US and Iran sign peace agreement a new chapter of

अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर, मध्य पूर्व में शांति का नया अध्याय

अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर, मध्य पूर्व में शांति का नया अध्याय

जिनेवा । मध्य पूर्व में दशकों से चले आ रहे तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक अभूतपूर्व और युगांतकारी सफलता मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो दोनों देशों के बीच जारी युद्ध और गहरे मतभेदों को पूरी तरह से खत्म करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बुधवार को एक समझौता ज्ञापन पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए, जिसने महीनों के खूनी संघर्ष और गहन कूटनीतिक वार्ताओं के बाद क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगाई है।
इस समझौते की नींव बीते रविवार को ही रख दी गई थी, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बकर कलीबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस पर शुरुआती हस्ताक्षर किए थे। इस महत्वपूर्ण क्षण के गवाह स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बने थे, जो इस बात का संकेत था कि दोनों देश इस दिशा में कितनी गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं। यह प्रारंभिक हस्ताक्षर राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति का प्रतीक था।
बुधवार को, इस समझौते को विश्व के सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर औपचारिक और कानूनी रूप से सुदृढ़ करते हुए, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने व्यक्तिगत रूप से इस पर मुहर लगाई। राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पेजेशकियन के हस्ताक्षर ने न केवल इस शांति प्रक्रिया को वैध बनाया, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आधार भी प्रदान किया। एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के लिए एक नया सवेरा बताया।
हस्ताक्षर समारोह से पहले बुधवार शाम को, अमेरिका ने शांति समझौते का मसौदा पेश किया, जिसके अहम बिंदुओं को पत्रकारों के समक्ष रखा गया। इस मसौदे से संकेत मिला कि ईरान को बड़ी रियायतें मिल सकती हैं, जो उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर प्रदान करेंगी। उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन द्वारा डील पर हस्ताक्षर करने की संभावना पर मुहर लगाई थी, हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि इस पर अभी विचार-विमर्श जारी है। यह समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड में अंतिम रूप से संपन्न होने की उम्मीद है।
समझौते की बड़ी बातें

– एक-दूसरे की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे
– लेबनान सहित अन्य सभी टकराव वाले मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम
– अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटेगी और ईरान मामलों में उसका दखल नहीं होगा
– 60 दिनों में अंतिम समझौते पर सहमति। सहमति से इस समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है
– 30 दिनों में होर्मुज से पोतों की आवाजाही बहाल करना
– अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान को 300 अरब डॉलर की विकास योजना की पेशकश
– अमेरिका, ईरान पर लागू सभी तरह के प्रतिबंधों हटाएगा
– ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संवर्धित यूरेनियम पर अंतिम समझौते से पहले बात होगी

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