Petition in Supreme Court regarding Aadhaar Demand to

आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: सिर्फ 6 साल तक के बच्चों का आधार बनाने की मांग

आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: सिर्फ 6 साल तक के बच्चों का आधार बनाने की मांग

नई दिल्ली । आधार पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि देश में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह वर्ष तक के बच्चों तक सीमित कर दी जाए। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि भारत की लगभग 99 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 144 करोड़ लोगों का आधार पहले ही बन चुका है। ऐसे में अब वयस्कों के लिए आधार बनाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वर्तमान व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए कुछ विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के जरिए आधार बनवा रहे हैं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।
याचिका में विशेष रूप से कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से आधार पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि इन केंद्रों पर कथित रूप से पैसे लेकर फर्जी आधार बनाए जा रहे हैं, जिनका फायदा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या जैसे बाहरी तत्व उठा सकते हैं।
अश्विनी उपाध्याय ने सुझाव दिया है कि छह वर्ष से अधिक आयु के लोगों के आधार पंजीकरण की प्रक्रिया केवल तहसीलदार या एसडीएम कार्यालयों तक सीमित की जाए, ताकि सत्यापन कड़ा हो और फर्जीवाड़े पर रोक लगे। साथ ही, आधार केंद्रों पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाने की भी मांग की गई है, जिसमें फर्जी दस्तावेज बनाना एक गंभीर अपराध बताया जाए और इसके लिए कड़ी सजा का उल्लेख हो।
याचिका में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि आधार, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए आवेदन करते समय आवेदक से एक लिखित अंडरटेकिंग ली जाए। इसमें व्यक्ति को यह घोषित करना होगा कि दी गई जानकारी सही है और गलत पाए जाने पर वह कानूनी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगा।
इसके अलावा, फर्जी दस्तावेज बनाने के मामलों में सजा के प्रावधान को और सख्त करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में “कनकरेंट सजा” (एक साथ सजा चलना) के बजाय “क्रमिक सजा” लागू होनी चाहिए, ताकि अपराधियों में कानून का भय बढ़े।
याचिकाकर्ता का कहना है कि फर्जी आधार और अन्य दस्तावेज न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि इससे देश के सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप की अपील की गई है।

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