खड़गे बोले- भाषण के अंश हटाना लोकतंत्र के खिलाफ, राज्यसभा वेबसाइट पर विवाद
खड़गे बोले- भाषण के अंश हटाना लोकतंत्र के खिलाफ, राज्यसभा वेबसाइट पर विवाद
नई दिल्ली । राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सदन में उनके दिए भाषण का एक हिस्सा राज्यसभा की वेबसाइट से हटा दिया गया है। इस पर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि सभी बातें नियमों के दायरे में रहकर कर कही थीं। जवाब में सभापति ने कहा कि वे इस विषय को देखेंगे। खड़गे ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि हटाए गए अंशों को जोड़ा जाए। इस पर सदन में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह फैसला सभापति का होता है और सभापति ने यदि अपने विवेक से नियमों के आधार पर फैसला लिया है तो ऐसे में नेता प्रतिपक्ष को ऐसी मांग नहीं करनी चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सदन में दिए गए उनके भाषण का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी उचित कारण के हटा दिया। उन्होंने जब राज्यसभा की वेबसाइट देखी तो उन्हें यहां अपने भाषण के अंश नहीं मिले। खड़गे ने सदन में आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन अंशों को रिकॉर्ड से बाहर किया गया है, उनमें मुख्य रूप से वे हिस्से शामिल हैं जहां उन्होंने वर्तमान सरकार के कार्यकाल में संसदीय कामकाज की स्थिति पर तथ्य आधारित टिप्पणियां की थीं और कुछ नीतियों पर पीएम मोदी की आलोचना की थी।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते यह उनका दायित्व है कि वे उन नीतियों पर सवाल उठाएं जो उन्हें लगता है कि देश और जनमानस पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मेरा संसदीय जीवन पांच दशक से ज्यादा का है। विधायक और सांसद के रूप में लंबे अनुभव के दौरान मैंने सदन की गरिमा, नियमों और परंपराओं का हमेशा सम्मान किया है। मैं भली-भांति जानता हूं कि किन परिस्थितियों में किन शब्दों को रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। इसलिए पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूं कि मेरे भाषण में कोई भी असंसदीय या मानहानिकारक शब्द नहीं था।
