Rahul Gandhi termed the government's foreign policy weak

राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति को “कमजोर” तो अन्य नेताओं ने संतुलित बताया

राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति को “कमजोर” तो अन्य नेताओं ने संतुलित बताया

-मीडिल ईस्ट में जारी तनाव और देश में आर्थिक प्रभावों को लेकर कांग्रेस में मतभेद

नई दिल्ली। मीडिल ईस्ट में जारी तनाव और देश में इसके आर्थिक प्रभावों को लेकर कांग्रेस के अंदर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। जहां लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केंद्र सरकार की विदेश नीति को “कमजोर” बता रहे हैं, वहीं पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सरकार के रुख को संतुलित और जिम्मेदार बता रहे हैं। अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर राहुल गांधी ने सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे कमजोर बताते हुए अधिक स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाने की मांग की। इसके विपरीत, कांग्रेस सांसद शिश थरुर ने सरकार की नीति को “जिम्मेदार राजकाज” करार दिया।
इसी तरह कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी संकेत दिया कि सरकार इस जटिल अंतरराष्ट्रीय स्थिति को सही तरीके से संभाल रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया पर भारत की कूटनीतिक रणनीति को “परिपक्व और कुशल” बताया और राष्ट्रीय एकता की अपील की। घरेलू मुद्दों पर भी पार्टी के भीतर एकरूपता नजर नहीं आ रही है। एलपीजी संकट को लेकर जहां कांग्रेस नेतृत्व सरकार पर निशाना साध रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने सार्वजनिक रूप से कहा कि “ऐसी कोई कमी नहीं है, बल्कि माहौल बनाया जा रहा है।” उनके इस बयान ने पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख को उजागर किया है।
इन बयानों के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेतृत्व पर भ्रम फैलाने और आंतरिक असहमति का आरोप लगाया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के अंदर ऐसे मतभेद सामने आए आ रहे हैं। इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सरकार के समर्थन में खड़े थे, जबकि राहुल गांधी ने आलोचनात्मक रुख अपनाया था। ताजा घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस के अंदर विदेश नीति और आर्थिक मुद्दों को लेकर एकमतता की कमी है। आने वाले समय में यह आंतरिक असहमति पार्टी की राजनीतिक रणनीति और चुनावी प्रदर्शन पर असर डाल सकती है।

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