कई रातें खाली पेट कार में सोकर गुजारा करते थे: स्नेहल राय - Update Now News

कई रातें खाली पेट कार में सोकर गुजारा करते थे: स्नेहल राय

 

मुंबई । हालिया इंटरव्यू में इश्क का रंग सफेद एक्ट्रेस स्नेहल राय ने घरेलू हिंसा और अपने स्ट्रगल पर बात करते हुए कई बड़े खुलासे किए। स्नेहल राय ने एक बातचीत में बताया कि पहली बार 9 साल की उम्र में उन्होंने घरेलू हिंसा को देखा। उस उम्र में इस शब्द का मतलब भी नहीं पता होता था। ऐसी कई रातें थीं जब माता-पिता के बीच झगड़े के कारण हम खाली पेट कार में सोकर गुजारा करते थे।अपने बचपन की कड़वी यादों को शेयर किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी रातें गाड़ी में सोकर बीती। कितने दिन तक उन्होंने पानी पीकर गुजारा किया। ये सब माता पिता के बीच होने वाले झगड़े के चलते हुआ करता था। उनके पिता मां के साथ अक्सर मारपीट करते थे। इस वजह से एक दिन उनकी मां को बड़ा कदम उठाना पड़ा और उस घर से बच्चों को लेकर चॉल में रहने लगी। चॉल में रहकर उन्होंने खूब संघर्ष किया। एक्ट्रेस स्नेहल कहती हैं, मेरी मां हम बच्चों को इस झगड़े को एक खेल की तरह बताती थीं। चलो बच्चों आज हम कार में सोयेंगे। कई बार घर में खाना बनता था और कूड़ेदान में चला जाता था। क्योंकि कलेश के चलते कोई भी न खा पाता था न पी पाता था। मेरी मां के चेहरे पर चोट के निशान होते थे लेकिन वह बड़ी सी मुस्कान के साथ हमसे छुपा लेती थीं। इसलिए कभी समझ ही नहीं आया कि हमारी मां मार खा रही है… गालियां खा रही है। स्नेहल ने बताया कि बड़े होकर उन्होंने रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की ताकि घर की मदद हो सके। 16 साल की उम्र में उन्होंने सेलून में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की। फिर शाम की शिफ्ट में उन्होंने कॉल सेंटर की नौकरी पकड़ी। अब मुझे लगता है कि ये सही समय है जब मैं इन बातों को कह सकती हूं।स्नेहल ने बताया कि बहुत समय बाद मेरी मां ने एक बड़ा फैसला लिया कि वह पिता का घर छोड़ देंगी। उन्होंने मुझे और मेरी बहन को लिया और उस घर को छोड़ दिया। तब से हमारा नया संघर्ष शुरू हुआ। हम एक चॉल में रहने लगे। वो समय कितना दर्दनाक था मैं शब्दों में बता भी नहीं सकतीं। हमारे पास खाने को पैसे नहीं करता थे। मुझे अच्छे से याद है कि हम पानी पुरी वाले भैया को कहते थे कि बहुत मिर्च वाला बनाना ताकि हमें ज्यादा पानी पीना पड़े और हमारा पेट भर जाए। इस तरह हमने कई रातें सोकर काटी थीं। ये सुनने में बेशक एक हिंदी फिल्म की तरह लगता है लेकिन ये मेरी जिंदगी की असल कहानी है।

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Date : 01 April 2023 Posted By : EDITOR
कई रातें खाली पेट कार में सोकर गुजारा करते थे: स्नेहल राय
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मुंबई । हालिया इंटरव्यू में इश्क का रंग सफेद एक्ट्रेस स्नेहल राय ने घरेलू हिंसा और अपने स्ट्रगल पर बात करते हुए कई बड़े खुलासे किए। स्नेहल राय ने एक बातचीत में बताया कि पहली बार 9 साल की उम्र में उन्होंने घरेलू हिंसा को देखा। उस उम्र में इस शब्द का मतलब भी नहीं पता होता था। ऐसी कई रातें थीं जब माता-पिता के बीच झगड़े के कारण हम खाली पेट कार में सोकर गुजारा करते थे।अपने बचपन की कड़वी यादों को शेयर किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी रातें गाड़ी में सोकर बीती। कितने दिन तक उन्होंने पानी पीकर गुजारा किया। ये सब माता पिता के बीच होने वाले झगड़े के चलते हुआ करता था। उनके पिता मां के साथ अक्सर मारपीट करते थे। इस वजह से एक दिन उनकी मां को बड़ा कदम उठाना पड़ा और उस घर से बच्चों को लेकर चॉल में रहने लगी। चॉल में रहकर उन्होंने खूब संघर्ष किया। एक्ट्रेस स्नेहल कहती हैं, मेरी मां हम बच्चों को इस झगड़े को एक खेल की तरह बताती थीं। चलो बच्चों आज हम कार में सोयेंगे। कई बार घर में खाना बनता था और कूड़ेदान में चला जाता था। क्योंकि कलेश के चलते कोई भी न खा पाता था न पी पाता था। मेरी मां के चेहरे पर चोट के निशान होते थे लेकिन वह बड़ी सी मुस्कान के साथ हमसे छुपा लेती थीं। इसलिए कभी समझ ही नहीं आया कि हमारी मां मार खा रही है… गालियां खा रही है। स्नेहल ने बताया कि बड़े होकर उन्होंने रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की ताकि घर की मदद हो सके। 16 साल की उम्र में उन्होंने सेलून में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की। फिर शाम की शिफ्ट में उन्होंने कॉल सेंटर की नौकरी पकड़ी। अब मुझे लगता है कि ये सही समय है जब मैं इन बातों को कह सकती हूं।स्नेहल ने बताया कि बहुत समय बाद मेरी मां ने एक बड़ा फैसला लिया कि वह पिता का घर छोड़ देंगी। उन्होंने मुझे और मेरी बहन को लिया और उस घर को छोड़ दिया। तब से हमारा नया संघर्ष शुरू हुआ। हम एक चॉल में रहने लगे। वो समय कितना दर्दनाक था मैं शब्दों में बता भी नहीं सकतीं। हमारे पास खाने को पैसे नहीं करता थे। मुझे अच्छे से याद है कि हम पानी पुरी वाले भैया को कहते थे कि बहुत मिर्च वाला बनाना ताकि हमें ज्यादा पानी पीना पड़े और हमारा पेट भर जाए। इस तरह हमने कई रातें सोकर काटी थीं। ये सुनने में बेशक एक हिंदी फिल्म की तरह लगता है लेकिन ये मेरी जिंदगी की असल कहानी है।

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