A collection of poems the soul of Indore journalist Raman Rawal

Madhya Pradesh : Indore – पत्रकार की आत्मा से उभरी कविताओं का संगम: रमण रावल का पहला संग्रह

Indore – पत्रकार की आत्मा से उभरी कविताओं का संगम: रमण रावल का पहला संग्रह

समाज की विविध छवियों को कविता के माध्यम से जीने का अनुभव

पुस्तक- सुनो, तुमने शांति को कहीं देखा है?

लेखक-रमण रावल

इंदौर । कवि वह होता है जिसे लोक शास्त्र का अच्छा ज्ञान हो,वह प्रतिभाशाली होने के साथ -साथ अभ्यासी भी हो । कविताएँ विकासशील मस्तिष्क की संवेदनाएं है, जिसमें हृदय एवं मस्तिष्क की उर्वरता है।कविताओं में व्यक्त वेदना में भी एक शक्ति होती है, जो देखने की दृष्टि देती है। ऐसी कविताओं को शांति और सुकून से देखने और पढ़ने की जरूरत है।
रमण रावल का पहला कविता संग्रह एक पत्रकार की आत्मा में बसी संवेदनाओं का प्रतिबिंब है,जिसमें समाज की विविध छवियों के दर्शन होते हैं। प्रख्यात कवि,आलोचक डॉ.आनंद कुमार सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि श्री रावल की पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर यह बात कही । कार्यक्रम की अध्यक्षता मप्र साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष डॉ.विकास दवे ने की।
डॉ. विकास दवे ने कहा पत्रकार रमण रावल ने बिना छंद और तुकबंदी के भी उच्च कोटि की श्रेष्ठ कविताएँ लिखी है, जो सराहनीय है। बिना बिंब और प्रतीकों के भी अच्छी कविताएँ लिखी जा सकती है उसका सटीक उदाहरण ये कविता संग्रह है। इन कविताओं में नवाचार है और एक नई दृष्टि है। श्री रावल की शीर्षक कविता दुनिया में मच रही उथल-पुथल का वास्तविक चित्रण करती है, जिसमें कथित सुपर पॉवर की स्वार्थपरकता को खुलकर बताया गया है। कथाकार श्रीमती गरिमा संजय दुबे ने काव्य संग्रह की समीक्षा करते हुए कहा कि पुस्तक का शीर्षक बेहद आकर्षक है, जो बताता है कि आज के व्यक्ति का मन अशांत है और वह शांति की तलाश में है। लोकार्पण प्रसंग के आत्मीय अतिथि ख्यात ज्योतिषि व वास्तु शास्त्री अरुण कुमार मिश्र सर्वांगजी थे। उन्होंने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि श्रुति परंपरा से हजारों वर्ष पहले काव्य लेखन प्रारंभ हो चुका था, जो सनातन परंपरा का प्रतीक है। अनेक ग्रंध व महाकाव्य इसके प्रमाण हैं। काव्य संग्रह के मुखपृष्ठ के चित्रकार मुंबई के सफदर शामी विशेष अतिथि थे। अतिथियों का स्वागत उत्सव शर्मा व श्यामसलोनी ने किया। दीप प्रज्जवलन रेखा रावल व जितेंद्र दुबे ने किया। संचालन संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने किया। कार्यर्क्म में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक,पत्रकार,साहित्यकार उपस्थित थे।

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