Onion Tears Maharashtra's Farmers in Deep Crisis Struggling

प्याज के आँसू: महाराष्ट्र के किसान गहरे संकट में, लागत भी निकालना मुश्किल

प्याज के आँसू: महाराष्ट्र के किसान गहरे संकट में, लागत भी निकालना मुश्किल

जंग के कारण निर्यात हुआ कम, कौड़ियों में बिक रहा प्याज

नासिक । महाराष्ट्र के नासिक और सोलापुर जिलों से सामने आ रही तस्वीरें इसका सबूत हैं कि मुसीबत की घड़ी आ गई है। प्याज के गिरते दामों ने इन क्षेत्रों के हजारों किसानों की कमर तोड़ दी है। मंडियों में प्याज की भरमार है, लेकिन खरीदार न मिलने या बहुत कम दाम मिलने के कारण अन्नदाता परेशान हैं। उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलना तो दूर, लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है, जिससे दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है। इस सीजन में महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक बेल्ट में किसानों को भारी निराशा हाथ लगी है। पहले बेमौसम बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया, और अब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण प्याज का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो गया है। नतीजतन, थोक मंडियों में प्याज के दाम उत्पादन लागत से काफी नीचे गिर गए हैं, इससे किसानों को भारी वित्तीय घाटा हो रहा है।
नासिक, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर के किसानों के कई हृदय विदारक मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाथन तालुका के किसान ने 1,262 किलो प्याज बेचने के बाद अपने खाते में माइनस एक रुपया देखा, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसी तरह, सताना एपीएमसी में जितेंद्र सोलंकी को 30 क्विंटल प्याज 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ा, जबकि प्याज को उगाने में 1,200 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आया था। उन्हें सीधे तौर पर 36,000 रुपये का घाटा हुआ। पुणे के किसान बताते हैं कि वे प्याज को 4-5 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं, जबकि उनकी उत्पादन लागत 12 रुपये प्रति किलो से कहीं अधिक है।
वहीं देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगांव एपीएमसी में भी हालात गंभीर हैं। यहां भाव 400 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश, करीब 80 प्रतिशत प्याज 800 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम में बिक रहा है। सोलापुर में 13 मई को 14,756 क्विंटल प्याज की आवक हुई, लेकिन भाव 100 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच ही रहे। महाराष्ट्र ऑनियन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार, प्याज का ब्रेक-ईवन भाव 18 रुपये प्रति किलो है, जबकि अधिकांश किसान 4-8 रुपये प्रति किलो में बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि इस बार ग्रेड-1 प्याज की मात्रा कम है और युद्ध के कारण विदेशों में मांग घटने से निर्यात में भी कमी आई है। संकट से जूझ रहे किसान अब मोदी सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 3,500 रुपये प्रति क्विंटल और संकट बिक्री के लिए 1,500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजे की मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार से जल्द से जल्द राहत पैकेज की अपील की जा रही है, अन्यथा यह संकट और भी गहरा सकता है, जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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Date : 19 May 2026 Posted By : EDITOR
प्याज के आँसू: महाराष्ट्र के किसान गहरे संकट में, लागत भी निकालना मुश्किल
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प्याज के आँसू: महाराष्ट्र के किसान गहरे संकट में, लागत भी निकालना मुश्किल

जंग के कारण निर्यात हुआ कम, कौड़ियों में बिक रहा प्याज

नासिक । महाराष्ट्र के नासिक और सोलापुर जिलों से सामने आ रही तस्वीरें इसका सबूत हैं कि मुसीबत की घड़ी आ गई है। प्याज के गिरते दामों ने इन क्षेत्रों के हजारों किसानों की कमर तोड़ दी है। मंडियों में प्याज की भरमार है, लेकिन खरीदार न मिलने या बहुत कम दाम मिलने के कारण अन्नदाता परेशान हैं। उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलना तो दूर, लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है, जिससे दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है। इस सीजन में महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक बेल्ट में किसानों को भारी निराशा हाथ लगी है। पहले बेमौसम बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया, और अब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण प्याज का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो गया है। नतीजतन, थोक मंडियों में प्याज के दाम उत्पादन लागत से काफी नीचे गिर गए हैं, इससे किसानों को भारी वित्तीय घाटा हो रहा है।
नासिक, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर के किसानों के कई हृदय विदारक मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाथन तालुका के किसान ने 1,262 किलो प्याज बेचने के बाद अपने खाते में माइनस एक रुपया देखा, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसी तरह, सताना एपीएमसी में जितेंद्र सोलंकी को 30 क्विंटल प्याज 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ा, जबकि प्याज को उगाने में 1,200 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आया था। उन्हें सीधे तौर पर 36,000 रुपये का घाटा हुआ। पुणे के किसान बताते हैं कि वे प्याज को 4-5 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं, जबकि उनकी उत्पादन लागत 12 रुपये प्रति किलो से कहीं अधिक है।
वहीं देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगांव एपीएमसी में भी हालात गंभीर हैं। यहां भाव 400 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश, करीब 80 प्रतिशत प्याज 800 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम में बिक रहा है। सोलापुर में 13 मई को 14,756 क्विंटल प्याज की आवक हुई, लेकिन भाव 100 से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच ही रहे। महाराष्ट्र ऑनियन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार, प्याज का ब्रेक-ईवन भाव 18 रुपये प्रति किलो है, जबकि अधिकांश किसान 4-8 रुपये प्रति किलो में बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि इस बार ग्रेड-1 प्याज की मात्रा कम है और युद्ध के कारण विदेशों में मांग घटने से निर्यात में भी कमी आई है। संकट से जूझ रहे किसान अब मोदी सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 3,500 रुपये प्रति क्विंटल और संकट बिक्री के लिए 1,500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजे की मांग कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार से जल्द से जल्द राहत पैकेज की अपील की जा रही है, अन्यथा यह संकट और भी गहरा सकता है, जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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