America gave a shock regarding green card! 8 companies including

ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका ने दिया झटका! इंफोसिस समेत 8 कंपनियों को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ से किया सस्पेंड

ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका ने दिया झटका! इंफोसिस समेत 8 कंपनियों को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ से किया सस्पेंड

नई दिल्ली: अमेरिका ने आज (गुरुवार को) IT कंपनियों- कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, HCL, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ से सस्पेंड कर दिया है। इस प्रोग्राम के जरिए कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड के खातिर अप्लाई कर सकती हैं। यह ऐलान अमेरिकी लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने किया। इस दौरान उनके साथ अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस भी उपस्थित रहे।
कीथ सोंडरलिंग ने कहा, “मैं विश्व की कुछ सबसे बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों- विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा और कैपजेमिनी को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर रहा हूं।” उन्होंने आगे कहा कि श्रम विभाग, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस प्रोग्राम से हटा रहा है। हम इन कंपनियों से जुड़ी कोई भी नई Permanent Labour Certification की अर्जी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा, न ही लंबित अर्जियों पर कोई कार्रवाई करेंगे।
अमेरिकी कर्मचारियों से नौकरियां छीनने का लगाया आरोप
सोंडरलिंग बोले कि 2009 से, सिर्फ इन कंपनियों ने ही लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की मांग की है। उन्हें 2 लाख 30 हजार से ज्यादा H-1B वीजा मंजूरी और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं। ये लाखों नौकरियां थीं जो अमेरिकी कर्मचारियों से छीन ली गईं।
जेडी वेंस ने कहा कि जिस प्रोग्राम से माइक्रोसॉफ्ट को सस्पेंड किया जा रहा है, उसके अंतर्गत कंपनियों को लेबर डिपार्टमेंट में अप्लाई करने से पहले अमेरिका में जॉब्स के लिए विज्ञापन देना होता है। उन्हें यह दिखाना होता है कि अमेरिकी वर्कर्स की कमी की वजह से उन्हें किसी विदेशी वर्कर्स को ग्रीन कार्ड देने की जरूरत है।
वेंस ने यूनिवर्सिटी पर भी लगाए आरोप
जेडी वेंस ने उन यूनिवर्सिटीज की भी आलोचना की, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे विदेशी छात्रों को अमेरिका आने की सुविधा देने वाले प्रोग्राम का गलत प्रयोग कर रही थीं। J-1 वीजा कहे जाने वाले ये अस्थायी वीजा, विदेशी लोगों को काम और पढ़ाई से जुड़े एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए कुछ वक्त के लिए अमेरिका आने की इजाजत देते हैं। इससे पहले, सितंबर में H1B वीजा के लिए ट्रंप प्रशासन ने नए नियमों का प्रस्ताव भी दिया था।

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Date : 09 October 2026 Posted By : EDITOR
ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका ने दिया झटका! इंफोसिस समेत 8 कंपनियों को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ से किया सस्पेंड
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ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका ने दिया झटका! इंफोसिस समेत 8 कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से किया सस्पेंड

नई दिल्ली: अमेरिका ने आज (गुरुवार को) IT कंपनियों- कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, HCL, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से सस्पेंड कर दिया है। इस प्रोग्राम के जरिए कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड के खातिर अप्लाई कर सकती हैं। यह ऐलान अमेरिकी लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने किया। इस दौरान उनके साथ अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस भी उपस्थित रहे।
कीथ सोंडरलिंग ने कहा, "मैं विश्व की कुछ सबसे बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों- विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा और कैपजेमिनी को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर रहा हूं।" उन्होंने आगे कहा कि श्रम विभाग, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस प्रोग्राम से हटा रहा है। हम इन कंपनियों से जुड़ी कोई भी नई Permanent Labour Certification की अर्जी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा, न ही लंबित अर्जियों पर कोई कार्रवाई करेंगे।
अमेरिकी कर्मचारियों से नौकरियां छीनने का लगाया आरोप
सोंडरलिंग बोले कि 2009 से, सिर्फ इन कंपनियों ने ही लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की मांग की है। उन्हें 2 लाख 30 हजार से ज्यादा H-1B वीजा मंजूरी और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं। ये लाखों नौकरियां थीं जो अमेरिकी कर्मचारियों से छीन ली गईं।
जेडी वेंस ने कहा कि जिस प्रोग्राम से माइक्रोसॉफ्ट को सस्पेंड किया जा रहा है, उसके अंतर्गत कंपनियों को लेबर डिपार्टमेंट में अप्लाई करने से पहले अमेरिका में जॉब्स के लिए विज्ञापन देना होता है। उन्हें यह दिखाना होता है कि अमेरिकी वर्कर्स की कमी की वजह से उन्हें किसी विदेशी वर्कर्स को ग्रीन कार्ड देने की जरूरत है।
वेंस ने यूनिवर्सिटी पर भी लगाए आरोप
जेडी वेंस ने उन यूनिवर्सिटीज की भी आलोचना की, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे विदेशी छात्रों को अमेरिका आने की सुविधा देने वाले प्रोग्राम का गलत प्रयोग कर रही थीं। J-1 वीजा कहे जाने वाले ये अस्थायी वीजा, विदेशी लोगों को काम और पढ़ाई से जुड़े एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए कुछ वक्त के लिए अमेरिका आने की इजाजत देते हैं। इससे पहले, सितंबर में H1B वीजा के लिए ट्रंप प्रशासन ने नए नियमों का प्रस्ताव भी दिया था।

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