High Court Major Ver Dhar Bhojshala Court Declares Is a Temple

धार भोजशाला पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला… अदालत ने कहा- यह मंदिर है, माता वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर

धार भोजशाला पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला… अदालत ने कहा- यह मंदिर है, माता वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर

indore: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने हिंदू पक्ष की दलीलें स्वीकार करते हुए मुस्लिम पक्ष के दलीलों को खारिज कर दिया है. हाई कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला (Bhojshala Final Verdict) सुनाते हुए भोजशाला को मंदिर माना और स्पष्ट किया है कि विवादित स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की परंपरा और निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है. अदालत ने अपने निष्कर्ष में दर्ज किया कि ऐतिहासिक साहित्य और रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि यह क्षेत्र “भोजशाला” ही था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता था. बेंच ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह भी रेखांकित किया कि 18 मार्च 1904 से यह विवादित क्षेत्र अधिनियम 1958 के तहत एक संरक्षित स्मारक है, जिसका धार्मिक स्वरूप देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर सहित ‘भोजशाला’ के रूप में स्थापित है.
एएसआई सर्वे और अयोध्या मामले की मिसाल
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए अध्ययनों और वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पर पूरी तरह से भरोसा जताया है. कोर्ट ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों की प्रकृति और अयोध्या मामले में स्थापित कानूनी मिसालों के आधार पर एएसआई के निष्कर्षों को सुरक्षित रूप से आधार माना जा सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ एएसआई की अधिसूचनाएं यह प्रमाणित करती हैं कि यह स्थान मूल रूप से संस्कृत शिक्षण और हिंदू उपासना का केंद्र रहा है. इसी आधार पर कोर्ट ने अब पूरे परिसर में हिंदुओं को पूजा करने का पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिया है.

प्रशासन और प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश
न्यायालय ने केंद्र सरकार और एएसआई को महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि धार स्थित इस विवादित संपत्ति के अंतर्गत भोजशाला मंदिर और संस्कृत शिक्षण के उद्देश्यपूर्ण प्रशासन एवं प्रबंधन के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाएं. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि एएसआई इस संपत्ति का समग्र प्रशासन पूर्व की भांति जारी रखेगा. अदालत ने अपने रुख में यह भी जोड़ा कि यदि मुस्लिम पक्ष चाहे, तो वह अपने लिए सरकार से अलग से जमीन की मांग कर सकते हैं, जिससे विवाद का एक संतुलित समाधान निकल सके.

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