चोरवाड़ की बेटी काजल वाजा ने एशियाई मंच पर लहराया तिरंगा, भारत को दिलाया रजत पदक
चोरवाड़ की बेटी काजल वाजा ने एशियाई मंच पर लहराया तिरंगा, भारत को दिलाया रजत पदक
* एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 4×100 मीटर रिले में भारत ने बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
* साधारण किसान परिवार की 19 वर्षीय स्प्रिंटर बनी गुजरात का गौरव
अहमदाबाद | होंगकॉन्ग में आयोजित 22वीं एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गुजरात की उभरती हुई स्प्रिंटर काजल वाजा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और अथक मेहनत के बल पर साधारण परिवारों से आने वाली प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता का परचम लहरा सकती हैं।
जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गांव की 19 वर्षीय काजल वाजा ने रविवार को महिलाओं की 4×100 मीटर रिले स्पर्धा में भारत को रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तमिलनाडु की भावना, हरियाणा की आरती और उत्तर प्रदेश की निपम के साथ भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए काजल ने टीम को 45.05 सेकंड का समय दर्ज कराने में योगदान दिया।
भारतीय टीम ने इस शानदार प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीतने के अलावा अंडर-20 वर्ग में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया। टीम ने 45.08 सेकंड के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते हुए अपनी गति, टीमवर्क और बेहतरीन बैटन एक्सचेंज का प्रदर्शन किया।
* संघर्षों के बीच गढ़ी सफलता की कहानी
काजल की उपलब्धि उसकी साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि को देखते हुए और भी प्रेरणादायक बन जाती है। उसके पिता हीराबाई वाजा जूनागढ़ जिले के समुद्री तटीय गांव चोरवाड़ के एक साधारण किसान एवं खेत मजदूर हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद काजल ने अपने खेल करियर पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा और अपने सपनों को साकार करने के लिए कई त्याग किए। ट्रैक पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए काजल ने 12वीं कक्षा में एक वर्ष का ड्रॉप लेकर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया था। उसकी इसी मेहनत और समर्पण का परिणाम आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई दे रहा है।
काजल के पारिवारिक परिचित मंथन डाभी बताते हैं, “काजल को स्कूल के दिनों से ही खेलों के प्रति विशेष लगाव था और वह लगातार विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रही है।”
* कोच ने बताया देश की सबसे होनहार स्प्रिंटर्स में से एक
काजल के कोच शिवम उपाध्याय उसकी सफलता का श्रेय उसकी निरंतर मेहनत और उत्कृष्टता हासिल करने की तीव्र इच्छा को देते हैं। उन्होंने कहा, “काजल देश की सबसे आशाजनक युवा स्प्रिंटर्स में से एक है। उसने 100 मीटर, 200 मीटर और रिले स्पर्धाओं में कई पदक जीतकर गुजरात का नाम रोशन किया है। उसका अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धी मानसिकता उसे अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती है। वह हर प्रशिक्षण सत्र में पूर्ण समर्पण के साथ भाग लेती है और लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करने का प्रयास करती है।”
* पहले भी जीत चुकी हैं कई बड़े पदक
होंगकॉन्ग में जीता गया यह रजत पदक काजल की उपलब्धियों की सूची में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पहले वर्ष 2025 में रांची में आयोजित दक्षिण एशियाई सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 4×100 मीटर रिले स्पर्धा में भी उन्होंने रजत पदक जीता था।
इसके अलावा 60 मीटर स्पर्धा में अंडर-20 वर्ग का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है। इसी वर्ष मार्च में भुवनेश्वर में आयोजित प्रथम इंडोर ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में काजल ने 7.50 सेकंड का समय दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक जीता था और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया था। इस उपलब्धि ने उन्हें भारत की सबसे प्रतिभाशाली युवा स्प्रिंटर्स में शामिल कर दिया है।
* स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ गुजरात से शुरू हुआ सफर
काजल की खेल यात्रा की शुरुआत स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ गुजरात (एसएजी) के स्कूल कार्यक्रम से हुई थी। वर्ष 2019 में वह कोडीनार स्थित जिला स्तरीय स्पोर्ट्स स्कूल (डीएलएसएस) से जुड़ीं, जहां उनकी प्रतिभा को व्यवस्थित रूप से निखारा गया। उनकी क्षमता को पहचानते हुए वर्ष 2023 में उनका चयन नडियाद स्थित हाई-परफॉर्मेंस सेंटर (एचपीसी) के लिए किया गया, जहां वह वर्तमान में उन्नत प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त कर रही हैं।
