Gudi Padwa Symbolises Tradition Auspiciousness cm Dr. Yadav

सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है गुड़ी पड़वा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है गुड़ी पड़वा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ऐतिहासिक महत्व की इस तिथि से ही विक्रम संवत हुआ आरंभ

राज्य सरकार द्वारा गुड़ी पड़वा पर अवकाश के साथ सभी जिलों में विशेष आयोजन की व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मराठी भाषियों के समूहों ने भेंट की गुड़ी

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र मराठी समाज द्वारा मुख्यमंत्री निवास में नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर्व के आरंभ के प्रतीक स्वरूप आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस अवसर पर ढोल ताशें के साथ परंपरागत रूप में स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन करते हुए उन्हें पेशवाई टोपी पेश की। इसके साथ ही उन्हें पटका और प्रतीक स्वरूप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली सहित इंदौर, जबलपुर, भोपाल ,सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास, उज्जैन से आए समूहों ने गुड़ी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका का अथर्वनाद का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले सौ -डेढ़ सौ वर्षों से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान भी किया।
गुड़ी पड़वा उत्साह और उमंग का पर्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने कई आक्रांताओं का सामना किया, लेकिन कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करती है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसीलिए राज्य सरकार ने इस पर्व पर अवकाश घोषणा की है। गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों में सूर्य को नमन करने के साथ गुड़ी पड़वा उत्सव के आयोजनों में सहभागिता करेंगे।
सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई ने स्थापित किया गुड़ी पड़वा का महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल और सक्षम नेतृत्व ने भारतीयों को वैश्विक स्तर पर इस गुण धर्म की पहचान दिलाई है। पहले यूक्रेन और अब खाड़ी देशों में यह स्थिति सबके सामने है।
राज्य सरकार देगी सम्राट विक्रमादित्य के नाम से एक करोड़ एक लाख रूपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किये जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम को मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक तथा अथर्वनाद पत्रिका के प्रधान संपादक श्री संतोष गोड़बोले ने भी संबोधित किया।

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Date : 18 March 2026 Posted By : EDITOR
सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है गुड़ी पड़वा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
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सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है गुड़ी पड़वा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ऐतिहासिक महत्व की इस तिथि से ही विक्रम संवत हुआ आरंभ

राज्य सरकार द्वारा गुड़ी पड़वा पर अवकाश के साथ सभी जिलों में विशेष आयोजन की व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मराठी भाषियों के समूहों ने भेंट की गुड़ी

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र मराठी समाज द्वारा मुख्यमंत्री निवास में नव वर्ष गुड़ी पड़वा पर्व के आरंभ के प्रतीक स्वरूप आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस अवसर पर ढोल ताशें के साथ परंपरागत रूप में स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन करते हुए उन्हें पेशवाई टोपी पेश की। इसके साथ ही उन्हें पटका और प्रतीक स्वरूप छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महाराष्ट्र मंडल, नई दिल्ली सहित इंदौर, जबलपुर, भोपाल ,सागर, दमोह, छतरपुर, बीना, देवास, उज्जैन से आए समूहों ने गुड़ी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी की पत्रिका का अथर्वनाद का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले सौ -डेढ़ सौ वर्षों से मराठी कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सम्मान भी किया।
गुड़ी पड़वा उत्साह और उमंग का पर्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। हमने कई आक्रांताओं का सामना किया, लेकिन कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करती है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है। इसीलिए राज्य सरकार ने इस पर्व पर अवकाश घोषणा की है। गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंत्रीगण अपने प्रभार के जिलों में सूर्य को नमन करने के साथ गुड़ी पड़वा उत्सव के आयोजनों में सहभागिता करेंगे।
सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई ने स्थापित किया गुड़ी पड़वा का महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल और सक्षम नेतृत्व ने भारतीयों को वैश्विक स्तर पर इस गुण धर्म की पहचान दिलाई है। पहले यूक्रेन और अब खाड़ी देशों में यह स्थिति सबके सामने है।
राज्य सरकार देगी सम्राट विक्रमादित्य के नाम से एक करोड़ एक लाख रूपये का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परम्परा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार के लिए गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किये जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। कार्यक्रम को मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक तथा अथर्वनाद पत्रिका के प्रधान संपादक श्री संतोष गोड़बोले ने भी संबोधित किया।

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