Movie Review Welcome to the Jungle is an action-comedy film

मूवी रिव्यूः वेलकम टू द जंगल: Welcome To The Jungle एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म

मूवी रिव्यूः वेलकम टू द जंगल: Welcome To The Jungle एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म है

स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस

डायरेक्टर- अहमद खान

रेटिंग- 3.5 स्टार्स

UNN @ Varsha Parikh :‘वेलकम टू द जंगल’ खुद को गंभीर सिनेमा नहीं, बल्कि एक फुल-ऑन एंटरटेनमेंट पैकेज के तौर पर पेश करती है। फिल्म शुरू होते ही साफ कर देती है कि यहां कहानी से ज्यादा हंसी मायने रखती है। लॉजिक की बजाय कॉमेडी को प्राथमिकता दी गई है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह मल्टीस्टारर फिल्म हर कुछ मिनट में नए किरदार, नए ट्विस्ट और नए कॉमिक मोमेंट्स लेकर आती है। कई जगह कहानी बिखरी हुई और अविश्वसनीय लगती है, लेकिन फिल्म अपनी रफ्तार और हल्के-फुल्के अंदाज से दर्शकों को बांधे रखती है। अक्षय कुमार अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से एक बार फिर छा जाते हैं, जबकि रवीना टंडन के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री पुराने दिनों की याद ताजा कर देती है। जॉनी लीवर, परेश रावल, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े और बाकी कलाकार भी अपने-अपने अंदाज में हंसी का तड़का लगाते हैं।
कहानी
कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है। इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है। यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक ‘बजरंगी भाईजान’ की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है ।

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Date : 26 June 2026 Posted By : EDITOR
मूवी रिव्यूः वेलकम टू द जंगल: Welcome To The Jungle एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म
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मूवी रिव्यूः वेलकम टू द जंगल: Welcome To The Jungle एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म है

स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस

डायरेक्टर- अहमद खान

रेटिंग- 3.5 स्टार्स

UNN @ Varsha Parikh :'वेलकम टू द जंगल' खुद को गंभीर सिनेमा नहीं, बल्कि एक फुल-ऑन एंटरटेनमेंट पैकेज के तौर पर पेश करती है। फिल्म शुरू होते ही साफ कर देती है कि यहां कहानी से ज्यादा हंसी मायने रखती है। लॉजिक की बजाय कॉमेडी को प्राथमिकता दी गई है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह मल्टीस्टारर फिल्म हर कुछ मिनट में नए किरदार, नए ट्विस्ट और नए कॉमिक मोमेंट्स लेकर आती है। कई जगह कहानी बिखरी हुई और अविश्वसनीय लगती है, लेकिन फिल्म अपनी रफ्तार और हल्के-फुल्के अंदाज से दर्शकों को बांधे रखती है। अक्षय कुमार अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से एक बार फिर छा जाते हैं, जबकि रवीना टंडन के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री पुराने दिनों की याद ताजा कर देती है। जॉनी लीवर, परेश रावल, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े और बाकी कलाकार भी अपने-अपने अंदाज में हंसी का तड़का लगाते हैं।
कहानी
कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है। इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है। यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक 'बजरंगी भाईजान' की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है ।

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