Nepalese PM Karki gave priority to those with anti-corruption image

नेपाली पीएम कार्की ने कैबिनेट में भ्रष्टाचार विरोधी छवि वालों को दी प्राथमिकता

नेपाली पीएम कार्की ने कैबिनेट में भ्रष्टाचार विरोधी छवि वालों को दी प्राथमिकता

-अर्याल को गृह, खनाल को वित्त, घीसिंग को ऊर्जा और बालानंद को रक्षामंत्री बनाया

काठमांडू । सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली नेपाल की अंतरिम सरकार में ओमप्रकाश अर्याल को गृह मंत्री, रामेश्वर खनाल को वित्त मंत्री, कुलमान घीसिंग को ऊर्जा मंत्री और बालानंद शर्मा को रक्षा मंत्री बनाया गया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने जेन-जेड समूहों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने के बाद सुशीला कार्की को देश का नेतृत्व सौंपने की घोषणा की। बता दें राष्ट्रपति पौडेल ने प्रदर्शनकारियों की मांग को स्वीकार करते हुए वर्तमान संसद को भंग कर दिया। मार्च 2026 तक नए चुनाव कराने के वादे के साथ सुशीला कार्की ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभाला है।
पीएम सुशीला कार्की ने अपनी कैबिनेट में भ्रष्टाचार विरोधी छवि वाले और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी है। सूत्रों के मुताबिक ये नियुक्तियां जेन-जेड प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों जैसे- पारदर्शिता, सुशासन और युवा प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर की जा रही हैं।
ओमप्रकाश अर्याल को गृह मंत्री बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के चर्चित वकील अर्याल सुशीला कार्की के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं। उन्होंने पिछली सरकारों के खिलाफ 50 से अधिक जनहित याचिकाएं दायर की हैं, जो मुख्य रूप से भ्रष्टाचार, पुलिस सुधार और नागरिक अधिकारों से जुड़ी थीं। उनकी नियुक्ति से कानून-व्यवस्था मजबूत करने की उम्मीद है, खासकर प्रदर्शनों के बाद की अस्थिरता को देखते हुए।
रामेश्वर खनाल को वित्त मंत्री पद दिया है। पूर्व वित्त सचिव खनाल आर्थिक सुधारों के प्रबल पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कई बार बजट सुधार, कर प्रणाली में पारदर्शिता और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। नेपाल के आर्थिक संकट- जैसे विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और महंगाई को संभालने के लिए उनकी विशेषज्ञता अहम हो सकती है।
कुलमान घीसिंग को ऊर्जा मंत्री बनाया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व महानिदेशक घीसिंग ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए मशहूर हैं। उनके नेतृत्व में लोडशेडिंग समाप्त हुई और जलविद्युत परियोजनाओं को गति मिली। विशेष रूप से, नेपाल-भारत के बीच ऊर्जा समझौते में उनकी अहम भूमिका रही, जिसके तहत अगले 10 सालों में 10,000 मेगावाट बिजली व्यापार का समझौता संभव हुआ। यह नियुक्ति भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने में भी सहायक हो सकती है।

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