NIA ने यासीन मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग की, दिल्ली हाईकोर्ट में 29 मई को सुनवाई - Update Now News

NIA ने यासीन मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग की, दिल्ली हाईकोर्ट में 29 मई को सुनवाई

 

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख और प्रमुख कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की खंडपीठ 29 मई को याचिका पर सुनवाई करने वाली है। मई 2022 में मलिक, जिसे 2017 के टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया है, को यहां की एक विशेष एनआईए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत फैसला सुनाया था जो साथ-साथ और यह आजीवन चलेगी। पिछले साल पटियाला हाउस कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच टेरर फंडिंग मामले में अपराधों की सजा सुनाई गई थी। पिछले साल निचली अदालत में सुनवाई के दौरान मलिक ने कहा था, मैं किसी भी चीज की भीख नहीं मांगूंगा। मामला इस अदालत के समक्ष है और मैं इसका फैसला अदालत पर छोड़ता हूं। उसने अदालत में कहा था, ‘अगर मैं 28 साल में किसी आतंकवादी गतिविधि या हिंसा में शामिल रहा हूं, अगर भारतीय खुफिया तंत्र इसे साबित करता है, तो मैं भी राजनीति से संन्यास ले लूंगा। मैं फांसी स्वीकार कर लूंगा.. मैंने सात प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है।’ एनआईए ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के लिए आरोपी जिम्मेदार है। जांच एजेंसी ने मलिक के लिए मौत की सजा का भी तर्क दिया था। दूसरी ओर न्यायमित्र ने मामले में न्यूनतम सजा के तौर पर आजीवन कारावास की मांग की थी।

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Date : 27 May 2023 Posted By : EDITOR
NIA ने यासीन मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग की, दिल्ली हाईकोर्ट में 29 मई को सुनवाई
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख और प्रमुख कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की खंडपीठ 29 मई को याचिका पर सुनवाई करने वाली है। मई 2022 में मलिक, जिसे 2017 के टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया है, को यहां की एक विशेष एनआईए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत फैसला सुनाया था जो साथ-साथ और यह आजीवन चलेगी। पिछले साल पटियाला हाउस कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच टेरर फंडिंग मामले में अपराधों की सजा सुनाई गई थी। पिछले साल निचली अदालत में सुनवाई के दौरान मलिक ने कहा था, मैं किसी भी चीज की भीख नहीं मांगूंगा। मामला इस अदालत के समक्ष है और मैं इसका फैसला अदालत पर छोड़ता हूं। उसने अदालत में कहा था, 'अगर मैं 28 साल में किसी आतंकवादी गतिविधि या हिंसा में शामिल रहा हूं, अगर भारतीय खुफिया तंत्र इसे साबित करता है, तो मैं भी राजनीति से संन्यास ले लूंगा। मैं फांसी स्वीकार कर लूंगा.. मैंने सात प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है।' एनआईए ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के लिए आरोपी जिम्मेदार है। जांच एजेंसी ने मलिक के लिए मौत की सजा का भी तर्क दिया था। दूसरी ओर न्यायमित्र ने मामले में न्यूनतम सजा के तौर पर आजीवन कारावास की मांग की थी।

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