On the first Monday of Sawan, a flood of Shiva temples

सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

ताड़केश्वर महादेव का 151 किलो घी से अभिषेक, काशी में 3 किमी लंबी कतारें

नई दिल्ली | सावन के पहले सोमवार को देशभर में शिवभक्तों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही मंदिरों में घंटा-घड़ियाल की ध्वनि और बम-बम भोले और हर हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। भगवान शिव को समर्पित इस पावन माह के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं ने व्रत, पूजा और जलाभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगा। जयपुर के ताड़केश्वर महादेव मंदिर में 151 किलो शुद्ध देसी घी से विशेष अभिषेक किया गया और मंदिर को 3100 किलो आमों से सजाया गया।
श्रद्धालुओं के लिए सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित करने वाला होता है। वहीं सावन के पहले सोमवार के दिन देशभर के शिव मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस खास दिन शिव भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने व्रत और पूजा अनुष्ठान करते हैं। इस अवसर पर देशभर के शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ा है। दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में सावन सोमवार को भारी भीड़ उमड़ी और श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ की। इसी तरह गायिजाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
तड़के खुले महाकाल के द्वार
लखनऊ, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, गाजियाबाद, दिल्ली, उज्जैन, गुवाहाटी समेत देश के प्रमुख शिवालयों में अलसुबह से ही भक्तों का रेला देखने को मिला। उज्जैन में बाबा महाकाल के मंदिर के कपाट तड़के 2.30 बजे ही खोल दिए गए, जहां सावन में करीब 80 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। हजारों श्रद्धालु तड़के ही बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंच गए।
विश्वनाथ मंदिर के बाहर लगी लंबी कतार
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की 3 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। यहां सुबह 4 बजे मंगला आरती के साथ मंदिर के कपाट खुले, लेकिन भक्तों को दर्शन का अवसर महज एक सेकंड के लिए मिल सका। वाराणसी में यादव समाज की विशेष परंपरा भी देखने को मिली, जहां हजारों लोग डमरू और गंगाजल से भरे कलश लेकर बाबा विश्वनाथ का अभिषेक करने पहुंचे। सावन माह के पहले सोमवार को लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में भी भक्तों ने आरती की।
जलाभिषेक करने लाखों कांवड़िये पहुंचे
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ धाम में लाखों कांवड़िये जलाभिषेक के लिए पहुंचे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की व्यवस्था की है। सावन का यह पहला सोमवार शिवभक्तों की अटूट आस्था और परंपरा की अद्भुत झलक लेकर आया, जिसने एक बार फिर देश को ‘हर-हर महादेव’ की गूंज से भर दिया।
गौरी की तपस्या से प्रसन्न हुए शिव
मान्यता के अनुसार सावन का यह वही माह है जबकि देवी गौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए थे। इसी के साथ मान्यता है कि प्रसन्न भगवान शिव ने देवी गौरी को पत्नी के रूप में स्वीकारा था। यह भी कहा जाता है कि हर साल देवों के देव महादेव सावन माह में ही अपनी ससुराल भी जाते हैं। इन मान्यताओं के अनुसार यह पूरा माह ही बेहद पवित्र और पूजा-पाठ करने वाला माना जाता है। ऐसे में शिव-भक्त सावन सोमवार के दिन व्रत और पूजा अनुष्ठान करते हैं।
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चुनाव आयोग की बड़ी तैयारी: बिहार के बाद पूरे देश में होगी मतदाता सूची की जांच

नई दिल्ली(ईएमएस)। बिहार में चल रही मतदाता सूचियों की जांच में कई विदेशियों के नाम सूची में हैं। इसके बाद चुनाव आयोग और सतर्क हो गया है। अब पूरे देश में मतदाता सूची जांचने का काम किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने के लिए सभी राज्यों में अपनी चुनाव मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। कई विपक्षी दलों और अन्य लोगों ने इस व्यापक प्रक्रिया को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था और कहा था कि इससे पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित होना पड़ेगा।
राज्यों में पिछला विशेष गहन पुनरीक्षण, आधार तिथि के रूप में काम करेगा, क्योंकि निर्वाचन आयोग बिहार की 2003 की मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कर रहा है। अधिकांश राज्यों ने 2002 और 2004 के बीच मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया था। कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) ने अपने-अपने राज्यों में पूर्व में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित मतदाता सूची को जारी करना शुरू कर दिया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई है, जब राष्ट्रीय राजधानी में अंतिम बार व्यापक पुनरीक्षण हुआ था। उत्तराखंड में, आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण 2006 में हुआ था और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
एक अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन अधिकारी 28 जुलाई के बाद राष्ट्रव्यापी पुनरीक्षण पर अंतिम फैसला लेंगे, जब बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामला शीर्ष अदालत में फिर से सुनवाई के लिए आएगा। निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि वह अंततः पूरे भारत में मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करेगा, ताकि विदेशी अवैध प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच करके उन्हें हटाया जा सके। बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि पांच अन्य राज्यों – असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होंगे। यह कदम बांग्लादेश और म्यांमा सहित विभिन्न राज्यों में अवैध विदेशी प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर महत्वपूर्ण है।

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