तकनीक केवल कार्य को समाप्त नहीं करती, बल्कि उसके स्वरूप को बदलती है: PM मोदी
तकनीक केवल कार्य को समाप्त नहीं करती, बल्कि उसके स्वरूप को बदलती है: PM मोदी
शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित ना रहे एआई, इसका लाभ सभी लोगों तक पहुंचे
नई दिल्ली । पीएम नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को मानव-केंद्रित बनाने को लेकर कहा कि इस तकनीक के लाभ सभी लोगों तक पहुंचने चाहिए, न कि केवल शुरुआती उपयोगकर्ताओं तक सीमित रहना चाहिए। उन्होंने यह बात बुधवार को एक इंटरव्यू के दौरान कही, जिसमें आगामी एआई इम्पैक्ट समिट पर चर्चा की गई। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सोच में भारत के लिए एआई की रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है- सार्वभौमिकता, समावेशिता और नवाचार। उनका मानना है कि भारत को केवल एआई का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं बल्कि इसे बनाने और विकसित करने वाला शीर्ष तीन देशों में शामिल होना चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी ने युवाओं की चिंता को समझते हुए कहा कि एआई के कारण रोजगार के स्वरूप में बदलाव होना एक वास्तविक चिंता है। उन्होंने कहा कि तैयारी ही भय का सबसे अच्छा इलाज है। इसी कारण हम अपने लोगों को एआई-उन्मुख भविष्य के लिए कौशल और पुनःकौशल प्रशिक्षण दे रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक केवल कार्य को समाप्त नहीं करती, बल्कि उसके स्वरूप को बदलती है और नई तरह की नौकरियां पैदा करती है। पीएम मोदी ने एआई को एक “शक्ति-वर्धक” के रूप में देखा, जो मानव क्षमताओं को नए स्तर तक बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन से भारत की अर्थव्यवस्था में नई तकनीकी नौकरियां भी उत्पन्न होंगी।
एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के विषय को उन्होंने लोग, ग्रह और प्रगति के रूप में बताया और कहा कि एआई का उद्देश्य केवल नवाचार नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों तक लाभ पहुंचाना होना चाहिए। मोदी ने कहा कि एआई सिस्टम ज्ञान और डेटा पर आधारित होते हैं जो पूरी दुनिया में उत्पन्न होते हैं। इसलिए इसके लाभ केवल कुछ विशेष लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि एआई इम्पैक्ट समिट-2026 पहली बार ग्लोबल साउथ में आयोजित किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य उन आवाजों और विकास प्राथमिकताओं को बढ़ावा देना है जो अक्सर कम प्रतिनिधित्व वाली रहती हैं। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, विरासत संरक्षण और अन्य क्षेत्रों में एआई के अनुप्रयोग पर उदाहरण देते हुए बताया कि अमूल ने एआई का इस्तेमाल कर 36 लाख महिला डेयरी किसानों को उनके गांवों में पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता संबंधी मार्गदर्शन दिया। मोदी ने कहा कि जहां पूरी दुनिया एआई के कारण असमानताओं की चिंता कर रही है, भारत इसे कम करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एहतियात और मानव नियंत्रण पर जोर देते हुए कहा कि एआई का इस्तेमाल मानव क्षमता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि निर्णय लेने में इसे पूर्ण रूप से शामिल करने के लिए। उन्होंने इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने एथिकल और सुरक्षित एआई के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एआई के संभावित खतरों और नुकसान से बचने के लिए दुनिया भर में एक साझा समझ विकसित करना जरुरी है। इसमें मानव निगरानी, सुरक्षा-डिज़ाइन, पारदर्शिता और गहरी नकली सामग्री, अपराध और आतंकवाद में एआई के इस्तेमाल पर रोक जैसे सिद्धांत शामिल होने चाहिए। पीएम मोदी ने निष्कर्ष में यह कहा कि भारत का दृष्टिकोण स्थानीय जोखिमों और सामाजिक वास्तविकताओं पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को सभी के लिए सुरक्षित और समावेशी बनाते हुए नवाचार को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।
