Lathmar and Laddu Holi in Barsana, Masaan in Varanasi

बरसाना में लट्ठमार और लड्डू होली, वाराणसी में मसान

देश में होली का लेकर जबदस्त उत्साह हैं……..बरसाना में लट्ठमार और लड्डू होली, वाराणसी में मसान

महाराष्ट्र में होली रंग पंचमी तक, पंजाब में होला मोहल्ला होली

नई दिल्ली । रंगों का त्यौहार होली 4 मार्च को है, इस लेकर देशभर में रंगों, मिष्ठान, नए कपड़ों और उल्लास के साथ होली की तैयारी जारी है। खुशियों से भरा त्यौहार होली सिर्फ रंग खेलने का मौका नहीं बल्कि बसंत के आगमन, बुराई पर अच्छाई की जीत और प्रेम-भाईचारे का प्रतीक है। होली पूरे देश में अलग-अलग नाम और अनोखे अंदाज के साथ मनाई जाती है। यूपी के ब्रज क्षेत्र में होली सबसे पारंपरिक और जीवंत रूप में मनाई जाती है। यहां होली का उत्सव फगुआ दूज से शुरू होकर कई दिनों तक चलता है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली बहुत प्रसिद्ध है। लोककथा के अनुसार, श्रीकृष्ण राधाजी के गांव बरसाना होली खेलने आए थे। आज भी महिलाएं हंसी-मजाक में पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं।
वहीं, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली खेली जाती है। भक्त फूलों की पंखुड़ियां बरसाते हैं। वहीं बरसाना के श्रीजी मंदिर में लड्डू होली की परंपरा है, जहां रंग लगाने से पहले लड्डुओं की वर्षा होती है। ब्रज में होली 40 दिनों तक कई रूपों में मनाई जाती है।
कृष्णनगरी के बाद शिवनगरी काशी में मसान होली की परंपरा है। वाराणसी में होली को मसान होली के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों और गणों के साथ मसान में भस्म से होली खेलते हैं। हरियाणा में होली को धुलंडी कहते हैं। यहां ननद-भाभी की चुटीली नोकझोंक और पारिवारिक हंसी-मजाक मुख्य आकर्षण होता है। वहीं महाराष्ट्र में होली रंग पंचमी तक चलती है। मुख्य होली के पांचवें दिन रंग खेलने की खास परंपरा है। वहीं, गोवा में शिग्मो के नाम से मनाई जाती है, जिसमें भव्य झांकियां, जुलूस और लोकनृत्य होते हैं। राज्य के लोग एक-दूसरे को बधाई देते हुए पकवान खाते हैं। वहीं, गुजरात में पहले होलिका दहन और अगले दिन धुलेटी मनाई जाती है।
केरल के कोंकणी समुदाय में होली को मंजल कुली या उकुली कहते हैं, जहां रंगों की जगह हल्दी वाला पानी इस्तेमाल होता है। अन्य राज्यों में भी अलग-अलग नामों और खास अंदाज में जश्न मनाने की परंपरा रही है। ओडिशा में डोला पूर्णिमा, बिहार-झारखंड में फगुआ या फगुवा, असम में फाकुवा या दौल और मणिपुर में याओसांग के रूप में मनाया जाता है, जो छह दिनों तक चलता है।
पंजाब में सिख समुदाय का होला मोहल्ला होली के आसपास होता है। इसमें गतका, तलवारबाजी और घुड़सवारी जैसे शौर्य प्रदर्शन होते हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं में बैठकी होली और खड़ी होली होती है। यहां रंग के साथ ही शास्त्रीय रागों-लोकगीतों का गायन होता है। हिमाचल प्रदेश में होली को फाग कहते हैं, जहां लोकगीत और नृत्य के साथ उत्सव मनाया जाता है। वहीं, पश्चिम बंगाल में डोल जात्रा या बसंत उत्सव के रूप में होली का पर्व मनाया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Releated

1 अगस्त से बड़ा बदलाव: LPG, पेट्रोल-डीजल, ITR और रेल टिकट के नए नियम लागू

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱1 अगस्त से बड़ा बदलाव: LPG, पेट्रोल-डीजल, ITR और रेल टिकट के नए नियम लागू Mumbai: अगस्त महीने की शुरुआत के साथ ही आज ,1 अगस्त से देशभर में कई बड़े नियम लागू हो गए हैं. इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर […]

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 : जूडो में भारत का ऐतिहासिक धमाका, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जीते गोल्ड मेडल; राजनाथ सिंह ने दी बधाई

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 : जूडो में भारत का ऐतिहासिक धमाका, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जीते गोल्ड मेडल; राजनाथ सिंह ने दी बधाई ग्लासगो। ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार का दिन भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। भारतीय जूडोकाओं ने अपने शानदार प्रदर्शन […]