Rahul Gandhi Tribals Are Paying the Price for Development

आदिवासी अधिकार संवाद’ में बोले राहुल गांधी- विकास की कीमत आदिवासी चुका रहे

आदिवासी अधिकार संवाद’ में बोले राहुल गांधी- विकास की कीमत आदिवासी चुका रहे

जमीन, आरक्षण और प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल

वडोदरा । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सोमवार को गुजरात दौरे पर वडोदरा पहुंचे, जहां उन्होंने ‘आदिवासी अधिकार संवाद’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी अधिकारों, सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास की नीतियों को लेकर केंद्र सरकार और कॉरपोरेट क्षेत्र पर सवाल उठाए।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि जब भी विकास की बात होती है, उसका सबसे ज्यादा असर आदिवासी समुदाय पर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में आदिवासियों की जमीनें विकास परियोजनाओं के लिए ले ली जाती हैं। उनका कहना था कि मूर्ति निर्माण हो या खनन परियोजना, इसका बोझ अक्सर आदिवासी समुदाय को ही उठाना पड़ता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जाति जनगणना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि वे इस विषय को लगातार उठाते रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और नरेंद्र मोदी तथा भारतीय जनता पार्टी की आलोचना का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने देश की जनसंख्या के सामाजिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी लगभग 9प्रतिशत, दलित 15प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग 50प्रतिशत और अल्पसंख्यक 15प्रतिशत हैं। इसके बावजूद, उनके अनुसार, बड़े कॉरपोरेट और संस्थानों में इन वर्गों की भागीदारी बहुत कम है। यहां पर राहुल गांधी ने विशेष रूप से अडाणी ग्रुप का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन में आदिवासी समुदाय का कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखता। उन्होंने निजीकरण की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे सीमित लोगों को ही फायदा हो रहा है, जबकि पहले सार्वजनिक क्षेत्र में आरक्षण के जरिए सभी वर्गों को अवसर मिलता था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और निजी संस्थानों में प्रतिनिधित्व के मामले में असमानता बनी हुई है। उन्होंने बजट पेश करने के दौरान खड़े 11 अधिकारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनमें दलित या पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं दिखता।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, कि निजीकरण, शिक्षा संस्थानों, अस्पतालों और कॉरपोरेट सेक्टर में भी समान अवसरों की कमी है और आदिवासी समुदाय को उचित भागीदारी नहीं मिल रही है। उनका कहना था कि जब तक सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान अवसर सुनिश्चित नहीं होंगे, तब तक वास्तविक विकास अधूरा रहेगा।

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