भारत में एक ऐसी जगह जहां भारतीयों की एंट्री नहीं, जाने के लिए अनुमति जरुरी
भारत में एक ऐसी जगह जहां भारतीयों की एंट्री नहीं, जाने के लिए अनुमति जरुरी
नई दिल्ली । भारत के बाहर तो ठीक देश के अंदर ही एक ऐसी जगह है, जहां भारतीयों को सीधे एंट्री नहीं है? यह मजाक नहीं हैं सच है। आज भी भारत की सरजमीं पर एक ऐसा इलाका है जहां जाने के लिए भारतीयों को पासपोर्ट जैसी अनुमति या स्पेशल परमिट लेना पड़ता है। यह इलाका है पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में स्थित तीन बीघा कॉरिडोर और दहाग्राम-आंगरपोटा एन्क्लेव, जो भारत में है, लेकिन यहां की व्यवस्था बांग्लादेश के नियंत्रण में है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीन बीघा कॉरिडोर मात्र 178 मीटर लंबा और 85 मीटर चौड़ा एक कॉरिडोर है। 1996 में भारत सरकार ने इसे बांग्लादेश को 999 साल के लिए लीज पर दे दिया था ताकि बांग्लादेश के दहाग्राम-आंगरपोटा एन्क्लेव के रहने वाले मुख्य भूमि तक पहुंच सकें। 2015 के भारत-बांग्लादेश एन्क्लेव समझौते के बाद 100+ एन्क्लेव खत्म हो गए, लेकिन दहाग्राम अभी भी खास स्थिति में है।
इस जगह पर भारतीयों को एंट्री के लिए स्पेशल परमिट या स्थानीय प्रशासन की अनुमति लेनी होती है, लेकिन बांग्लादेशी नागरिक बिना किसी दिक्कत के कॉरिडोर से आ-जा सकते हैं। इस इलाके में बांग्लादेशी झंडे, बांग्लादेशी मुद्रा, स्कूल, अस्पताल और कानून व्यवस्था बांग्लादेशी तरीके से चलती है। यहां भारतीय सुरक्षा बल चेकिंग करते हैं, लेकिन दैनिक जीवन बांग्लादेश के अधीन है। इस एन्क्लेव में करीब 20 हजार बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं। यहां की जिंदगी, भाषा, संस्कृति और अर्थव्यवस्था पूरी तरह बांग्लादेश से जुड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक लोग बांग्लादेशी मोबाइल नेटवर्क इस्तेमाल करते हैं और बांग्लादेश सरकार की सुविधाओं का लाभ लेते हैं। यह इलाका भारत-बांग्लादेश सीमा की संवेदनशीलता के कारण सुरक्षा दृष्टि से अहम है। बिना अनुमति के जाने पर बीएसएफ रोक सकती है। पर्यटकों और आम भारतीयों को पहले से परमिट लेना या स्थानीय प्रशासन से अनुमति मांगनी पड़ती है। इससे यह जगह भारत में होते हुए भी भारतीय इलाकों से अलग हो जाती है।
