोजन ग्रहण करने की उस कला को खो चुके हैं जो हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहयोग करती है, और इस महामारी के दौरन तो यह और भी उत्तेजित हो गई है। स्वस्थ मन और शरीर के लिए हमें भोजन करने के लिए समय निकालना पड़ेगा। जब हम चलते-चलते, या टी.वी. देखते या कम्प्यूटर स्क्रीन पर देखते हुए खाना खाते हैं, तो हमारा शरीर हमारी ऊर्जा को दूसरे कार्यों की तरफ़ मोड़ देता है और इससे पाचन प्रभावित होता है।
स्वास्थ्य के लिए भी खाना खाने के प्रति हमारा रवैय्या बहुत महत्वपूर्ण होता है। वैज्ञानिक अध्ययनों द्वारा कृतज्ञता से किसी भी गतिविधि के दौरान होने वाले फायदों का पता चलता है और कृतज्ञता की भावना के साथ खाना खाने और प्रेम का हमारे शरीरों पर बहुत ही अलग तरह से प्रभाव पड़ता है बनिस्पद लालच या जागरूकता के अभाव में खाना खाने से पड़ने वाले प्रभाव के।
तो प्रिय मित्रों, ऐन इस वक़्त, हमें विषाणु के साथ रहना है और ऐसे रास्ते तलाशने हैं जिनसे हम अपना मानसिक संतुलन वापस प्राप्त कर सकें, स्वयं को रिफ़्रेश (तरोताज़ा), रिज्युविनेट और पुनर्जीवित (रिवाइटालाईज़) कर सकें, ताकि इस चुनौती भरे वक़्त में भी हम काम करना जारी रख सकें और जीवन में खुशियाँ हासिल कर सकें। मैं आशा करता हूँ कि आप इन हार्टफुलनैस अभ्यास को आज़माकर देखेंगे।

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