खामेनेई की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, भावुक हुए दिग्गज नेता
खामेनेई की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, भावुक हुए दिग्गज नेता
तेहरान। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए देश-विदेश से गणमान्य व्यक्तियों और हजारों की संख्या में नागरिकों का सैलाब उमड़ पड़ा है। यह एक ऐसा क्षण है जिसने पूरे ईरान को शोक और भावुकता में डुबो दिया है, और इस दौरान देश के शीर्ष नेताओं की आंखें भी नम हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ को फूट-फूटकर रोते हुए देखा गया, जो देश के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक व्यक्ति के निधन पर राष्ट्रव्यापी दुख का प्रतीक था।
आयतुल्लाह अली खामेनेई, जिन्होंने पिछले तीन दशकों से ईरान का नेतृत्व किया था, का अंतिम संस्कार 3 से 9 जुलाई तक चलने वाले एक विस्तृत कार्यक्रम के तहत किया गया। उनके अंतिम विदाई समारोह में ईरानी नेताओं के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य भी शामिल थे, जिन्होंने शोक संतप्त राष्ट्र को अपना गहरा दुख व्यक्त किया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी कई देशों के मेहमानों ने ईरान पहुंचकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्केरिटा ने विशेष प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। खामेनेई का निधन 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमलों के पहले दिन हुआ था, जिसने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया था। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस दुखद अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। तेहरान के राज्यपाल मोहम्मद सादेग मोतामदियान ने इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजामों की पुष्टि की, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और शोक का माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। इस बीच, ईरान के शक्तिशाली सुरक्षा बल इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रमुख अहमद वाहिदी ने एक कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत का बदला लिया जाएगा और ईरान के आत्मसमर्पण का सपना उसके दुश्मनों के लिए एक सपना ही रह जाएगा। वाहिदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश गहरे शोक में डूबा है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की भविष्य की दिशा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस अंतिम विदाई समारोह ने न केवल खामेनेई के विशाल प्रभाव को प्रदर्शित किया, बल्कि ईरान के भविष्य और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों को भी रेखांकित किया।
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