Aakhri Sawal Review sanjay dutt

Aakhri Sawal Review: “संवाद बनाम विवाद” की बहस लेकर आई संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’

Aakhri Sawal Review: “संवाद बनाम विवाद” की बहस लेकर आई संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’

फिल्म – आखिरी सवाल (Aakhri Sawal)
डायरेक्टर- अभिजीत मोहन वारंग (Abhijeet Mohan Warang)
रेटिंग – 3.5
स्टारकास्ट- संजय दत्त (Sanjay Dutt) , नमाशी चक्रवर्ती (Namashi Chakraborty) , अमित साध (Amit Sadh) , समीरा रेड्डी(Sameera Reddy) , नीतू चंद्रा (Neetu Chandra) , त्रिधा चौधरी(Tridha Choudhary) और मृणाल कुलकर्णी (Mrinal Kulkarni)

कहानी

UNN@ वर्षा पारीख। फिल्म की शुरुआत प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) और उनके छात्र विक्की हेगड़े (नमाशी चक्रवर्ती) के बीच तीखे टकराव से होती है। विक्की अपने शोध में एक संस्था (संघ) को लेकर गंभीर आरोप लगाता है जिसे प्रोफेसर खारिज कर देते हैं। इसी बात पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता है और कैंपस में विरोध शुरू हो जाता है। कहानी तब मोड़ लेती है जब विक्की प्रोफेसर से पांच बड़े सवाल पूछने की चुनौती देता है। ये सवाल महात्मा गांधी की हत्या, बाबरी विध्वंस और संगठन से जुड़े ऐतिहासिक मुद्दों तक जाते हैं। शुरुआती सवाल कॉलेज कैंपस में और बाकी सवाल एक टीवी डिबेट में पूछे जाते हैं। इन जवाबों के जरिए कहानी इतिहास के कई संवेदनशील पहलुओं को छूती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। हालांकि कई जगह कहानी डॉक्यूमेंट्री जैसी लगने लगती है और गहराई की कमी महसूस होती है।

Sanjay Dutt स्टारर फिल्म ‘आखिरी सवाल’ 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म राजनीति के गलियारों से लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस तक चल रही वैचारिक बहसों को बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश करती है। कहानी उन मुद्दों को छूती है, जिन पर आज के समाज में लगातार चर्चा और विवाद देखने को मिलते हैं। फिल्म का मूल सवाल यही है कि समाज को आगे बढ़ाने में “संवाद” ज्यादा जरूरी है या “विवाद”। इसी सोच के इर्द-गिर्द पूरी कहानी बुनी गई है। निर्देशक Abhijeet Mohan Warang ने राजनीतिक और वैचारिक टकराव को ड्रामेटिक अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। ‘आखिरी सवाल’ समाज, इतिहास और संस्थाओं को लेकर चल रही बहसों को एक अलग नजरिए से दिखाती है। हालांकि कई जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा नाटकीय हो जाती है, जिससे कहानी का संतुलन थोड़ा कमजोर पड़ता है। फिर भी फिल्म अपने विषय और संवादों की वजह से दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

×
Date : 16 May 2026 Posted By : EDITOR
Aakhri Sawal Review: “संवाद बनाम विवाद” की बहस लेकर आई संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’
News Image

Aakhri Sawal Review: “संवाद बनाम विवाद” की बहस लेकर आई संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’

फिल्म - आखिरी सवाल (Aakhri Sawal)
डायरेक्टर- अभिजीत मोहन वारंग (Abhijeet Mohan Warang)
रेटिंग - 3.5
स्टारकास्ट- संजय दत्त (Sanjay Dutt) , नमाशी चक्रवर्ती (Namashi Chakraborty) , अमित साध (Amit Sadh) , समीरा रेड्डी(Sameera Reddy) , नीतू चंद्रा (Neetu Chandra) , त्रिधा चौधरी(Tridha Choudhary) और मृणाल कुलकर्णी (Mrinal Kulkarni)

कहानी

UNN@ वर्षा पारीख। फिल्म की शुरुआत प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) और उनके छात्र विक्की हेगड़े (नमाशी चक्रवर्ती) के बीच तीखे टकराव से होती है। विक्की अपने शोध में एक संस्था (संघ) को लेकर गंभीर आरोप लगाता है जिसे प्रोफेसर खारिज कर देते हैं। इसी बात पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता है और कैंपस में विरोध शुरू हो जाता है। कहानी तब मोड़ लेती है जब विक्की प्रोफेसर से पांच बड़े सवाल पूछने की चुनौती देता है। ये सवाल महात्मा गांधी की हत्या, बाबरी विध्वंस और संगठन से जुड़े ऐतिहासिक मुद्दों तक जाते हैं। शुरुआती सवाल कॉलेज कैंपस में और बाकी सवाल एक टीवी डिबेट में पूछे जाते हैं। इन जवाबों के जरिए कहानी इतिहास के कई संवेदनशील पहलुओं को छूती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। हालांकि कई जगह कहानी डॉक्यूमेंट्री जैसी लगने लगती है और गहराई की कमी महसूस होती है।

Sanjay Dutt स्टारर फिल्म ‘आखिरी सवाल’ 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म राजनीति के गलियारों से लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस तक चल रही वैचारिक बहसों को बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश करती है। कहानी उन मुद्दों को छूती है, जिन पर आज के समाज में लगातार चर्चा और विवाद देखने को मिलते हैं। फिल्म का मूल सवाल यही है कि समाज को आगे बढ़ाने में “संवाद” ज्यादा जरूरी है या “विवाद”। इसी सोच के इर्द-गिर्द पूरी कहानी बुनी गई है। निर्देशक Abhijeet Mohan Warang ने राजनीतिक और वैचारिक टकराव को ड्रामेटिक अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। ‘आखिरी सवाल’ समाज, इतिहास और संस्थाओं को लेकर चल रही बहसों को एक अलग नजरिए से दिखाती है। हालांकि कई जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा नाटकीय हो जाती है, जिससे कहानी का संतुलन थोड़ा कमजोर पड़ता है। फिर भी फिल्म अपने विषय और संवादों की वजह से दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Releated

chutney movie review gujarati film

📰 Generate e-Paper Clip –varsha parikh 🎬 UPDATE NOW – Review: ચટણી – Chatni આ ફિલ્મ નથી, આ તો આપણા ઘરના રસોડાની સુગંધ છે! Malhar Thakar અને Pooja Joshi એ તો જાણે પતિ-પત્ની નો સાચો પ્રેમ જીવી બતાવ્યો છે. જ્યાં મીઠાશ છે, તીખાશ છે, અને વચ્ચે વચ્ચે ખટાશ પણ છે – બિલકુલ ચટણી જેવી જ! […]

VIBE Movie Review: कुणाल खेमू की ‘वाइब’ Comedy, Drama

📰 Generate e-Paper Clip VIBE Movie Review: कुणाल खेमू की ‘वाइब’ Comedy, Drama कलाकार – कुणाल खेमू , प्रीति जिंटा , स्पर्श श्रीवास्तव , यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव लेखक – कुणाल खेमू निर्देशक- कुणाल खेमू निर्माता- कुणाल खेमू और चिराग निहलानी रेटिंग -3.5 UNN @ Varsha Parikh :कुणाल खेमू की फिल्म ‘VIBE’ दोस्ती, […]