Double whammy of inflation: Wholesale inflation hit 9.87 percent

महंगाई की दोहरी मार: जून में 9.87 प्रतिशत पर पहुंची थोक महंगाई, 44 महीने में सबसे ज्यादा

महंगाई की दोहरी मार: जून में 9.87 प्रतिशत पर पहुंची थोक महंगाई, 44 महीने में सबसे ज्यादा

खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान हुए महंगे

नई दिल्ली। देश में आम जनता से लेकर नीति निर्माताओं के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक बड़ी और चिंताजनक खबर आई है। जून के महीने में भारत की थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर बढक़र 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है। मई में यह आंकड़ा 9.68 प्रतिशत पर था। सितंबर 2022 में ये 10.70 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने मंगलवार को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और खाद्य पदार्थों में आए भारी उछाल ने इस बढ़ोतरी को हवा दी है। खास बात यह है कि यह आंकड़े संशोधित आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित हैं। इस उछाल ने न केवल विनिर्माण क्षेत्र की लागत बढ़ा दी है, बल्कि आगामी दिनों में खुदरा बाजार में भी कीमतों के बढऩे का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। महंगाई बढऩे की वजह रोजमर्रा की जरूरत के सामान और खाने-पीने की चीजों का महंगा होना है। अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से चल रहा तनाव कम नहीं हुआ तो इसके दामों में और इजाफा हो सकता है। इससे पहले सोमवार रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। रिटेल महंगाई भी लगातार छठे महीने बढक़र 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
रोजाना की जरूरत वाले सामानों (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 4.99 प्रतिशत से बढक़र 7.00 प्रतिशत हो गई है। खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई 4.49 प्रतिशत से बढक़र 6.14 प्रतिशत पर पहुंच गई है। फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर 30.33 प्रतिशत से घटकर 27.41 प्रतिशत हो गई है। मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई में कोई बदलाव नहीं है। यह 7.48 प्रतिशत रही। अल नीनो के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़े दबाव और भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की अस्थिरता ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई की नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजरें जुलाई के मानसून और वैश्विक कमोडिटी बाजार के रुख पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि महंगाई की यह तपिश कब शांत होगी।
थोक महंगाई में तेज उछाल की मुख्य वजह
इस बार थोक महंगाई को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ खाद्य उत्पादों और गैर-खाद्य वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों का रहा है। बारिश की कमी और अल नीनो के प्रभाव के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे जून में खाद्य महंगाई दर तेजी से बढक़र 5.49 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में महज 3.60 प्रतिशत थी। इसके साथ ही, गैर-खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर भी उच्च स्तर पर यानी 11.07 प्रतिशत दर्ज की गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, जून 2026 में थोक महंगाई को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं-मिनरल ऑयल्स (पेट्रोलियम उत्पाद), खाद्य वस्तुएं, बुनियादी धातुओं का निर्माण, रसायन और रासायनिक उत्पादों का निर्माण आदि।

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