will be all-weather connectivity between Ladakh and Kashmir

अब लद्दाख और कश्मीर के बीच हर मौसम में रहेगी कनेक्टिविटी

अब लद्दाख और कश्मीर के बीच हर मौसम में रहेगी कनेक्टिविटी

-चीन बॉर्डर के पास ज़ोजिला टनल का अंतिम ब्रेकथ्रू पूरा

नई दिल्ली। भारत ने बुनियादी ढांचे के विकास में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ज़ोजिला टनल का अंतिम ब्रेकथ्रू (आर-पार खुदाई का काम) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अत्यधिक ऊंचाई पर निर्मित होने वाली यह दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब, दो-तरफा सड़क सुरंग होगी। यह सुरंग कश्मीर घाटी और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को वर्षभर सभी मौसमों में आपस में जोड़े रखेगी। चीन सीमा के पास भारत की सामरिक और नागरिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में इसे एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। श्रीनगर-कारगिल-लेह हाईवे पर स्थित ज़ोजिला पास दशकों से इस क्षेत्र की जीवनरेखा होने के बावजूद सर्दियों में भारी बर्फीले तूफान, हिमस्खलन और अत्यधिक शून्य से नीचे के तापमान के कारण महीनों तक बंद रहता था, जिससे यह पूरा इलाका शेष देश से पूरी तरह कट जाता था। इस नई टनल के चालू होने से अब यह मौसमी अलगाव हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
लगभग 13.153 किलोमीटर लंबी इस मुख्य टनल के निर्माण में 1,200 से अधिक मजदूरों और इंजीनियरों ने नौ साल तक दुनिया के सबसे दुर्गम और कठिन इलाकों में से एक में काम किया है। यहां सर्दियों में तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, जिसके कारण साल में औसतन केवल 100 दिन ही काम करना संभव हो पाता था। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, काम को निरंतर गति दी गई और एक करोड़ से अधिक सुरक्षित मैन-आवर्स दर्ज किए गए, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। इंजीनियरों ने इस कठिन काम को अंजाम देने के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड जैसी विश्व स्तरीय उन्नत तकनीकों का उपयोग किया। टनल का मार्ग जिन चट्टानों से होकर गुजरता है, उनके स्वरूप में 67 बार बदलाव देखा गया, जिससे सुरक्षात्मक रणनीति को बार-बार बदलना पड़ा। टनल के भीतर सुरक्षा और वेंटिलेशन के लिए तीन बड़े वर्टिकल शाफ्ट बनाए गए हैं। इसका 474.3 मीटर गहरा शाफ्ट भारत का सबसे गहरा वर्टिकल शाफ्ट है, जो सुरंग के अंदर हवा के प्रवाह को सुरक्षित और सांस लेने योग्य बनाए रखेगा।
पांच वर्षों में पांच बड़े हिमस्खलन बने चुनौती
परियोजना के दौरान पिछले पांच वर्षों में पांच बड़े हिमस्खलन की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, जिसमें भारतीय सेना की मुस्तैदी से 172 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया गया था। विशेष स्नो ब्लोअर और भारी मशीनरी की मदद से विपरीत परिस्थितियों में भी काम को रुकने नहीं दिया गया। ज़ोजिला टनल दरअसल 30.894 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का एक मुख्य हिस्सा है, जिसमें निलगर ट्विन टनल, कट-एंड-कवर संरचनाएं और तीन बड़े पुल भी शामिल हैं। यह टनल जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग के पास बालटाल से लेकर लद्दाख के द्रास में मिनामर्ग तक फैलेगी। यह कारगिल, द्रास और लेह के स्थानीय समुदायों के लिए वरदान साबित होगी और भारतीय सेना की उत्तरी सीमा पर रसद आपूर्ति को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी। टनल का सबसे मुश्किल हिस्सा अब पूरा हो चुका है और शेष बचे फिनिशिंग के काम भी तेजी से निपटाए जा रहे हैं।
बता दें कि ज़ोजिला टनल 30.894 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का एक केंद्रीय हिस्सा है, जिसमें निलगर ट्विन टनल (457.35 मीटर और 1,953.63 मीटर), 2.35 किलोमीटर कट-एंड-कवर संरचनाएं और तीन बड़े पुल (कुल 460 मीटर) भी शामिल हैं।

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