guru purnim guru bina gyaan nahin gyaan bina aatma nahin

Guru Purnima : गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं..

 

Guru Purnima – गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं..

गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं,
ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन है।

गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुओं एवं शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। सनातन धर्म में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है और गुरुओं को समर्पित एक प्रसिद्ध त्यौहार है गुरु पूर्णिमा। हिन्दू धर्म के साथ-साथ बौद्ध व जैन धर्म के लोग गुरु पूर्णिमा के उत्सव को हर्षोउल्लास से मनाते है। गुरु पूर्णिमा में गुरु शब्द का अर्थ शिक्षक से है।
गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्यों द्वारा अपने गुरु के प्रति आस्था को प्रकट किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन विधिवत रूप से गुरु पूजन किया जाता है। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता हैं। सामान्य शब्दों में गुरु वह इंसान होता हैं जो ज्ञान की गंगा बहाता हैं और हमारे जीवन को अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाता हैं। यह पर्व समूचे भारत में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
शिष्यों द्वारा आध्यात्मिक गुरुओं और अकादमिक शिक्षकों को नमन और धन्यवाद करने के लिए गुरु पूर्णिमा के पर्व को मनाया जाता है। सभी गुरु अपने शिष्यों की भलाई के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर देते है। हमेशा से आध्यात्मिक गुरु संसार में शिष्य और दुखी लोगों की सहायता करते आये हैं और ऐसे ही कई उदाहरण हमारे सामने मौजूद है जब गुरुओं ने अपने ज्ञान से अनेक दुखी लोगों की समस्याओं का निवारण किया है।
स्वामी विवेकानंद और गुरु नानक ऐसे ही गुरु थे जिन्होंने हमेशा संसार की भलाई के लिए काम किया हैं। गुरु पूर्णिमा को भारत के अतिरिक्त भूटान और नेपाल आदि देशों में भी मनाया जाता है। हमारे देश की गुरु-शिष्य परंपरा भारत से चलकर दूसरे देशों में गई है। हमेशा से ही आध्यात्मिक गुरु प्रवास पर रहते थे और इसी प्रवास के कारण भारत की ये परम्पराएं दूसरे देशों में भी फैली।
गुरु पूजन मंत्र
ॐ गुं गुरुभ्यो नम:।
ॐ परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:।
ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।
गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:।गुरुर्साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।

×
Date : 21 July 2024 Posted By : EDITOR
Guru Purnima : गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं..
News Image

 

Guru Purnima - गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं..

गुरु बिना ज्ञान नहीं ज्ञान बिना आत्मा नहीं,
ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन है।

गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुओं एवं शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। सनातन धर्म में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है और गुरुओं को समर्पित एक प्रसिद्ध त्यौहार है गुरु पूर्णिमा। हिन्दू धर्म के साथ-साथ बौद्ध व जैन धर्म के लोग गुरु पूर्णिमा के उत्सव को हर्षोउल्लास से मनाते है। गुरु पूर्णिमा में गुरु शब्द का अर्थ शिक्षक से है।
गुरु पूर्णिमा के दिन शिष्यों द्वारा अपने गुरु के प्रति आस्था को प्रकट किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन विधिवत रूप से गुरु पूजन किया जाता है। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता हैं। सामान्य शब्दों में गुरु वह इंसान होता हैं जो ज्ञान की गंगा बहाता हैं और हमारे जीवन को अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाता हैं। यह पर्व समूचे भारत में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
शिष्यों द्वारा आध्यात्मिक गुरुओं और अकादमिक शिक्षकों को नमन और धन्यवाद करने के लिए गुरु पूर्णिमा के पर्व को मनाया जाता है। सभी गुरु अपने शिष्यों की भलाई के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर देते है। हमेशा से आध्यात्मिक गुरु संसार में शिष्य और दुखी लोगों की सहायता करते आये हैं और ऐसे ही कई उदाहरण हमारे सामने मौजूद है जब गुरुओं ने अपने ज्ञान से अनेक दुखी लोगों की समस्याओं का निवारण किया है।
स्वामी विवेकानंद और गुरु नानक ऐसे ही गुरु थे जिन्होंने हमेशा संसार की भलाई के लिए काम किया हैं। गुरु पूर्णिमा को भारत के अतिरिक्त भूटान और नेपाल आदि देशों में भी मनाया जाता है। हमारे देश की गुरु-शिष्य परंपरा भारत से चलकर दूसरे देशों में गई है। हमेशा से ही आध्यात्मिक गुरु प्रवास पर रहते थे और इसी प्रवास के कारण भारत की ये परम्पराएं दूसरे देशों में भी फैली।
गुरु पूजन मंत्र
ॐ गुं गुरुभ्यो नम:।
ॐ परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:।
ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।
गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:।गुरुर्साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Releated

शारदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ मां दुर्गा की आराधना का महापर्व!

📰 Generate e-Paper Clip शारदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ मां दुर्गा की आराधना का महापर्व! 11 अक्टूबर से नवरात्रि का शुभारंभ, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा भक्ति, शक्ति और आस्था के नौ दिन! रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और शुभ […]

हवमोर ने लालबागचा राजा में गणेश उत्सव की खुशी को डांस सेलिब्रेशन के साथ मनाया

📰 Generate e-Paper Clip हवमोर ने लालबागचा राजा में गणेश उत्सव की खुशी को डांस सेलिब्रेशन के साथ मनाया खास एक्टिवेशन के जरिए इंतजार के पलों को बनाया मजेदार; डांस चैलेंज के साथ विजेताओं को मिलीं मुफ्त हवमोर Mumbai: इस गणेश उत्सव पर हवमोर आइसक्रीम मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा में होने वाले उत्सव का […]