1/3 से अधिक लोग प्राथमिक उपचार के उपायों से अनजान हैं जो हृदय गति रुकने की स्थिति में मदद कर सकते हैं - Update Now News

1/3 से अधिक लोग प्राथमिक उपचार के उपायों से अनजान हैं जो हृदय गति रुकने की स्थिति में मदद कर सकते हैं

 

– अधिकांश (64%) भारतीय 29 सितंबर को पड़ने वाले विश्व हृदय दिवस के बारे में जानते हैं।
– 77 % लोग नियमित समग्र जांच के लिए जाते हैं, लेकिन केवल 70% लोग ही दिल की जांच के लिए जाते हैं, वह भी साल में सिर्फ एक बार।
– केवल 63% भारतीयों ने हृदय रोगों के बारे में जागरूकता का प्रदर्शन किया या यादें ताजी कीं

मुंबई : वर्ष 2020 इस इस मायने में महत्वपूर्ण रहा है कि इसने लोगों के स्वास्थ्य और बीमारी दोनों को देखने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। जैसा कि हम विश्व हृदय दिवस 2021 के कगार पर हैं, यह देखा गया है कि निरोधक उपायों के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल में रुचि बढ़ी है, हालांकि स्वास्थ्य के प्रति बेहद जागरूक व्यक्तियों के इस नए समूह में अभी भी हृदय रोगों (सीवीडी) जैसी विशिष्ट बीमारियों के बारे में महत्वपूर्ण जागरूकता का अभाव है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के अनुसार, 51% उत्तरदाताओं का मानना है कि सीवीडी भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत की प्रमुख निजी सामान्य बीमा कंपनियों में से एक, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड द्वारा किए गए सर्वेक्षण का मकसद महामारी के बाद की दुनिया में हृदय रोगों की जागरूकता और समझ का आकलन करना है। अध्ययन में इस बात की भी पड़ताल की गई है कि कोविड -19 ने कितना गहरा असर डाला और लोगों ने इस समय और हृदय की समस्याओं से संबंधित मानसिक तनाव को कैसे प्रबंधित किया।
सीवीडी के बारे में लोगों की धारणा और समझ का गहन मूल्यांकन हासिल करने के लिए, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने अलग-अलग आयु समूहों से, विभिन्न कामकाजी स्थितियों के साथ, महानगरों, टियर I और टियर- II शहरों में 1490 से अधिक उत्तरदाताओं के साथ एक अखिल भारतीय सर्वेक्षण किया है। जैसे आंशिक वर्क प्रॉम होम (डब्ल्यूएच) और पूर्ण डब्ल्यूएच। इसमें स्वास्थ्य बीमा धारक और गैर-बीमा धारक दोनों शामिल हैं। सर्वेक्षण में आगे पता चला कि जहां 77% लोग नियमित वृहद जांच के लिए जाते हैं और केवल 70 % लोग दिल की जांच के लिए जाते हैं, वह भी साल में सिर्फ एक बार। स्वास्थ्य एवं देखभाल सर्वे के निष्कर्षों पर, श्री संजय दत्ता, चीफ – अंडरराइटिंग, रीइंश्योरेंस एंड क्लेम, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने कहा, “बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी के साथ-साथ हमारे समग्र स्वास्थ्य पर महामारी के प्रभाव की गंभीरता, स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के लिए इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है। एक स्वस्थ हृदय के साथ स्वस्थ्य जीवनशैली हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी बेहद अहम है। एक सक्रिय जीवन शैली के साथ-साथ, हमारे मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना भी अनिवार्य है क्योंकि तनाव की चिंता हमारे भागदौड़ वाली जीवनशैली को चौतरफा घेर रखा है। ऐसे समय में, अपने और परिवार के सदस्यों के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा खरीदना भी उतना ही महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि चिकित्सा देखभाल महंगी है। यह लोगों के मन में स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा पैदा करने के साथ कुछ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
भारतीयों में जागरूकता, समझ और तैयारी
सर्वेक्षण से पता चला कि अधिकांश (64%) भारतीय 29 सितंबर को पड़ने वाले विश्व हृदय दिवस के बारे में जानते हैं। हालांकि, युवा लोगों (45 वर्ष से कम) में हृदय रोगों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और 2/3 ( (दो तिहाई) से कम (63%) उत्तरदाताओं को पता है कि सीवीडी आज युवा आयु वर्ग को भी प्रभावित कर रहा है। इसी तरह, 40 से अधिक आयु वर्ग (63%) में भी जागरूकता कम है जहां जोखिम सबसे अधिक है। सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि 1/3 (एक तिमाही) से अधिक लोग प्राथमिक चिकित्सा उपायों से अनजान हैं जो हृदय गति रुकने की स्थिति में मदद कर सकते हैं।
सीवीडी के कारणों के बारे में उत्तरदाताओं के ज्ञान पर सवाल उठाने पर, उत्तरदाताओं का मानना था कि उच्च स्तर का कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप (57%), तनाव (55%) और मोटापा (52%) शीर्ष कारण हैं जो हृदय रोगों का कारण बनते हैं। हालांकि, नकारात्मक पक्ष यह है कि 18% उत्तरदाता हृदय रोग के इन शीर्ष 3 कारणों से पूरी तरह अनजान थे। दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शीर्ष मेट्रो और टियर 1 शहरों में हृदय रोगों के प्रमुख कारणों के बारे में कम जागरूकता है। इसके अतिरिक्त, यह पाया गया कि जब स्वयं हृदय रोग से पीड़ित होते हैं, तो पुरुष महिलाओं (44%) की तुलना में शीर्ष 3 कारणों के बारे में अधिक जागरूक (50%) होते हैं।
लोगों के दिलों पर कोविड-19 का असर
जागरूकता के बावजूद, महामारी के दौरान हृदय रोगियों के बीच नियमित जांच में कमी आई। वार्षिक जांच के लिए जाने वाले हृदय रोग वाले लोगों का अनुपात महामारी के दौरान 92% पूर्व-महामारी

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Date : 30 September 2021 Posted By : EDITOR
1/3 से अधिक लोग प्राथमिक उपचार के उपायों से अनजान हैं जो हृदय गति रुकने की स्थिति में मदद कर सकते हैं
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- अधिकांश (64%) भारतीय 29 सितंबर को पड़ने वाले विश्व हृदय दिवस के बारे में जानते हैं।
- 77 % लोग नियमित समग्र जांच के लिए जाते हैं, लेकिन केवल 70% लोग ही दिल की जांच के लिए जाते हैं, वह भी साल में सिर्फ एक बार।
- केवल 63% भारतीयों ने हृदय रोगों के बारे में जागरूकता का प्रदर्शन किया या यादें ताजी कीं

मुंबई : वर्ष 2020 इस इस मायने में महत्वपूर्ण रहा है कि इसने लोगों के स्वास्थ्य और बीमारी दोनों को देखने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। जैसा कि हम विश्व हृदय दिवस 2021 के कगार पर हैं, यह देखा गया है कि निरोधक उपायों के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल में रुचि बढ़ी है, हालांकि स्वास्थ्य के प्रति बेहद जागरूक व्यक्तियों के इस नए समूह में अभी भी हृदय रोगों (सीवीडी) जैसी विशिष्ट बीमारियों के बारे में महत्वपूर्ण जागरूकता का अभाव है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के अनुसार, 51% उत्तरदाताओं का मानना है कि सीवीडी भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत की प्रमुख निजी सामान्य बीमा कंपनियों में से एक, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड द्वारा किए गए सर्वेक्षण का मकसद महामारी के बाद की दुनिया में हृदय रोगों की जागरूकता और समझ का आकलन करना है। अध्ययन में इस बात की भी पड़ताल की गई है कि कोविड -19 ने कितना गहरा असर डाला और लोगों ने इस समय और हृदय की समस्याओं से संबंधित मानसिक तनाव को कैसे प्रबंधित किया।
सीवीडी के बारे में लोगों की धारणा और समझ का गहन मूल्यांकन हासिल करने के लिए, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने अलग-अलग आयु समूहों से, विभिन्न कामकाजी स्थितियों के साथ, महानगरों, टियर I और टियर- II शहरों में 1490 से अधिक उत्तरदाताओं के साथ एक अखिल भारतीय सर्वेक्षण किया है। जैसे आंशिक वर्क प्रॉम होम (डब्ल्यूएच) और पूर्ण डब्ल्यूएच। इसमें स्वास्थ्य बीमा धारक और गैर-बीमा धारक दोनों शामिल हैं। सर्वेक्षण में आगे पता चला कि जहां 77% लोग नियमित वृहद जांच के लिए जाते हैं और केवल 70 % लोग दिल की जांच के लिए जाते हैं, वह भी साल में सिर्फ एक बार। स्वास्थ्य एवं देखभाल सर्वे के निष्कर्षों पर, श्री संजय दत्ता, चीफ - अंडरराइटिंग, रीइंश्योरेंस एंड क्लेम, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने कहा, "बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी के साथ-साथ हमारे समग्र स्वास्थ्य पर महामारी के प्रभाव की गंभीरता, स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के लिए इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है। एक स्वस्थ हृदय के साथ स्वस्थ्य जीवनशैली हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी बेहद अहम है। एक सक्रिय जीवन शैली के साथ-साथ, हमारे मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना भी अनिवार्य है क्योंकि तनाव की चिंता हमारे भागदौड़ वाली जीवनशैली को चौतरफा घेर रखा है। ऐसे समय में, अपने और परिवार के सदस्यों के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा खरीदना भी उतना ही महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि चिकित्सा देखभाल महंगी है। यह लोगों के मन में स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा पैदा करने के साथ कुछ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
भारतीयों में जागरूकता, समझ और तैयारी
सर्वेक्षण से पता चला कि अधिकांश (64%) भारतीय 29 सितंबर को पड़ने वाले विश्व हृदय दिवस के बारे में जानते हैं। हालांकि, युवा लोगों (45 वर्ष से कम) में हृदय रोगों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और 2/3 ( (दो तिहाई) से कम (63%) उत्तरदाताओं को पता है कि सीवीडी आज युवा आयु वर्ग को भी प्रभावित कर रहा है। इसी तरह, 40 से अधिक आयु वर्ग (63%) में भी जागरूकता कम है जहां जोखिम सबसे अधिक है। सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि 1/3 (एक तिमाही) से अधिक लोग प्राथमिक चिकित्सा उपायों से अनजान हैं जो हृदय गति रुकने की स्थिति में मदद कर सकते हैं।
सीवीडी के कारणों के बारे में उत्तरदाताओं के ज्ञान पर सवाल उठाने पर, उत्तरदाताओं का मानना था कि उच्च स्तर का कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप (57%), तनाव (55%) और मोटापा (52%) शीर्ष कारण हैं जो हृदय रोगों का कारण बनते हैं। हालांकि, नकारात्मक पक्ष यह है कि 18% उत्तरदाता हृदय रोग के इन शीर्ष 3 कारणों से पूरी तरह अनजान थे। दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शीर्ष मेट्रो और टियर 1 शहरों में हृदय रोगों के प्रमुख कारणों के बारे में कम जागरूकता है। इसके अतिरिक्त, यह पाया गया कि जब स्वयं हृदय रोग से पीड़ित होते हैं, तो पुरुष महिलाओं (44%) की तुलना में शीर्ष 3 कारणों के बारे में अधिक जागरूक (50%) होते हैं।
लोगों के दिलों पर कोविड-19 का असर
जागरूकता के बावजूद, महामारी के दौरान हृदय रोगियों के बीच नियमित जांच में कमी आई। वार्षिक जांच के लिए जाने वाले हृदय रोग वाले लोगों का अनुपात महामारी के दौरान 92% पूर्व-महामारी

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