The news of the death of fugitive Nithyananda created a stir

खुद को संत बताने वाले भगोड़े नित्यानंद की मौत की खबर से मची हलचल

खुद को संत बताने वाले भगोड़े नित्यानंद की मौत की खबर से मची हलचल

किसी ने अप्रैल फूल तो कुछ ने इसे प्रचार का हथकंडा बताया
नई दिल्ली । खुद को संत बताने वाले और भारत के भगोड़े नित्यानंद की मौत की अफवाहों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। अब इन अफवाहों के जवाब में, नित्यानंद द्वारा स्थापित कैलासा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों का खंडन किया है। बयान में कहा गया है कि नित्यानंद स्वस्थ, सुरक्षित और सक्रिय हैं और हाल ही में उन्होंने एक धार्मिक आयोजन में भी हिस्सा लिया था।
अफवाहों का दौर और कैलासा का जवाब 1 अप्रैल को कई समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें स्वामी नित्यानंद की मौत होना बताया गया था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उनके भतीजे सुंदरेश्वर ने ही उसकी मृत्यु की घोषणा की थी, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। इन खबरों के बाद कैलासा की ओर से एक बयान जारी किया गया, जिसमें इन अफवाहों को दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक बताया है। बयान में कहा गया है कि नित्यानंद ने 30 मार्च, 2025 को उगादी उत्सव के एक लाइव-स्ट्रीम कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जिसका लिंक भी शेयर किया गया। कैलासा के प्रवक्ता ने कहा कि कई मीडिया आउटलेट्स ने जानबूझकर यह झूठ फैलाया कि नित्यानंद ने अपनी देह त्याग दी है। हम स्पष्ट रूप से घोषणा करते हैं कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने आध्यात्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।
बता दें नित्यानंद का विवादित इतिहास नित्यानंद का असली नाम राज शेखरन है और वह एक विवादास्पद स्वघोषित संत हैं। नित्यानंद 2019 में भारत से भाग गया था। उस पर बलात्कार, यौन शोषण और बच्चों के अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। कैलासा का दावा और अंतरराष्ट्रीय विवाद नित्यानंद ने दावा किया था कि कैलासा दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर के पास एक द्वीप पर स्थित है, लेकिन इसकी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। उसके संगठन ने यूएन में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की थी। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने इसे मान्यता नहीं दी।
कुछ लोगों ने नित्यानंद की मौत की खबर को अप्रैल फूल के मजाक से जोड़ा, तो कुछ ने इसे नित्यानंद के प्रचार का एक और हथकंडा बताया। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, नित्यानंद मरे या जिंदा हो, उसके कैलासा का सच सामने आना चाहिए। यह सब एक ढोंग लगता है। नित्यानंद की वास्तविक स्थिति और उनके ठिकाने के बारे में अभी भी रहस्य बना हुआ है। भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं, लेकिन वह अब कानून की पकड़ से बाहर हैं।

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Date : 03 April 2025 Posted By : EDITOR
खुद को संत बताने वाले भगोड़े नित्यानंद की मौत की खबर से मची हलचल
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खुद को संत बताने वाले भगोड़े नित्यानंद की मौत की खबर से मची हलचल

किसी ने अप्रैल फूल तो कुछ ने इसे प्रचार का हथकंडा बताया
नई दिल्ली । खुद को संत बताने वाले और भारत के भगोड़े नित्यानंद की मौत की अफवाहों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। अब इन अफवाहों के जवाब में, नित्यानंद द्वारा स्थापित कैलासा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों का खंडन किया है। बयान में कहा गया है कि नित्यानंद स्वस्थ, सुरक्षित और सक्रिय हैं और हाल ही में उन्होंने एक धार्मिक आयोजन में भी हिस्सा लिया था।
अफवाहों का दौर और कैलासा का जवाब 1 अप्रैल को कई समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें स्वामी नित्यानंद की मौत होना बताया गया था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उनके भतीजे सुंदरेश्वर ने ही उसकी मृत्यु की घोषणा की थी, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। इन खबरों के बाद कैलासा की ओर से एक बयान जारी किया गया, जिसमें इन अफवाहों को दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक बताया है। बयान में कहा गया है कि नित्यानंद ने 30 मार्च, 2025 को उगादी उत्सव के एक लाइव-स्ट्रीम कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जिसका लिंक भी शेयर किया गया। कैलासा के प्रवक्ता ने कहा कि कई मीडिया आउटलेट्स ने जानबूझकर यह झूठ फैलाया कि नित्यानंद ने अपनी देह त्याग दी है। हम स्पष्ट रूप से घोषणा करते हैं कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने आध्यात्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।
बता दें नित्यानंद का विवादित इतिहास नित्यानंद का असली नाम राज शेखरन है और वह एक विवादास्पद स्वघोषित संत हैं। नित्यानंद 2019 में भारत से भाग गया था। उस पर बलात्कार, यौन शोषण और बच्चों के अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। कैलासा का दावा और अंतरराष्ट्रीय विवाद नित्यानंद ने दावा किया था कि कैलासा दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर के पास एक द्वीप पर स्थित है, लेकिन इसकी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। उसके संगठन ने यूएन में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की थी। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने इसे मान्यता नहीं दी।
कुछ लोगों ने नित्यानंद की मौत की खबर को अप्रैल फूल के मजाक से जोड़ा, तो कुछ ने इसे नित्यानंद के प्रचार का एक और हथकंडा बताया। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, नित्यानंद मरे या जिंदा हो, उसके कैलासा का सच सामने आना चाहिए। यह सब एक ढोंग लगता है। नित्यानंद की वास्तविक स्थिति और उनके ठिकाने के बारे में अभी भी रहस्य बना हुआ है। भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं, लेकिन वह अब कानून की पकड़ से बाहर हैं।

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