Strikes Add Fuel to the Fire of Rising Inflation Public Fears

बढ़ती महंगाई की आग में हड़तालों का घी: जनता को दोहरी मार की आशंका

बढ़ती महंगाई की आग में हड़तालों का घी: जनता को दोहरी मार की आशंका

आज भारतीय कैमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठन और टैक्सी यूनियन की हड़ताल

नई दिल्ली । देश में आसमान छूती महंगाई ने आम आदमी की कमर पहले ही तोड़ दी है, लेकिन अब जरूरी सेवाओं से जुड़ी दो बड़ी हड़तालों ने जनता की मुश्किलें और बढ़ाने की आशंका बन गई है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बेतहाशा बढ़ती कीमतों से जूझ रहे लोगों के लिए दवाइयों और परिवहन सेवाओं का संकट बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में लोगों को सफर से लेकर दवाइयों तक के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
बात दें कि अखिल भारतीय कैमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठन ने 20 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है। करीब 12.4 लाख दवा विक्रेताओं के संगठन ने मोदी सरकार से दो महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं-जीएसआर 817 और जीएसआर 220 को वापस लेने की मांग कर रहा है। संगठन का आरोप है कि इन नियमों की आड़ में ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना सख्त निगरानी के काम कर रही हैं, इससे गलत और फर्जी पर्चियों पर दवाइयां बिकने का खतरा बढ़ गया है। दवा दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। जीएसआर 817 करीब आठ वर्ष पहले ऑनलाइन फॉर्मेसी के लिए तैयार किया गया मसौदा था, जबकि जीएसआर 220 कोविड महामारी के दौरान घर तक दवाइयां पहुंचाने की अस्थायी व्यवस्था थी, जिनका अब ऑनलाइन कंपनियां दुरुपयोग कर रही हैं।
वहीं, दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी और ऑटो चालक संगठनों ने भी 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा कर दी है। उनकी मुख्य मांग बढ़ती ईंधन कीमतों और परिचालन लागत को देखकर किराए में तत्काल वृद्धि करना है। चालकों का तर्क है कि बीते करीब 15 वर्षों से किराए में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है, जबकि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। साथ ही, वाहन रखरखाव, बीमा और परमिट जैसी लागतें भी आसमान छू रही हैं। चालक शक्ति संघ सहित कई संगठनों ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तब आंदोलन और तेज होगा। 23 मई को दिल्ली सचिवालय के बाहर बड़े प्रदर्शन की भी योजना है। टैक्सी चालकों ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऑनलाइन टैक्सी कंपनियों पर भी मनमाना किराया वसूलने और चालकों का आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ईंधन कीमतें बढ़ने के बावजूद चालकों को मिलने वाले भुगतान में पर्याप्त वृद्धि नहीं की जाती।
गौरतलब है कि देश में ईंधन कीमतों में हाल ही में फिर वृद्धि हुई है, जिसके तहत पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल लगभग 99 रुपये और डीजल 92 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है, जिससे परिवहन लागत पर सीधा असर पड़ रहा है। यह वृद्धि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये हड़तालें व्यापक रूप से सफल रहीं, तब लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। एक ओर यात्रा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी, वहीं दूसरी ओर दवाइयों की आपूर्ति में भी बाधा आ सकती है। नियमित दवाइयां लेने वाले मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वे पहले से अपनी दवाइयां खरीदकर रख लें।

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