Defence is an identity Daisy Shah directed by Darshana Govani

रक्षा: एक पहचान – डेज़ी शाह ने निदर्शना गोवानी संग मनाया सपनों और सम्मान का राखी महोत्सव

रक्षा: एक पहचान – डेज़ी शाह ने निदर्शना गोवानी संग मनाया सपनों और सम्मान का राखी महोत्सव

Mumbai: हौसले और अपनापन को सलाम करते हुए, रक्षा: एक पहचान (प्रस्तुत: कमला अंकिबाई घमंडी राम गोवानी ट्रस्ट, सहयोग: मल्टीवर्स मनोरंजन) एक ऐसे जज़्बाती और दिल को छू लेने वाले जश्न के रूप में सजा, जहां महत्वाकांक्षा, भावना और इंसानी जज़्बे की महक बिखरी हुई थी। इस अनोखे आयोजन की कल्पना की थी श्रीमती निदर्शना गोवानी ने।
कार्यक्रम में छह खास मेहमान शामिल हुए जिनमें विशेष योग्यता वाले नायक और कैंसर योद्धा थे। शुरुआत एक दिल को छू लेने वाली चर्चा से हुई, जिसमें इन सभी की संघर्ष, गरिमा और प्रेरणा से भरी यात्राओं की कहानी बयां हुई। असल में, इस आयोजन ने राखी का मतलब सिर्फ रिश्तों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सपनों की हिफ़ाज़त और अनसुनी कहानियों को उजागर करने का वादा बना दिया।
आयोजन की प्रेरक शक्ति, श्रीमती निदर्शना गोवानी ने कहा, “रक्षा सिर्फ रिश्तों की नहीं, बल्कि महत्वाकांक्षा की हिफ़ाज़त, पहचान का जश्न और अनसुने लोगों को ताक़त देने का नाम है।”
मुख्य अतिथि अभिनेत्री डेज़ी शाह बच्चों और प्रस्तुतियों से भावुक होकर बोलीं, “ज़िंदगी में हम सभी मुश्किलों से गुज़रते हैं, लेकिन इन बच्चों को देखकर, जिनके चेहरे खुशी और हौसले से चमक रहे थे, एहसास हुआ कि अपूर्णता में भी एक अद्भुत पूर्णता है। यह सचमुच प्रेरणादायक है।”
इसके अलावा, फ़िल्म अंदाज़ 2 के सितारे आयुष और अकैशा भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, “हमारी फ़िल्म कल रिलीज़ हो रही है, लेकिन यहां इतनी पवित्र ऊर्जा और खुशियों से घिर जाना एक वरदान जैसा था। इसने हमारा नज़रिया बदल दिया।”
शाम की सबसे यादगार झलक थी जॉयफुल कॉयर का गीत शंकर महादेवन अकादमी, जय वकील फाउंडेशन और बिलीव इंडिया फाउंडेशन का संयुक्त प्रयास। उनका वन वर्ल्ड (एक दुनिया) गीत, जो एकता और अपनापन का संदेश देता है, सुनकर कई आंखें नम हो गईं। इसके अलावा, बच्चों ने संगीत और नृत्य की चार शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिनमें हर एक ने अपनी अनूठी पहचान और जज़्बाती ताक़त का जश्न मनाया।
रक्षा: एक पहचान सिर्फ एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह याद दिलाने वाला संदेश था कि हर इंसान सम्मान के क़ाबिल है, हर सपना सुरक्षा का हक़दार है और अपनापन केवल शब्द नहीं, बल्कि जीने का तरीक़ा होना चाहिए।

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