इंदौर ने सिटी फ्रेमवर्क लॉन्च कर युवाओं को शहर की क्लाइमेट प्लानिंग में भागीदारी का अवसर दिया
इंदौर ने सिटी फ्रेमवर्क लॉन्च कर युवाओं को शहर की क्लाइमेट प्लानिंग में भागीदारी का अवसर दिया
यूथ की आवाज़ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स और अन्य भागीदारों ने मिल कर लॉन्च किया एक्ट इंदौर फ्रेमवर्क, जिसमें शहर के क्लाइमेट और प्लानिंग के बारे में निर्णय लेने में युवाओं की स्थायी भागीदारी होगी
इंदौर : आज इंदौर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन में एक्ट इंदौर फ्रेमवर्क लॉन्च किया गया। यूथ की आवाज़ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स के साझा प्रयास से तैयार यह शहर स्तर का फ्रेमवर्क है, जिसका मकसद शहरों के सुशासन और क्लाइमेट एक्शन में युवाओं की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस फ्रेमवर्क का विकास इंदौर क्लाइमेट लीग के 50 फेलो के कार्यों के आधार पर किया गया, जिन्होंने 6 महीनों से अधिक समय तक समुदायों के साथ काम करते हुए क्लाइमेट की स्थानीय चुनौतियों को समझा, प्रमाणिक तथ्य एकत्र और डॉक्यूमेंट किए और फिर शहर के संबद्ध संस्थानों के साथ काम करते हुए इन मुद्दों को आगे बढ़ाया है।
यह फ्रेमवर्क खास कर इंदौर के लिए यूथएक्ट फ्रेमवर्क का अनुकूलन है, जिसका विकास यूथ की आवाज़ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स ने 2024 में किया था। उनका मकदस किशोरों और स्थानीय शहरी निकायों के बीच सुनियोजित भागीदारी सुलभ बनाना है। इस पहल को कार्यरूप देने में एसएचईडीओ, एएएस इंदौर और स्टार्टअप! का अहम योगदान रहा है।
इंदौर इस फ्रेमवर्क का स्थानीयकरण करने वाला पहला शहर है। यह शहरी विकास और क्लाइमेट की सुदृढ़ता पर संवाद में युवाओं के अनुभवों और उनके जुटाए प्रमाणिक तथ्यों को शामिल करने के लिए शहर-स्तर का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स की निदेशिका प्रो. देबोलिना कुंडू ने लॉन्च के अवसर पर कहा, “युवा न केवल शहर की योजनाओं का लाभ उठाने वाले हैं, बल्कि वे शहर के साझेदार, ज्ञान रखने वाले और बदलाव लाने वाले भी हैं। उनकी भागीदारी और नज़रिए से शहर के लिए ज़्यादा समावेशी और असरदार समाधान तैयार करने में मदद मिल सकती है। मैं इस अहम पहल के लिए युवाओं, ‘यूथ की आवाज़’ और सभी साझेदारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ।”
इस अवसर पर आईएमसी के प्रतिनिधि, यूथ लीडर, क्लाइमेट पर कार्यरत लोग, शिक्षाविद, सार्वजनिक संगठन के लोग और अन्य भागीदार सभी एकजुट हुए। उन्होंने यह चर्चा कि युवा पीढ़ी किस तरह शहरों के बारे में निर्णय लेने में सार्थक भूमिका निभाएं और उनके जुटाए प्रामाणिक तथ्य किस तरह शहरी नियोजन और क्रियान्यवन में मदद कर सकते हैं।
यूथ की आवाज़ के फाउंडर और सीईओ अंशुल तिवारी ने एक्ट इंदौर के बारे में बताया, “ACT इंदौर युवाओं के लिए शहरी स्थानीय प्रशासन में पूरी तरह से शामिल होने का रास्ता बनाता है। ऐसे देश में जो अपनी युवा शक्ति का सही इस्तेमाल करना चाहता है और साथ ही जलवायु संकट से भी जूझ रहा है, यह बहुत ज़रूरी है कि युवा नगर निगमों के साथ मिलकर आगे बढ़कर नेतृत्व करें। ACT इंदौर, ‘यूथ की आवाज़’ और ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स’ द्वारा बनाए गए नेशनल यूथ ACT फ़्रेमवर्क पर आधारित है। ज़मीनी स्तर के सहयोगियों, शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं के साथ मिलकर काम करके, यह फ़्रेमवर्क फ़ेलो को IMC की आँख और कान बनने, समुदायों से जुड़ी समस्याओं की पहचान करने और उन्हें संबंधित विभागों तक पहुँचाने में मदद करता है। जलवायु परिवर्तन पर्यावरण और समुदायों पर असर डालता है, और इन चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग सबसे मज़बूत तरीकों में से एक है।”
इंदौर क्लाइमेट लीग के फेलो ने सामुदायिक भागीदारी के तहत आईएमसी स्वास्थ्य विभाग के साथ मलेरिया जागरूकता अभियान में योगदान दिया और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों में भागीदारी की। इस तरह उन्हें स्थानीय चुनौतियों को डॉक्यूमेंट करने और शहर के समुदायों और संस्थानों से सीधे जुड़ने का मौका मिला।
उन्हें प्राप्त सबूतों ने बारंबार तीन चिंताजनक मुद्दे सामने रखे – अपशिष्ट पदार्थ, पानी और गर्मी और यह भी स्पष्ट किया कि ये मुद्दे किस तरह खास कर इंदौर की अनियोजित आबादियों में स्वास्थ्य, जेंडर और जीवनयापन की चुनौतियों से परस्पर जुड़े हैं। इस बारे में इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के कार्यकारी अभियंता श्री सुमीत अस्थाना का कहना है, ‘”युवा और सरकारी सिस्टम मिलकर एक साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर सकते हैं। IMC युवाओं को शामिल करने पर खास ध्यान दे रहा है; उनकी समझ और एनालिसिस से हमें चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने, समाधान तैयार करने और उन्हें चर्चा व अमल के लिए आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।”
शहरों में युवाओं के नेतृत्व वाले क्लाइमेट एक्शन और संस्थागत सहयोग पर हुई एक पैनल चर्चा में सरकार, शिक्षा जगत, सिविल सोसाइटी और युवाओं के प्रतिनिधियों ने क्लाइमेट एक्शन में युवाओं की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि क्लाइमेट चेंज का समुदायों पर पहले से ही असर पड़ रहा है, जिसमें अक्सर महिलाओं को ज़्यादा बोझ उठाना पड़ता है।
