Nishaanchi Review Director Anurag Kashyap

Nishaanchi Review: मूवी रिव्यू: निशानची

Nishaanchi Review: मूवी रिव्यू –  निशानची

ऐक्टर:ऐश्वर्य ठाकरे,मोनिका पंवार,वेदिका पिंटो,मोहम्मद ज़ीशान अयूब,विनीत कुमार सिंह,कुमुद मिश्रा

डायरेक्टर :अनुराग कश्यप

रेटिंग – 2.5/5

निशानची’ मूवी रिव्यू

UNN@ वर्षा पारीख : अनुराग कश्यप की पहचान हमेशा से रही है समाज की जटिलताओं, मानवीय रिश्तों की उलझनों और जीवन की विडंबनाओं को परदे पर सजीव बनाने की। *‘निशानची’* में वे एक बार फिर दर्शकों को कानपुर की देहाती गलियों और गाँवों के बीच ले जाते हैं, जहाँ हर दृश्य असली ज़िंदगी की खुशबू लिए हुए है। स्थानीय बोली, ग्रामीण संस्कृति, सादगीभरा पहनावा और जमीनी किरदार फिल्म को ठोस आधार देते हैं। इन सबके बीच अचानक सामने आने वाले मोड़ और घटनाएँ दर्शकों को हर पल रोमांचित करती हैं। अनुराग की यह कहानी केवल परदे पर गढ़ी हुई नहीं लगती, बल्कि सचमुच उसी मिट्टी से जन्मी हुई महसूस होती है।

‘निशानची’ की कहानी
फिल्म की कहानी दो टाइमलाइन में चलती है, वर्तमान और अतीत। वर्तमान में, जुड़वां भाई बबलू और डबलू (ऐश्वर्य ठाकरे), रिंकू (वेदिका पिंटो) के साथ मिलकर एक लोकल बैंक डकैती की असफल कोशिश करते हैं। डकैती फेल होती है और बबलू को दस साल की जेल हो जाती है। रिंकू, जिसने अपने पिता को खो दिया है, अब मजबूरी में नौटंकी के मंच पर नाचने को विवश है। बबलू उससे जुनूनी मोहब्बत करता है। इसके बाद कहानी पीछे जाती है, अतीत की तरफ। यहां सामने आते हैं उनके माता-पिता, मंजरी (मोनिका पंवार) और जबरदस्त सिंह (विनीत कुमार सिंह)। मंजरी एक स्टेट-लेवल की माहिर निशानेबाज थी और जबरदस्त सिंह अखाड़े का उभरता पहलवान। लेकिन राजनीति, भाई-भतीजावाद और धोखेबाजी ने उनके सपनों को कुचल दिया। इसी दौरान जबरदस्त सिंह का सबसे करीबी दोस्त, अंबिका प्रसाद (कुमुद मिश्रा), उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर सामने आता है। वही असली आस्तीन का सांप था, जबरदस्त सिंह की हत्या भी उसी ने करवाई, और सालों से उसकी नजर सिर्फ संपत्ति पर ही नहीं, बल्कि उसकी विधवा मंजरी पर भी रही। इधर, इन सब सच्चाइयों से अनजान बबलू, बड़ा होकर उसी अंबिका प्रसाद के लिए काम करने लगता है। अंबिका प्रसाद उसे इस्तेमाल करता है और अखाड़े के मुखिया (राजेश कुमार) का खून बबलू से करवाकर उसे जेल भिजवाता है। जेल से छूटकर लौटा बबलू और भी बेलगाम हो चुका है। अब वह रिंकू से दीवानगी की हद तक मोहब्बत करता है, हालांकि वही रिंकू के पिता का हत्यारा भी है। कहानी में सबसे बड़ा टकराव तब होता है जब बबलू, अपने चाचा समान अंबिका प्रसाद से रिंकू के लिए उसी के खिलाफ बगावत करता है। बबलू का यह विद्रोह अंबिका के साम्राज्य में भूचाल ला देता है। बदले, प्यार और विरासत के इस खेल में हर रिश्ता खून से सना है और हर मोड़ पर कहानी और खतरनाक हो जाती है।

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Date : 19 September 2025 Posted By : EDITOR
Nishaanchi Review: मूवी रिव्यू: निशानची
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Nishaanchi Review: मूवी रिव्यू -  निशानची

ऐक्टर:ऐश्वर्य ठाकरे,मोनिका पंवार,वेदिका पिंटो,मोहम्मद ज़ीशान अयूब,विनीत कुमार सिंह,कुमुद मिश्रा

डायरेक्टर :अनुराग कश्यप

रेटिंग - 2.5/5

निशानची’ मूवी रिव्यू

UNN@ वर्षा पारीख : अनुराग कश्यप की पहचान हमेशा से रही है समाज की जटिलताओं, मानवीय रिश्तों की उलझनों और जीवन की विडंबनाओं को परदे पर सजीव बनाने की। *‘निशानची’* में वे एक बार फिर दर्शकों को कानपुर की देहाती गलियों और गाँवों के बीच ले जाते हैं, जहाँ हर दृश्य असली ज़िंदगी की खुशबू लिए हुए है। स्थानीय बोली, ग्रामीण संस्कृति, सादगीभरा पहनावा और जमीनी किरदार फिल्म को ठोस आधार देते हैं। इन सबके बीच अचानक सामने आने वाले मोड़ और घटनाएँ दर्शकों को हर पल रोमांचित करती हैं। अनुराग की यह कहानी केवल परदे पर गढ़ी हुई नहीं लगती, बल्कि सचमुच उसी मिट्टी से जन्मी हुई महसूस होती है।

'निशानची' की कहानी
फिल्म की कहानी दो टाइमलाइन में चलती है, वर्तमान और अतीत। वर्तमान में, जुड़वां भाई बबलू और डबलू (ऐश्वर्य ठाकरे), रिंकू (वेदिका पिंटो) के साथ मिलकर एक लोकल बैंक डकैती की असफल कोशिश करते हैं। डकैती फेल होती है और बबलू को दस साल की जेल हो जाती है। रिंकू, जिसने अपने पिता को खो दिया है, अब मजबूरी में नौटंकी के मंच पर नाचने को विवश है। बबलू उससे जुनूनी मोहब्बत करता है। इसके बाद कहानी पीछे जाती है, अतीत की तरफ। यहां सामने आते हैं उनके माता-पिता, मंजरी (मोनिका पंवार) और जबरदस्त सिंह (विनीत कुमार सिंह)। मंजरी एक स्टेट-लेवल की माहिर निशानेबाज थी और जबरदस्त सिंह अखाड़े का उभरता पहलवान। लेकिन राजनीति, भाई-भतीजावाद और धोखेबाजी ने उनके सपनों को कुचल दिया। इसी दौरान जबरदस्त सिंह का सबसे करीबी दोस्त, अंबिका प्रसाद (कुमुद मिश्रा), उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर सामने आता है। वही असली आस्तीन का सांप था, जबरदस्त सिंह की हत्या भी उसी ने करवाई, और सालों से उसकी नजर सिर्फ संपत्ति पर ही नहीं, बल्कि उसकी विधवा मंजरी पर भी रही। इधर, इन सब सच्चाइयों से अनजान बबलू, बड़ा होकर उसी अंबिका प्रसाद के लिए काम करने लगता है। अंबिका प्रसाद उसे इस्तेमाल करता है और अखाड़े के मुखिया (राजेश कुमार) का खून बबलू से करवाकर उसे जेल भिजवाता है। जेल से छूटकर लौटा बबलू और भी बेलगाम हो चुका है। अब वह रिंकू से दीवानगी की हद तक मोहब्बत करता है, हालांकि वही रिंकू के पिता का हत्यारा भी है। कहानी में सबसे बड़ा टकराव तब होता है जब बबलू, अपने चाचा समान अंबिका प्रसाद से रिंकू के लिए उसी के खिलाफ बगावत करता है। बबलू का यह विद्रोह अंबिका के साम्राज्य में भूचाल ला देता है। बदले, प्यार और विरासत के इस खेल में हर रिश्ता खून से सना है और हर मोड़ पर कहानी और खतरनाक हो जाती है।

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