NEP 2020- एनईपी 2020: भारत को विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग

 

एनईपी 2020: भारत को विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग

Indore : प्रस वार्ता को संबोधित करते हॅए IIT Indore के निदेशक प्रोफेसर सुहास एस जोशी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा की परिकल्पना करती है और 2030 (एसडीजी-4) तक सभी लोगों के लिए आजीवन अध्ययन के अवसरों को बढ़ावा देती है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करना है, जो कि विश्व गुरु के रूप में अपनी भूमिका को पुनर्स्थापित करने हेतु भारत की आकांक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
ज्ञान संबंधी आवश्यकताओं के बढ़ते दायरे के साथ, यह बात तेज़ी से महत्वपूर्ण होती जा रही है कि कोई छात्र गहराई से सोचे, समस्याओं को हल करे और रचनात्मक कार्य करे तथा नई चीज़ें सीखे। इस तरह, शिक्षा को शिक्षार्थी के लिए अधिक अनुभवात्मक, समग्र, शोध से प्रेरित, सरल और संतोषजनक बनाने की आवश्यकता है।
इसलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020), भारत को एक समतापूर्ण श्रेष्ठ ज्ञान वाले समाज में बदलने के लिए भारतीय लोकाचार पर आधारित एक शिक्षा प्रणाली की संकल्पना करती है। एनईपी 2020, एक छात्र के जीवन में महत्वपूर्ण सोच और समस्या समाधान के अलावा मूलभूत संज्ञानात्मक क्षमताओं को प्रदान करके, सामाजिक जिम्मेदारी और भावनात्मक स्थिरता की भावना पैदा करके योगदान देने का समर्थन करती है।
स्कूली शिक्षा
एनईपी-2020 को बच्चों की शिक्षा की नींव को मजबूत करने के उद्देश्य से स्कूली शिक्षा के लिए एक खास दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) पर विशेष ध्यान देने से सरल बहुआयामी गतिविधि-आधारित समस्या-समाधान दृष्टिकोण के ज़रिए बच्चे के पूर्ण विकास में मदद मिलेगी। बच्चे की समग्र शिक्षा, विकास और कल्याण पर जोर देने के साथ प्रारंभिक आयु वाली स्कूली शिक्षा की एक नई 5+3+3+4 संरचना लागू की गई है। 5 वर्ष की आयु से कम के बच्चों के लिए प्रारंभिक कक्षा या बालवाटिका की शुरुआत की गई है, जो प्रत्येक बच्चे को सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को पार करवा कर कक्षा एक के लिए तैयार कर देगी। बालवाटिका कक्षाएं संज्ञानात्मक, भावात्मक और मनोदैहिक क्षमताओं और प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मकता के विकास में मदद करेंगी।
वहीं बहुआयामी खेल-आधारित शिक्षा न केवल तार्किक सोच, समस्या समाधान और कला विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि सामाजिक क्षमताओं, संवेदनशीलता, अच्छे व्यवहार, नैतिकता और टीम वर्क विकसित करने पर भी समान जोर देती है।
उच्च शिक्षा
शिक्षा के दौरान, एनईपी का उद्देश्य नवाचार और निर्णय लेने के लिए रचनात्मकता और महत्वपूर्ण सोच को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करना है। एनईपी के अनुसार ऐसा माना जाता है कि उत्कृष्ट शोध उच्च शिक्षा की मूलभूत आधारशिलाओं में से एक है। एनईपी 2020 में देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली में कुछ प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने की परिकल्पना की गई है, जो कि इस प्रकार हैं:
समग्र शिक्षा
छात्रों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र को नया रूप देना

बहु-विषयक स्नातक शिक्षा
किसी छात्र द्वारा अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट को डिजिटल रूप से संग्रहीत करने के लिए अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट की स्थापना करना।
कई नए साधनों का उपयोग करके शिक्षा में पहुंच, समानता और समावेशन को बढ़ाना
लोकहितैषी और साथ ही निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व प्रावधानों का उपयोग करके वंचित और शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्रों को सहायता प्रदान करना
व्यापक समावेशन के लिए ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के अवसरों का उपयोग करके जीवन भर सीखने के अवसर प्रदान करना
विधिवत शिक्षा के साथ-साथ प्रौद्योगिकी विकास और ऊष्मायन सहायता केंद्र प्रदान करके अकादमिक क्षेत्र में उद्यमशीलता को बेहतर बनाना
महत्वपूर्ण अनुसंधान करने के लिए अधिक से अधिक उद्योग एवं अकादमिक के बीच परस्पर सहयोग की खोज करना
आईआईटी इंदौर में एनईपी 2020 का कार्यान्वयन
आईआईटी में आवासीय परिसर की ऐसी एक अनोखी सुविधा है, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि और संस्कृतियों से आने वाले, विभिन्न भाषाएं बोलने वाले और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले छात्र, कर्मचारी और संकाय सदस्य रहते हैं। लगभग 2800 छात्रों की विशाल संख्या के साथ, हमारे यहां लगभग पचास प्रतिशत छात्र स्नातक प्रोग्राम में नामांकित हैं और बाकी छात्र स्नातकोत्तर और पीएच.डी. प्रोग्राम में नामांकित हैं, जो छात्र समुदाय को एक महत्वपूर्ण विविधता प्रदान करते हैं। संस्थान लगभग 200 संकाय सदस्यों और लगभग इतनी ही संख्या में सहायक कर्मचारियों के साथ संचालित होता है, जिन्हें परिसर के अंदर ही आवास की सुविधा मिली हुई है।
समग्र शिक्षा
विभिन्न पृष्ठभूमियों से छात्र आईआईटी में प्रवेश लेते हैं, जहां विशेष रूप से उनमें से सभी विभिन्न प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में सफलतापूर्वक उच्च रैंक हासिल करते हैं। साथ ही, साथियों के बीच प्रदर्शन करने और उत्कृष्टता प्राप्त करने का अत्यधिक शैक्षणिक संघर्ष होता है। छात्रों को भाषा संबंधी बाधाओं और भावनात्मक कशाकशी का सामना करना पड़ता है। इसलिए, सौहार्दपूर्ण वातावरण के साथ इन चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता है। संस्थान, दो नए डिज़ाइन के प्रोग्राम, जेनेसिस (Genesis) और लाइव (LIVE) के माध्यम से बाधाओं को पार करने में उनकी मदद करने का प्रयास करता है।
जेनेसिस (Genesis) संस्थान के नए छात्रों के लिए एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम है, जो कि वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। यह उनकी परेशानी को कम करने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करता है और उन्हें नए मित्र बनाने का अवसर भी प्रदान करता है, जिससे उन्हें अध्ययन के नए स्थान पर सहज महसूस होता है। इसमें योग, शारीरिक गतिविधियां, मनोरंजन से भरे खेल, स्टार गेज़िंग और ट्रेजर हंट शामिल हैं। जेनेसिस (Genesis) में सटीक आहार, प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने और कई मनोवैज्ञानिक चिंताओं से निपटने पर सत्र भी शामिल हैं।
जीवन-कौशल पहल और मूल्य शिक्षा दृष्टिकोण को कवर करके समृद्ध करने में मदद मिली है। वे हमें महत्वपूर्ण शोध करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करके हमारे शोध को समृद्ध बनाने में भी मदद करते हैं। इस प्रकार, एनईपी 2020 के कार्यान्वयन ने आईआईटी इंदौर को संस्थान में शैक्षिक प्रणाली के व्यापक पुनर्गठन में मदद की, जिससे इस संस्थान के लिए आसपास की दुनिया में होने वाले परिवर्तनों के साथ बने रहना अत्यंत सरल हो गया है।

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