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इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर (Insidious: Out of the Further)

इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर (Insidious: Out of the Further)

रेटिंग: 2.5

UNN @ Varsha Parikh : ‘इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ एक बहुत ही जबरदस्त आईडिया के साथ शुरू होती है, जो आपको पहली नज़र में ही फिल्म से जोड़ देता है। कहानी 1999 से शुरू होती है, जहाँ छोटी बच्ची जेमा (अमेलिया ईव) की ज़िंदगी में एक भयानक मोड़ आता है—उसकी माँ “द फर्दर” नाम की डरावनी भूतों की दुनिया में टाइम-ट्रैवल के दौरान फंस जाती हैं और उनकी मौत हो जाती है। सालों बाद, जब जेमा बड़ी होती है, तो उसे एहसास होता है कि वही डरावने साए उसका पीछा आज भी कर रहे हैं। उसे समझ आता है कि यह खौफनाक पारिवारिक श्राप उसे विरासत में मिला है।
फिल्म का पहला हाफ यकीनन सबसे बेहतरीन है। यह बहुत तेज़ी से आगे बढ़ता है और इसमें इतने ज़बरदस्त ‘जंप-स्केयर्स’ (अचानक डराने वाले पल) हैं कि आपकी सांसें थम सी जाती हैं। शुरुआत में जो रहस्य और सस्पेंस बनता है, उसे देखकर लगता है कि फिल्म के अंत में एक बहुत ही धमाकेदार क्लाइमेक्स देखने को मिलेगा।
फिल्म का एक बड़ा प्लस पॉइंट ‘एलोइस’ का किरदार है, जो शैतानों को रोकने के लिए अलग-अलग समय में सफर करती है। उसकी मौजूदगी कहानी में पुरानी हॉरर फिल्मों वाला मज़ा ले आती है। फिल्म के अंत में वह एक रोंगटे खड़े कर देने वाली चेतावनी भी देती है—”जब एक लाल दरवाज़ा बंद होता है, तो दूसरा खुल जाता है, और उस दरवाज़े के पीछे इससे भी भयानक शैतान खड़ा है।” उसकी यह बात इशारा करती है कि आगे इसके कई और डरावने पार्ट्स (सीक्वल) आ सकते हैं।
लेकिन अफ़सोस, फिल्म का दूसरा हाफ इस पूरी बेहतरीन शुरुआत को खराब कर देता है। अंत की तरफ बढ़ते हुए फिल्म बहुत ज्यादा जल्दबाज़ी में खत्म की गई लगती है, मानो राइटर्स के पास आईडिया ही खत्म हो गए हों। जिस टाइम-ट्रैवल की उलझन को एक होशियार और रोमांचक मोड़ के साथ सुलझाया जाना चाहिए था, उसका अंत बहुत ही कमजोर और निराशाजनक निकलता है।
कुल मिलाकर, ‘इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर’ की शुरुआत तो धमाकेदार है, लेकिन अंत बेहद फीका। तेज़-तर्रार डरावने दृश्य, माँ-बेटी की दुखद कहानी और समय में आगे-पीछे जाने का कॉन्सेप्ट इसे शुरुआत में तो मज़ेदार बनाते हैं, पर इसका कमजोर क्लाइमेक्स इसे एक बेहतरीन हॉरर फिल्म बनने से रोक देता है।

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Date : 22 August 2026 Posted By : EDITOR
इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर (Insidious: Out of the Further)
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इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर (Insidious: Out of the Further)

रेटिंग: 2.5

UNN @ Varsha Parikh : 'इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर' एक बहुत ही जबरदस्त आईडिया के साथ शुरू होती है, जो आपको पहली नज़र में ही फिल्म से जोड़ देता है। कहानी 1999 से शुरू होती है, जहाँ छोटी बच्ची जेमा (अमेलिया ईव) की ज़िंदगी में एक भयानक मोड़ आता है—उसकी माँ "द फर्दर" नाम की डरावनी भूतों की दुनिया में टाइम-ट्रैवल के दौरान फंस जाती हैं और उनकी मौत हो जाती है। सालों बाद, जब जेमा बड़ी होती है, तो उसे एहसास होता है कि वही डरावने साए उसका पीछा आज भी कर रहे हैं। उसे समझ आता है कि यह खौफनाक पारिवारिक श्राप उसे विरासत में मिला है।
फिल्म का पहला हाफ यकीनन सबसे बेहतरीन है। यह बहुत तेज़ी से आगे बढ़ता है और इसमें इतने ज़बरदस्त 'जंप-स्केयर्स' (अचानक डराने वाले पल) हैं कि आपकी सांसें थम सी जाती हैं। शुरुआत में जो रहस्य और सस्पेंस बनता है, उसे देखकर लगता है कि फिल्म के अंत में एक बहुत ही धमाकेदार क्लाइमेक्स देखने को मिलेगा।
फिल्म का एक बड़ा प्लस पॉइंट 'एलोइस' का किरदार है, जो शैतानों को रोकने के लिए अलग-अलग समय में सफर करती है। उसकी मौजूदगी कहानी में पुरानी हॉरर फिल्मों वाला मज़ा ले आती है। फिल्म के अंत में वह एक रोंगटे खड़े कर देने वाली चेतावनी भी देती है—"जब एक लाल दरवाज़ा बंद होता है, तो दूसरा खुल जाता है, और उस दरवाज़े के पीछे इससे भी भयानक शैतान खड़ा है।" उसकी यह बात इशारा करती है कि आगे इसके कई और डरावने पार्ट्स (सीक्वल) आ सकते हैं।
लेकिन अफ़सोस, फिल्म का दूसरा हाफ इस पूरी बेहतरीन शुरुआत को खराब कर देता है। अंत की तरफ बढ़ते हुए फिल्म बहुत ज्यादा जल्दबाज़ी में खत्म की गई लगती है, मानो राइटर्स के पास आईडिया ही खत्म हो गए हों। जिस टाइम-ट्रैवल की उलझन को एक होशियार और रोमांचक मोड़ के साथ सुलझाया जाना चाहिए था, उसका अंत बहुत ही कमजोर और निराशाजनक निकलता है।
कुल मिलाकर, 'इंसिडियस: आउट ऑफ द फर्दर' की शुरुआत तो धमाकेदार है, लेकिन अंत बेहद फीका। तेज़-तर्रार डरावने दृश्य, माँ-बेटी की दुखद कहानी और समय में आगे-पीछे जाने का कॉन्सेप्ट इसे शुरुआत में तो मज़ेदार बनाते हैं, पर इसका कमजोर क्लाइमेक्स इसे एक बेहतरीन हॉरर फिल्म बनने से रोक देता है।

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