treatment of covid-19

VINCOV-19: कोविड-19 के इलाज में कारगर है यह  एंटी डॉट, क्लीनिकल ट्रायल का फेज 2 सफल

 

VINCOV-19: कोविड-19 के इलाज में कारगर है यह  एंटी डॉट, क्लीनिकल ट्रायल का फेज 2 सफल

VINCOV-19, सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) और हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) के सहयोग से VINS बायो प्रोडक्ट द्वारा विकसित किया गया है। यह COVID-19 के खिलाफ पहला एंटी डॉट है और इसने कई केंद्रों में फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया है।

हैदराबाद : वीआईएनएस बायो प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) और हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) के सहयोग से VINCOV-19 के फेज  2 क्लीनिकल ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा की है।  वीआईएनएस बायो प्रोडक्ट  हैदराबाद स्थित एक प्रमुख इम्यूनोलॉजिकल कंपनी है. VINCOV-19, भारत का पहला एंटी डॉट और SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ एक इलाज है। VINCOV-19 अब बाजार प्राधिकरण के लिए और एक साथ क्लीनिकल ट्रायल के फेज 3 के लिए तैयार है।

कई केंद्रों में क्लिनिकल ट्रायल

फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल भारत में कई केंद्रों में आयोजित किए गए और इसमें 200 से अधिक मरीज शामिल थे। फेज 2 के ट्रायल में ओमाइक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ भी एंटी डॉट का परीक्षण किया गया, ताकि वायरस और उसके म्यूटेशन के खिलाफ अधिकतम कवरेज सुनिश्चित किया जा सके.

मरीजों पर दिखा बेहतर असर

फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल सितंबर 2022 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस फेज में, VINCOV-19 का COVID-19 की मध्यम गंभीरता वाले मरीजों पर परीक्षण किया गया था। मरीजों के एक ग्रुप को मानक देखभाल (SoC) के साथ VINCOV-19 दिया गया, और दूसरे ग्रुप को केवल मानक देखभाल (SoC) दिया गया। VINCOV-19 ने फेज 2 परीक्षणों में बेहतर  सुरक्षा प्रोफाइल दिखाई। VINCOV-19 लेने वाले मरीजों की क्लीनिकल कंडीशन में अच्छा सुधार हुआ।

वायरस को बेअसर करने की क्षमता

VINCOV-19 में COVID-19 वायरस के खिलाफ इक्वाइन पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी (EpAbs) शामिल हैं। VINCOV-19 में अत्यधिक शुद्ध F (ab’) 2 एंटीबॉडी टुकड़े होते हैं, जिनमें SARS-CoV-2 वायरस को बेअसर करने की उच्च क्षमता होती है। एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने से फेफड़ों की कोशिकाओं में SARS-CoV-2 के प्रवेश को ब्लॉक किया जा सकता है, इसलिए यह माना गया कि अगर बीमारी के शुरूआती फेज में मरीजों को यह दिया गया तो उन्हें बेहतर क्लीनिकल लाभ मिलेगा।

पहले तरह का चिकित्सीय एंटीबॉडी

सीएसआईआर-सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी), हैदराबाद के डायरेक्टर डॉ. विनय के. नंदीकूरी ने चरण 2 क्लिनिकल परीक्षण के सफलता पर कहा कि हमें VINS, CCMB और UOH के आपसी सहयोग पर बहुत गर्व है। ये भारत में अपने आप में पहले तरह का चिकित्सीय एंटीबॉडी है और दुनिया के कुछ ही देशों में उपलब्ध है। विशेष रूप से COVID के गंभीर क्लीनिकल मामलों के लिए चिकित्सीय एंटीबॉडी सहित कई विकल्पों का होना आवश्यक है। यह एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच भविष्य के लक्षित सहयोग के लिए एक बड़ा कदम है।

एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच सहयोग

हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी जे राव ने भी टीम के सदस्यों को VINCOV-19 के लिए फेज 2 परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने एक साल से भी कम समय में लाभकारी परिणाम देने वाले 3 सहयोगी संगठनों में उपलब्ध तकनीकी और ढांचागत ताकत की सराहना करते हुए इस एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच सहयोग पर खुशी जताई।

अनिश्चितताओं पर काबू

CCMB में डॉ कृष्णन एच हर्षन के नेतृत्व में टीम ने अप्रैल 2020 में SARS-CoV-2 को अलग कर दिया, जिससे यह सफल सहयोग हुआ। उनके ग्रुप ने वायरस, एंटीजन और वायरल न्यूट्रलाइजेशन एसेज के लक्षणों की स्टडी का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि हमने इस उत्पाद के विकास से संबंधित सभी अनिश्चितताओं पर काबू पा लिया। हम क्लीनिकल ट्रायल में इसकी सफलता को देखकर उत्साहित हैं।

महामारी से लड़ने में और ताकतवर

हैदराबाद विश्वविद्यालय टीम का नेतृत्व डॉ. नूरुद्दीन खान कर रहे हैं। वह डिपज्ञर्टमेंट ऑफ एनिमल बायोलॉजी, स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, हैदराबाद विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। डॉ खान इम्यूनोलॉजी और वैक्सीनोलॉजी के क्षेत्र में माहिर हैं। इम्यूनोलॉजिकल स्टडी में उनकी विशेषज्ञता ने क्लीनिकल ट्रायल के दौरान VINCOV19 की सफलता में मदद की। डॉ. खान ने कहा कि VINCOV-19 एकेडमिक-इंडस्ट्री के बेहतर सहयोग का परिणाम है, जो यह दिखाता है कि हम महामारी से लड़ने में पहले से ताकतवर हुए हैं।

मरीजों के जल्दी ठीक करने में कारगर

VINS बायो प्रोडक्ट्स लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सिद्धार्थ डागा ने कहा कि VINCOV-19 के फेज 2 क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं। VINCOV-19 इस मामले में सुरक्षित साबित हुआ है और यह COVID-19 से पीड़ित मरीजों के जल्दी ठीक करने में कारगर है। VINS बायो द्वारा VINCOV19 का विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम है. यह तीन भागीदारों के बीच सहयोग के लिए सही दिशा में एक कदम है। हम स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों से हमें मार्केट अथॉराइजेशन की अनुमति देने का आग्रह करेंगे, ताकि हम COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत कर सकें।

किसकी क्या रही भूमिका

VINCOV-19 का विकास सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास के माध्यम से है, जिसने वायरल एंटीजन को विकसित करने में मदद की। हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) ने उत्पाद के लक्षणों को विस्तार से बताने में मदद की। जबकि VINS बायो प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने तेलंगाना में अपने आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट  में क्लीनिकल डेवलपमेंट और समान टीकाकरण का प्रबंधन किया।

 

 

 

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Date : 20 October 2022 Posted By : EDITOR
VINCOV-19: कोविड-19 के इलाज में कारगर है यह  एंटी डॉट, क्लीनिकल ट्रायल का फेज 2 सफल
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VINCOV-19: कोविड-19 के इलाज में कारगर है यह  एंटी डॉट, क्लीनिकल ट्रायल का फेज 2 सफल

VINCOV-19, सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) और हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) के सहयोग से VINS बायो प्रोडक्ट द्वारा विकसित किया गया है। यह COVID-19 के खिलाफ पहला एंटी डॉट है और इसने कई केंद्रों में फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया है।

हैदराबाद : वीआईएनएस बायो प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) और हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) के सहयोग से VINCOV-19 के फेज  2 क्लीनिकल ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा की है।  वीआईएनएस बायो प्रोडक्ट  हैदराबाद स्थित एक प्रमुख इम्यूनोलॉजिकल कंपनी है. VINCOV-19, भारत का पहला एंटी डॉट और SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ एक इलाज है। VINCOV-19 अब बाजार प्राधिकरण के लिए और एक साथ क्लीनिकल ट्रायल के फेज 3 के लिए तैयार है।

कई केंद्रों में क्लिनिकल ट्रायल

फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल भारत में कई केंद्रों में आयोजित किए गए और इसमें 200 से अधिक मरीज शामिल थे। फेज 2 के ट्रायल में ओमाइक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ भी एंटी डॉट का परीक्षण किया गया, ताकि वायरस और उसके म्यूटेशन के खिलाफ अधिकतम कवरेज सुनिश्चित किया जा सके.

मरीजों पर दिखा बेहतर असर

फेज 2 क्लिनिकल ट्रायल सितंबर 2022 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस फेज में, VINCOV-19 का COVID-19 की मध्यम गंभीरता वाले मरीजों पर परीक्षण किया गया था। मरीजों के एक ग्रुप को मानक देखभाल (SoC) के साथ VINCOV-19 दिया गया, और दूसरे ग्रुप को केवल मानक देखभाल (SoC) दिया गया। VINCOV-19 ने फेज 2 परीक्षणों में बेहतर  सुरक्षा प्रोफाइल दिखाई। VINCOV-19 लेने वाले मरीजों की क्लीनिकल कंडीशन में अच्छा सुधार हुआ।

वायरस को बेअसर करने की क्षमता

VINCOV-19 में COVID-19 वायरस के खिलाफ इक्वाइन पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी (EpAbs) शामिल हैं। VINCOV-19 में अत्यधिक शुद्ध F (ab') 2 एंटीबॉडी टुकड़े होते हैं, जिनमें SARS-CoV-2 वायरस को बेअसर करने की उच्च क्षमता होती है। एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने से फेफड़ों की कोशिकाओं में SARS-CoV-2 के प्रवेश को ब्लॉक किया जा सकता है, इसलिए यह माना गया कि अगर बीमारी के शुरूआती फेज में मरीजों को यह दिया गया तो उन्हें बेहतर क्लीनिकल लाभ मिलेगा।

पहले तरह का चिकित्सीय एंटीबॉडी

सीएसआईआर-सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी), हैदराबाद के डायरेक्टर डॉ. विनय के. नंदीकूरी ने चरण 2 क्लिनिकल परीक्षण के सफलता पर कहा कि हमें VINS, CCMB और UOH के आपसी सहयोग पर बहुत गर्व है। ये भारत में अपने आप में पहले तरह का चिकित्सीय एंटीबॉडी है और दुनिया के कुछ ही देशों में उपलब्ध है। विशेष रूप से COVID के गंभीर क्लीनिकल मामलों के लिए चिकित्सीय एंटीबॉडी सहित कई विकल्पों का होना आवश्यक है। यह एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच भविष्य के लक्षित सहयोग के लिए एक बड़ा कदम है।

एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच सहयोग

हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी जे राव ने भी टीम के सदस्यों को VINCOV-19 के लिए फेज 2 परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के प्रयासों के लिए बधाई दी। उन्होंने एक साल से भी कम समय में लाभकारी परिणाम देने वाले 3 सहयोगी संगठनों में उपलब्ध तकनीकी और ढांचागत ताकत की सराहना करते हुए इस एकेडमिक और इंडस्ट्री के बीच सहयोग पर खुशी जताई।

अनिश्चितताओं पर काबू

CCMB में डॉ कृष्णन एच हर्षन के नेतृत्व में टीम ने अप्रैल 2020 में SARS-CoV-2 को अलग कर दिया, जिससे यह सफल सहयोग हुआ। उनके ग्रुप ने वायरस, एंटीजन और वायरल न्यूट्रलाइजेशन एसेज के लक्षणों की स्टडी का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि हमने इस उत्पाद के विकास से संबंधित सभी अनिश्चितताओं पर काबू पा लिया। हम क्लीनिकल ट्रायल में इसकी सफलता को देखकर उत्साहित हैं।

महामारी से लड़ने में और ताकतवर

हैदराबाद विश्वविद्यालय टीम का नेतृत्व डॉ. नूरुद्दीन खान कर रहे हैं। वह डिपज्ञर्टमेंट ऑफ एनिमल बायोलॉजी, स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, हैदराबाद विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। डॉ खान इम्यूनोलॉजी और वैक्सीनोलॉजी के क्षेत्र में माहिर हैं। इम्यूनोलॉजिकल स्टडी में उनकी विशेषज्ञता ने क्लीनिकल ट्रायल के दौरान VINCOV19 की सफलता में मदद की। डॉ. खान ने कहा कि VINCOV-19 एकेडमिक-इंडस्ट्री के बेहतर सहयोग का परिणाम है, जो यह दिखाता है कि हम महामारी से लड़ने में पहले से ताकतवर हुए हैं।

मरीजों के जल्दी ठीक करने में कारगर

VINS बायो प्रोडक्ट्स लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सिद्धार्थ डागा ने कहा कि VINCOV-19 के फेज 2 क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं। VINCOV-19 इस मामले में सुरक्षित साबित हुआ है और यह COVID-19 से पीड़ित मरीजों के जल्दी ठीक करने में कारगर है। VINS बायो द्वारा VINCOV19 का विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम है. यह तीन भागीदारों के बीच सहयोग के लिए सही दिशा में एक कदम है। हम स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों से हमें मार्केट अथॉराइजेशन की अनुमति देने का आग्रह करेंगे, ताकि हम COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत कर सकें।

किसकी क्या रही भूमिका

VINCOV-19 का विकास सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास के माध्यम से है, जिसने वायरल एंटीजन को विकसित करने में मदद की। हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) ने उत्पाद के लक्षणों को विस्तार से बताने में मदद की। जबकि VINS बायो प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने तेलंगाना में अपने आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट  में क्लीनिकल डेवलपमेंट और समान टीकाकरण का प्रबंधन किया।

 

 

 

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