India will sign IPEF agreement after formation of new government

नई सरकार के गठन के बाद भारत करेगा IPEF समझौता, आर्थिक जुड़ाव मजबूत करना

 

नई सरकार के गठन के बाद भारत करेगा IPEF समझौता, आर्थिक जुड़ाव मजबूत करना
21वीं सदी की चुनौतियों को दूर करना है लक्ष्य

Mumbai: नई सरकार के गठन के बाद भारत, समृद्धि के लिए भारत-प्रशांत आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) के तहत स्वच्छ और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था समझौतों पर हस्ताक्षर करेगा। यह अमेरिका के नेतृत्व में किया गया आर्थिक पहल है। भारत को छोड़कर आईपीईएफ के शेष 13 सदस्य देश दो समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इन समझौतों का लक्ष्य 21वीं सदी की चुनौतियों को दूर करना और महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में आर्थिक जुड़ाव मजबूत करना है। भारत ने मंत्रिस्तरीय विचार-विमर्श व हस्ताक्षर की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था लेकिन औपचारिक रूप से इन समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं किया था। इसका कारण घरेलू स्तर पर मंजूरी लेने की प्रक्रिया का जारी रहना था। वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि नई सरकार के शपथ ग्रहण करने के बाद अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ये समझौते तब लागू होंगे जब आईपीईएफ के कम से कम पांच साझेदार अनुसमर्थन, स्वीकृति और अनुमोदन की आंतरिक कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर लेंगे। आईपीईएफ के चार स्तंभ – व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, स्वच्छ अर्थव्यवस्था और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था (कर और भ्रष्टाचार विरोध) हैं। भारत अन्य देशों के साथ मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर पहले ही हस्ताक्षर कर चुका है। अब भारत को व्यापार स्तंभ में शामिल होने पर फैसला करना है। आईपीईएफ में भारत और अमेरिका के अलावा 12 अन्य देश ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, फिजी, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं। इन देशों की विश्व आर्थिक उत्पादन में 40 फीसदी और व्यापार में 28 फीसदी हिस्सेदारी है।
निवेशक मंच
आधिकारिक बयान के अनुसार सिंगापुर में आईपीईएफ स्वच्छ निवेशक मंच में 23 अरब डॉलर की कुल 69 सतत आधारभूत परियोजनाओं को चिह्नित किया गया है। आईपीईएफ के स्वच्छ अर्थव्यवस्था समझौते को आगे बढ़ाने में निवेशक मंच प्रमुख पहल है। इस क्रम में स्वच्छ ऊर्जा का विकास और उसे स्थापित किया जाना है। इसके अलावा आईपीईएफ अर्थव्यवस्थाओं के लिए पर्यावरण अनुकूल आधारभूत ढांचे व तकनीकी के लिए धन जुटाने में मदद की जाएगी। सिंगापुर के व्यापार व अर्थव्यवस्था के मंत्रालय ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। सिंगापुर के इस मंत्रालय के वक्तव्य के अनुसार 69 परियोजनाओं में से 6 अरब डॉलर की 20 निवेश तैयार परियोजनाएं निवेशकों के समक्ष बिज़नेस मैचिंग सत्रों में पेश की गई थीं। शेष 17 अरब डॉलर की परियोजनाओं को भविष्य की संभावनाओं के रूप में चिह्नित किया गया है। सिंगापुर में 6 जून को हुई आईपीईएफ की अंतर मंत्रालयी बैठक में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के सचिव सुनील बड़थ्वाल ने किया।

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