Movie Review – मूवी रिव्यू: हक – “HaQ”
मूवी रिव्यू: हक – “HaQ” एक विचारोत्तेजक कोर्टरूम ड्रामा
ऐक्टर:इमरान हाशमी,यामी गौतम धर,शीबा चड्ढा,वर्तिका सिंह
डायरेक्टर :सुपर्ण वर्मा
रेटिंग – 2.5/5
UNN@ वर्षा पारीख : “HaQ” एक शक्तिशाली कोर्टरूम ड्रामा है जो एक ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रेरित है। यह फिल्म अधिकारों और गुजारा भत्ता जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालती है, जो हमारे समाज में गहराई से जड़े हुए हैं।
‘हक’ की कहानी
फिल्म की कहानी साठ के दशक में उत्तर प्रदेश के एक कस्बे में शुरू होती है। मशहूर वकील अहमद खान (इमरान हाशमी), शाजिया बानो (यामी गौतम धर) को पसंद करता है और उससे निकाह कर लेता है। दोनों की शादीशुदा जिंदगी खुशहाली से बीत रही थी। इस दौरान उनके तीन बच्चे हुए। फिर एक दिन अहमद को अपनी पहली प्रेमिका सायरा (वर्तिका सिंह) के पति के गुजरने की खबर मिलती है। वह शाजिया को इस बारे में कोई जानकारी दिए बिना सायरा से निकाह करके उसे घर ले आता है। शौहर की नई बेगम के आने के बाद शाजिया के लिए घर में रहना मुश्किल हो जाता है। वह अपने बच्चों के साथ मायके चली जाती है। कुछ अरसे तक गुजारे के लिए रुपये देने के बाद अहमद उसे खर्च भी देना बंद कर देता है। शाजिया अपने हक की मांग करती है, तो वह उसे तीन तलाक देकर उससे नाता तोड़ लेता है। धार्मिक अदालतों में मामले का निपटारा नहीं हो पाने पर निराश शाजिया अपने पिता के मदद से जिला अदालत में गुजारे भत्ते का केस दाखिल करती है। लंबी सुनवाई के बाद अदालत शाजिया के हक में फैसला सुनाती है। हाई कोर्ट होते हुए यह बहुचर्चित शाजिया मामला देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है।
निर्देशन और अभिनय
सुपर्ण एस वर्मा के निर्देशन में फिल्म की कहानी को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पेश किया गया है। अभिनेताओं ने अपने किरदारों को बखूबी निभाया है और दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
सामाजिक संदेश
“HaQ” एक ऐसा फिल्म है जो न केवल मनोरंजन करती है बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालती है। यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करती है।
निष्कर्ष
“HaQ” एक शक्तिशाली और विचारोत्तेजक फिल्म है जो दर्शकों को प्रभावित करेगी। यदि आप एक अच्छी और विचारोत्तेजक फिल्म देखना चाहते हैं तो “HaQ” जरूर देखें। धन्यवाद update now newspaper
